Jharkhand Rajya Sabha Polls: कौन हैं NDA उम्मीदवार परिमल नथवाणी, जिनकी जीत ने बिगाड़ा कांग्रेस का पूरा गणित ?
Jharkhand Rajya Sabha Election: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं। चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है, क्योंकि मतदान के दौरान हुई कथित क्रॉस वोटिंग ने पूरे चुनावी गणित को बदल दिया।
एक सीट पर एनडीए (NDA) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी ने जीत दर्ज की, जबकि दूसरी सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम विजयी रहे। सबसे बड़ा झटका कांग्रेस को लगा, क्योंकि प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा।

क्या रहा चुनाव का नतीजा?
राज्यसभा चुनाव में NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी को 28 वोट मिले। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को केवल 20 वोट ही प्राप्त हुए। दूसरी ओर, JMM उम्मीदवार बैद्यनाथ राम को 30 वोट मिले और उन्होंने आसानी से जीत हासिल कर ली। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, कुल तीन वोट अमान्य घोषित किए गए। इनमें दो वोट भाजपा के विधायकों के और एक वोट कांग्रेस विधायक का बताया गया है।
क्रॉस वोटिंग ने कैसे बदला पूरा समीकरण?
इस चुनाव का सबसे चर्चित पहलू क्रॉस वोटिंग रहा। झारखंड विधानसभा में NDA के पास कुल 24 विधायक हैं। इनमें:
- भाजपा - 21 विधायक
- आजसू पार्टी - 1 विधायक
- जेडीयू - 1 विधायक
- लोजपा (रामविलास) - 1 विधायक
यानी NDA के पास कुल 24 वोट थे।
शुरुआती आंकड़ों के लिहाज से झारखंड में सत्तारूढ़ महागठबंधन (JMM, कांग्रेस, आरजेडी और भाकपा-माले) के पास कुल 56 विधायकों का मजबूत समर्थन था। JMM के पास 34 और कांग्रेस के पास 16 विधायक थे। इस नंबर गेम के हिसाब से 'इंडिया' गठबंधन दोनों सीटें आसानी से जीत सकता था।
दूसरी तरफ, NDA के पास केवल 24 विधायक थे, जो जीत के आंकड़े (28 वोट) से 4 कम थे। लेकिन NDA ने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी पर दांव खेलकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया। आखिरकार, INDIA Bloc के वोटों में सेंधमारी हुई और विधायकों की 'क्रॉस वोटिंग' की बदौलत नथवाणी को जरूरी 28 वोट मिल गए और कांग्रेस के प्रणव झा महज 20 वोटों पर सिमट गए।
Who Is Parimal Nathwani कौन हैं परिमल नथवाणी? मुकेश अंबानी के 'राइट हैंड' और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बड़े चेहरे
परिमल नथवाणी कोई साधारण राजनेता नहीं हैं, बल्कि वह भारत और एशिया के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घराने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के सबसे भरोसेमंद चेहरों में से एक हैं। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज में डायरेक्टर - कॉर्पोरेट अफेयर्स के पद पर हैं। नथवाणी 1997 में रिलायंस ग्रुप से जुड़े थे। वह खुद बताते हैं कि ग्रुप के फाउंडर धीरुभाई अंबानी ने उन पर भरोसा जताया था।
दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी (जामनगर मेगा कॉम्प्लेक्स) के लिए जमीन अधिग्रहण करने और किसानों की समस्याओं को सुलझाने में परिमल नथवाणी ने सबसे मुख्य भूमिका निभाई थी। इसके अलावा गुजरात में रिलायंस जियो (Reliance Jio) के नेटवर्क रोल-आउट का जिम्मा भी उन्हीं के पास था।
झारखंड से पुराना नाता: चौथी बार पहुंच रहे हैं राज्यसभा
कई लोगों को लग सकता है कि परिमल नथवाणी झारखंड के लिए नए हैं, लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है। झारखंड की राजनीति और वहां के विधायकों के बीच उनकी गहरी पैठ है।
2008 (पहली बार): वह पहली बार मार्च 2008 में झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुंचे थे।
2014 (दूसरी बार): साल 2014 में वह दोबारा झारखंड से ही राज्यसभा के लिए चुने गए।
2020 (तीसरी बार): दो टर्म झारखंड में पूरा करने के बाद, साल 2020 में वह आंध्र प्रदेश से वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP) के टिकट पर राज्यसभा गए, जहां उनका कार्यकाल 21 जून 2026 को खत्म हो रहा है।
2026 (चौथी बार): अब एक बार फिर उन्होंने अपनी पुरानी कर्मभूमि झारखंड का रुख किया और एनडीए के समर्थन से निर्दलीय चुनाव जीतकर चौथी बार देश के उच्च सदन (Upper House) का टिकट पक्का कर लिया।
कैसे बिगाड़ा कांग्रेस का खेल?
झारखंड विधानसभा में नंबर गेम पूरी तरह कांग्रेस और जेएमएम के पक्ष में था। जेएमएम के पास 34 और कांग्रेस के पास 16 विधायक थे। जेएमएम के बैद्यनाथ राम ने 30 वोट पाकर शिबू सोरेन के निधन से खाली हुई सीट पर आसानी से जीत दर्ज की।
लेकिन दूसरी सीट के लिए कांग्रेस के प्रणव झा को सिर्फ 20 वोट मिले। एनडीए ने परिमल नथवाणी के कॉर्पोरेट और राजनीतिक रसूख को देखते हुए उन पर दांव लगाया। नथवाणी की जबरदस्त नेटवर्किंग का ही नतीजा था कि विरोधी खेमे के कम से कम 4 विधायकों ने 'क्रॉस वोटिंग' कर अपना कीमती वोट नथवाणी की झोली में डाल दिया, जिससे वह जादुई आंकड़े (28) तक पहुंच गए और कांग्रेस देखती रह गई।














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