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मिठाई की दुकान से DSP की कुर्सी तक! UPSC की असफलता नहीं तोड़ पाई हौसला, पहले एटेम्पट में Raju Modanwal बने DSP

UPPCS Rank 11 Raju Modanwal Success Story: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा घोषित PCS 2024 के परिणामों में जौनपुर के चंदवक इलाके के एक साधारण परिवार के बेटे ने अपनी सफलता का परचम लहराया है। बनारस रोड स्थित खुज्झी मोड़ पर मिठाई की एक छोटी सी दुकान चलाने वाले सूरज मोदनवाल के बेटे राजू मोदनवाल ने पूरे प्रदेश में 11वीं रैंक हासिल कर सबको चौंका दिया है।

राजू का चयन डिप्टी एसपी (DSP) के प्रतिष्ठित पद के लिए हुआ है। जैसे ही यह खबर गांव पहुंची, मिठाई की उस छोटी सी दुकान पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। राजू की इस ऐतिहासिक कामयाबी ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे जौनपुर जिले का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

Raju Modanwal UPPSC Rank 11 DSP

खुशी से छलके पिता के आंसू, मां ने बताया संघर्ष का सफर

राजू के चयन की खबर मिलते ही उनके घर और गांव में जश्न का माहौल है। सालों से मेहनत और ईमानदारी से दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले पिता सूरज मोदनवाल बेटे की इस उपलब्धि पर भावुक हो गए। उन्होंने नम आंखों से कहा कि उन्होंने राजू को सिर्फ पढ़ने की आजादी दी थी, बाकी पूरी मेहनत और तपस्या राजू की अपनी है। वहीं, राजू की मां ने बताया कि घर में साधन सीमित थे, लेकिन राजू ने कभी अपनी पढ़ाई के साथ समझौता नहीं किया।

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गांव के स्कूल से दिल्ली के हंसराज कॉलेज तक

राजू मोदनवाल की सफलता की नींव उनके गांव में ही पड़ी थी। उनकी शुरुआती शिक्षा चंदवक के श्री कुबेर सिंह माध्यमिक विद्यालय से हुई, जिसके बाद उन्होंने सुमित्रा शिक्षा इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने जौनपुर के ही श्री गणेश राय पीजी कॉलेज में बीएससी में दाखिला लिया। इसके बाद वह बेहतर तैयारी के लिए दिल्ली चले गए, जहां हंसराज कॉलेज से पढ़ाई करते हुए उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी को धार दी।

दो बार की असफलता भी नहीं डिगा सकी हौसला

राजू के लिए यह सफर कांटों भरा रहा। उन्होंने दो बार यूपीएससी (UPSC) की मेन परीक्षा पास की और साक्षात्कार (Interview) तक पहुंचे, लेकिन अंतिम सूची में जगह बनाने से चूक गए। लगातार दो बार मिली इस बड़ी असफलता के बावजूद राजू टूटे नहीं। उन्होंने अपनी कमजोरियों को पहचाना, उन पर काम किया और आखिरकार UP PCS 2024 में 11वीं रैंक के साथ अपनी काबिलियत साबित कर दी।

युवाओं के लिए मिसाल बनी राजू की कहानी

आज राजू जौनपुर के युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं। उनके परिवार के अनुसार, राजू घंटों एकाग्रता के साथ पढ़ाई में लीन रहते थे। उनका एकमात्र लक्ष्य सिविल सेवा में जाकर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा करना था। राजू की यह कहानी साबित करती है कि यदि इरादे फौलादी हों, तो संसाधनों की कमी कभी भी सपनों की उड़ान में बाधा नहीं बन सकती।

With AI Inputs

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