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प्रियंका का मास्टर स्ट्रोक क्या बढ़ाएगा BJP का सिरदर्द, जानिए कांग्रेस ने क्यों खेला 40 फीसदी टिकट का दांव

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लखनऊ, 20 अक्टूबर: कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और यूपी कांग्रेस की प्रभारी प्रिंयका गांधी ने चुनाव से पहले ही अब अपना मास्टर स्ट्रोक खेल दिया है। प्रियंका ने बीजेपी के उन साइलेंट वोटरों पर चोट करने की कोशिश की है जो हमेशा बीजेपी के लिए वोट करता रहा है। पीएम मोदी भी हमेशा अपने भाषणों में दावा करते हैं कि बीजेपी ने अपने साइलेंट वोटरों की एक फौज खड़ी रखी है जो हर चुनाव में बीजेपी को वोट करता है और वो हैं करोड़ों महिलाएं। मोदी की इस चाल का ही जवाब देने के लिए कांग्रेस ने महिलाओं तक पहुंचने के लिए विधानसभा चुनाव में चालीस फीसदी महिलाओं को टिकट देने का ऐलान किया है। क्या कांग्रेस के इस मास्टरस्ट्रोक से बीजेपी की मुश्किलें बढ़ेंगी ये तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन फिलहाल विरोधियों के पास प्रियंका के इस ट्रंप कार्ड का कोई जवाब नहीं है।

जातीय समीकरण को भी काउंटर करने की कोशिश

जातीय समीकरण को भी काउंटर करने की कोशिश

पिछले 2017 के विधानसभा चुनाव में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस ने इस बार यूपी में प्रियंका गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। प्रियंका के भरोसे यूपी में खुद को मजबूत करने के प्रयास में जुटी कांग्रेस यूपी की राजनीति में अपना मास्टर कार्ड चला दिया है। प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने यूपी में नया नारा दिया है। कांग्रेस का नारा है 'मैं लड़की से लड़ सकता हूं', यानी कांग्रेस ने यूपी में जाति की राजनीति के सामने लैंगिक राजनीति को रखने की कोशिश की है।

प्रियंका का दावा- मेरा बस चलता तो 50 फीसदी टिकट देती

प्रियंका का दावा- मेरा बस चलता तो 50 फीसदी टिकट देती

कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में महिलाओं को 40 फीसदी टिकट देने का ऐलान किया है. प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर मेरी बस चलती तो मैं महिलाओं को 50 फीसदी टिकट देती। महिलाओं को 40 फीसदी टिकट, इसे यूपी में प्रियंका गांधी का मास्टर कार्ड कहा जा रहा है। इस कार्ड के जरिए प्रियंका गांधी ने यूपी की राजनीति में जेंडर को जाति के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश की है।

कांग्रेस में महिलाओं के अपमान के अलावा कुछ नहीं- रीता जोशी

कांग्रेस में महिलाओं के अपमान के अलावा कुछ नहीं- रीता जोशी

कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान में प्रयागराज से बीजेपी की सांसद रीता बहुगुणा जोशी कहती हैं कि, '' कांग्रेस में महिलाओं को अपमान के सिवाय कुछ नहीं मिलता है। वर्षों कांग्रेस की सेवा करने के बाद मेरे साथ क्या हुआ सबको पता है। कांग्रेस को यदि इतनी ही महिलाओं की चिंता है तो उसने पिछले चुनाव में रायबरेली और अमेठी से महिला उम्मीदवारों को टिकट क्यों नहीं दिया। महाराष्ट्र और राजस्थान में कांग्रेस के भीतर महिलाओं की क्या हालत है यह किसी से छुपा नहीं है। महिलाओं को चालीस फीसदी टिकट देने का वादा सिर्फ चुनावी प्रोपेगेंडा के अलावा कुछ नहीं है। मैने 18 साल तक सेवा की लेकिन मेरे साथ क्या हुआ। मुझे अपमानित किया गया।''

पिछला यूपी विधानसभा चुनाव 42 महिलाएं जीतीं

पिछला यूपी विधानसभा चुनाव 42 महिलाएं जीतीं

वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2017 के चुनाव में यूपी में अब तक सबसे ज्यादा महिला विधायक चुनी गई हैं. 2017 में बीजेपी की 34 महिला विधायक, कांग्रेस की 2, बसपा की 2 और समाजवादी पार्टी की 1 महिला विधायक विधानसभा में पहुंचीं. यूपी में कुल 482 महिलाओं ने चुनाव लड़ा। इनमें से 42 ने चुनाव जीता था। बीजेपी ने 43 महिलाओं को टिकट दिया था और 34 महिलाओं ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीता था।

महिला वोटरों की ताकत को प्रियंका ने पहचाना

महिला वोटरों की ताकत को प्रियंका ने पहचाना

आपके लिए यह जानना जरूरी है कि जेंडर हम इसे कास्ट की तुलना में प्रियंका का मास्टर कार्ड क्यों कह रहे हैं। दरअसल, पिछले कुछ सालों में राजनीति में महिला वोटरों ने अपनी ताकत से कई लोकप्रिय मान्यताओं को धराशायी किया है। इस साल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पुरुष मतदाताओं ने 81.41 फीसदी जबकि महिला मतदाताओं ने 81.75 फीसदी मतदान किया। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने बंगाल की बेटी की तरह भावुक कर देने वाला नारा दिया। ऐसे में 49 फीसदी महिला मतदाताओं में से ज्यादातर ने टीएमसी को एकमुश्त वोट दिया और ममता राज्य में तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं।

पिछले यूपी विधानसभा चुनाव में 63.31 फीसदी महिलाओं ने मतदान किया

पिछले यूपी विधानसभा चुनाव में 63.31 फीसदी महिलाओं ने मतदान किया

बिहार में 2020 में हुए विधानसभा चुनाव में पुरुष मतदाताओं ने 54.45 प्रतिशत मतदान किया, जबकि महिला मतदाताओं ने 59.69 प्रतिशत मतदान किया। इधर, मूक शक्ति के रूप में देखी जाने वाली महिला मतदाताओं ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले गठबंधन को जमकर वोट दिया और नतीजा यह हुआ कि राज्य में फिर से जदयू-भाजपा की सरकार बन गई। उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनावों में, पुरुष मतदाताओं ने 59.15 प्रतिशत मतदान किया, जबकि महिला मतदाताओं ने 63.31 प्रतिशत मतदान किया।

कानून व्यवस्था के मुद्दे पर महिलाओं ने किया था बीजेपी का समर्थन

कानून व्यवस्था के मुद्दे पर महिलाओं ने किया था बीजेपी का समर्थन

दरअसल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में यूपी में कानून-व्यवस्था का मुद्दा बहुत अहम था, इसलिए महिलाओं ने उस वक्त बीजेपी को खुलकर वोट दिया था. नतीजा ये रहा कि यूपी में बीजेपी को बड़ी जीत मिली. इन तीनों विधानसभा चुनावों में ही नहीं बल्कि लोकसभा चुनाव 2019 में भी महिलाओं ने चुनाव परिणाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाई। इसलिए उत्तर प्रदेश में प्रियंका को आगे ले जाकर खुद को मजबूत करने की कोशिश में जुटी कांग्रेस ने अब उत्तर प्रदेश में लिंग को जाति के आगे रखने की कोशिश की है।

सपा ने किया इस पहल का स्वागत

सपा ने किया इस पहल का स्वागत

सपा की प्रवक्ता जूही सिंह कहती हैं कि, '' देखिए महिलाओं को टिकट देना अच्छी बात है। यह बात पार्टी पहले से कहती रही है। पार्टी ने अपने संगठन में भी महिलाओं को हमेशा बढ़ाने की कोशिश की है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी महिलाओं को टिकट दिए गए थे। सपा ने कई महिलाओं को राज्यसभा भेजने का भी काम किया लेकिन क्या कांग्रेस का ये वादा धरातल पर उतर पाएगा यह देखने वाली बात होगी। कांग्रेस ने बदलाव की शुरूआत की है तो यह महिलाओं के लिए एक अच्छा संकेत है।''

यह भी पढ़ें-क्‍या प्रियंका गांधी का महिला कार्ड उत्‍तर प्रदेश में कांग्रेस को मजबूती देगा?यह भी पढ़ें-क्‍या प्रियंका गांधी का महिला कार्ड उत्‍तर प्रदेश में कांग्रेस को मजबूती देगा?

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English summary
Priyanka's master stroke will increase BJP's headache, know why Congress played 40 percent women's reservation in UP elections
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