भरी गर्मी में यूपी के इस जिले में यूं आ गई भयंकर बाढ़! प्रशासन ने किया ऐसे इंतजाम

फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के इस जिले में बारिश के दौरान बाढ़ आने का खतरा काफी होता है। हर साल आने वाली इस बाढ़ और इसकी वजह से होने वाले कटान को रोकने के लिए प्रशासन सिर्फ खाना पूर्ति करता है। लेकिन इस बार बाढ़ आने के पहले ही जिला प्रशासन ने हरकत में आ गया है। जिला प्रशासन ने बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए अधिकारियों के साथ इसकी रिहर्सल शुरू कर दी है।

बाढ़ से निपटने के लिए कराया रिहर्सल

बाढ़ से निपटने के लिए कराया रिहर्सल

जिलाधिकारी मोनिका रानी और एसपी अतुल शर्मा ने बाढ़ से निपटने के लिए अधिकारीयों को रिहर्सल कराया। वहीं आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए। डीएम-एसपी तहसील क्षेत्र के ग्राम तीसराम की मढैया पंहुचे। यहां उन्होंने सभी अधिकरियों को बाढ़ से निपटने का अभ्यास कराया। जिलाधिकारी से ग्रामीणों ने आवास न होने की शिकायत की, जिस पर उन्होंने अधिकारियों को जांच कर पात्रों को आवास उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। रामबेटी पत्नी मनोहर ने विधवा पेंशन और शांति देवी ने अनाज न मिलने की शिकायत की। डीएम ने ग्रामीणों को बाढ़ से निपटने के लिए तैयार रहने के लिए लिए कहा। वहीं, डॉक्टर कल्पना चौहान ने दवा वितरण कर डायरिया संबंधित जानकारी ग्रामीणों देकर दवाईयों का वितरण किया।

अभ्यान का मकसद लोगों की जान बचाना

अभ्यान का मकसद लोगों की जान बचाना

एडीएम न्यायिक भानूप्रताप सिंह यादव ने बताया कि यह अभ्यास इसलिए कराया जा रहा है ताकी बाढ़ के समय मकानों में फंसे लोगों को कैसे निकाला जा सकता है, इसका पता लग सके। इसके अलावा इस अभ्यास का मकसद लोगों की जान बचाना भी है। उसके बाद उनको सुरक्षित भेजा जा सके उसके लिए इस ड्रिल का आयोजन किया है।

गांव वालों को किया जागरुक

गांव वालों को किया जागरुक

दूसरी तरफ गांव वालों को जागरूक भी किया गया कि बाढ़ से कैसे निपटा जा सके। वहीं कटान के सवाल पर उन्होंने कहा कि जिला प्रसाशन के पास जितना भी पैसा मिला है, उससे बल्लियों के सहारे ही कटान रोकने का प्रयास किया जायेगा। पत्थर डलवाये जाने की मांग वर्षो से पांचाल घाट स्थित दुर्वाषा ऋषि आश्रम के आगे तक पत्थरों का बांध बनाया गया था। 1972 में लेकिन वर्तमान में गंगा के कटान से उसके आगे की खेती लगातार गंगा में कट रही है। अगर जिला प्रसाशन ने इस कटान की तरफ ध्यान नहीं दिया, तो गंगा की धार सीधी इटावा बरेली हाइवे को काट सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर गंगा का पानी हाइवे से सीधा टकराया, तो बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।

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