हिंदुत्व और राम मंदिर से ज्यादा इस वजह से मिली यूपी में BJP को प्रचंड जीत, सर्वे में हुआ खुलासा

लखनऊ, 14 मार्च। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर से पूर्ण बहुमत हासिल किया है। भारतीय जनता पार्टी की इस जीत में केंद्र में भाजपा सरकार की भूमिका काफी अहम है। यूपी के मतदाताओं की शीर्ष प्राथमिकताओं की बात करें तो राम मंदिर, हिंदुत्व जैसे मुद्दों ने भाजपा की जीत में खास योगदान नहीं दिया बल्कि केंद्र में मोदी सरकार के प्रति लोगों के विश्वास ने योगी सरकार की प्रचंड बहुमत से वापसी का रास्ता खोला। चुनाव के बाद जो सर्वे सामने आया है वह इस बात की ओर इशारा करता है कि केंद्र में मोदी सरकार के प्रति लोगों का भरोसा अभी भी बरकरार है जिसका फायदा यूपी में भाजपा को मिला।

सर्वे में सामने आए दिलचस्प आंकड़े

सर्वे में सामने आए दिलचस्प आंकड़े

चुनाव बाद लोकनीति-सीएसडीएस के सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि जिन नए लोगों को किसान सम्मान निधि, उज्जवला योजना, पीएम आवास योजना और मुफ्त राशन मिला है उसका पार्टी को सबसे अधिक फायदा हुआ है। इन योजनाओं का लाभ उन तमाम लाभार्थियों को मिला है फिर चाहे वह किसी भी जाति या धर्म के हो। इस सर्वे में एक और अहम आंकड़ा जो सामने आया है वउसके अनुसार भाजपा को किसानों, ब्राह्मणों का वोट मिला,इसके साथ ही शेड्यूल कास्ट के वोटर्स का भी पार्टी को साध मिला। मायावती के कोर वोट बैंक जाटव में भी भाजपा ने सेंधमारी की है।

लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी का इतिहास

लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी का इतिहास

भाजपा गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में तकरीबन तीन दशक के बाद इतिहास दर्ज करते हुए लगातार दो बार पूर्ण बहुमत हासिल करने का कारनामा करके दिखाया है, योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद लगातार दूसरी बार संभालेंगे। सर्व को लेकर लोकनीति के को-डायरेक्टर संजय कुमार ने बताया कि यह काफी बड़ा सर्वे है और इसमे सभी अहम बातों को सटीकता से रखा गया है।

राम मंदिर नहीं रहा मुद्दा

राम मंदिर नहीं रहा मुद्दा

सर्वे में हिस्सा लेने वाले 38 फीसदी लोगों का कहना है कि विकास उनके लिए सबसे बड़ा मुद्दा रहा, 12 फीसदी लोगों ने कहा कि वो सरकार को बदलने के लिए अपना वोट डालने के लिए गए थे। जबकि 10 फीसदी लोगों ने सरकार के कामकाज को लेकर अपना वोट दिया। चौंकाने वाली बात इस सर्वे में यह थी कि लोगों के लिए हिंदुत्व और राम मंदिर मुद्दा नीहं था। सिर्फ 2 फीसदी लोगों ने ही इस मुद्दे के पक्ष में अपना वोट दिया। खैर चुनाव प्रचार के दौरान भी राम मंदिर मुद्दे पर ना तो भाजपा ने और ना ही विपक्ष ने कुछ खास बयानबाजी की और ना ही रैलियों में इस मुद्दे को उठाया।

सरकार के काम से लोगों में संतुष्टी बढ़ी

सरकार के काम से लोगों में संतुष्टी बढ़ी

यूपी सरकार के कामकाज को लेकर लोगों में विश्वास बढ़ा है। सरकार के कामकाज से संतुष्ट लोगों की संख्या में 7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यूपी के पांच में से चार घरों को मुफ्त राशन योजना का फायदा मिला है। पांच में से तीन परिवारों को पीडीएस स्कीम का फायदा मिला है। इसके अलावा कई परिवार जिनके मुखिया भाजपा के खिलाफ थे उनके परिवार की महिलाओं ने भाजपा को अपना वोट दिया

सरकार की योजनाओं ने बदला खेल

सरकार की योजनाओं ने बदला खेल

अपनी रैलियों में पीएम मोदी और योगी आदित्यनाथ कभी भी पक्के मकानों के लाभार्थियों की संख्या का जिक्र करने से नहीं चूकते थे, वह अपनी रैलियों में पक्के मकान के लाभार्थियों, मुफ्त राशन पाने वालों की संख्या के लाभार्थियों का जिक्र जरूर करते थे। सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि ब्राह्मण भाजपा से नाराज नहीं थे। जैसा कि विपक्ष दावा कर रहा था कि ब्राह्मण भाजपा से नाराज हैं, ओबीसी वोट सपा के समर्थन में जाएगा, जिस तरह से स्वामी प्रसाद मौर्या, दारा सिंह चौहान, धर्म सिंह सैनी सपा में शामिल हुए थे उसके बाद विपक्ष को उम्मीद थी कि ओबीसी वोटर्स उसके पक्ष में आएगा लेकिन ऐसा होता नहीं दिखा।

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     जातीय समीकरण के टूटे मिथक

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    सर्वे के अनुसार भाजपा को 89 फीसदी ब्राह्मणों का वोट मिला, जोकि 2017 की तुलना में 6 फीसदी अधिक है। वहीं सपा के पक्ष में ब्राह्मण वोटरों की संख्या में एक फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं मायावती का दलित-ब्राह्मण फॉर्मूला पूरी तरह से फेल हो गया, पार्टी को इस बार दोनों का ही समर्थन नहीं मिला। वहीं एससी वोटर्स का भी इस बार भाजपा को समर्थन मिला है। मायावती का जाटव वोट भी भाजपा के साथ जुड़ा 2017 में यह 8 फीसदी भाजपा के पक्ष में था जोकि बढ़कर इस बार 21 फीसदी हो गया। वहीं मायावती का जाटव वोट बैंक 87 फीसदी से घटकर 65 फीसदी हो गया। गैर जाटव और एससी वोटर्स की बात करें तो भाजपा को इस बार पिछले चुनाव की तुलना में 32 फीसदी की बजाय 41 फीसदी वोटर्स का समर्थन मिला।

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