पॉल्युशन बढ़ने से दिन-दर-दिन जहरीली हुई कानपुर की हवा, बन गया देश में सबसे प्रदूषित शहर

कानपुर। यूपी में 'औद्योगिक नगरी' के रूप में जाना जाने वाला कानपुर प्रदूषण की चपेट में है। इन दिनों यहां हवा में हानिकारक तत्वों का घनत्व इतना ज्यादा बढ़ गया है कि सांस लेना भी मुश्किल हो चला है। कई स्थानों पर कूड़े का निस्तारण नहीं किया जा रहा। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी कुलदीप मिश्रा के मुताबिक, यूपी के इस नगर में मानक से डेढ़ गुना ज्यादा प्रदूषण है। ज्यादा कहें तो ये कि अब कानपुर देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। पर्टिकुलर मैटर की मात्रा मानक से 6 गुना ज्यादा बढ़कर हानिकारक स्तर पर पहुंच गयी है।

कानपुर प्रदूषण की चपेट में | Kanpur Air Quality

वायु गुणवत्ता सूचकांक चौंकाने वाले
ताजा पैमाने को देखें तो वायु गुणवत्ता सूचकांक चौंकाने वाले हैं। ठण्ड की वजह से हानिकारक गैसों का घनत्व वायुमंडल के सबसे निचली परत पर रहता है, तापमान घटने से यह स्तर और भी अधिक बढ़ सकता है| दशहरे के बाद से हवा और जहरीली हो गयी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर यही हालात रहे तो दीपावली के बाद हालात और ज्यादा खराब हो सकते हैं।

कूड़े-करकट की भरमार
शहर में स्कूल जाने वाले जिन रास्तों से गुजरते हैं, उन्हें मास्क लगाना पड़ता है। फैक्ट्रियों के धुएं और सड़क पर फैले कचरे की वजह आबोहवा गंदी हो रही है। धुएं की मात्रा इस कदर बढ़ रही है की सांस लेना दूभर होता जा रहा है। एक स्कूल में टीचर से जब मास्क पहनकर आने की बात पूछी गयी तो उनका जवाब था कि वायु प्रदूषण फ़ैल रहा है जिसकी वजह से सबको नुकसान पहुंच रहा है। बच्चों के परिजनों को बताया गया है कि अपने बच्चो को मास्क दें जिसकी वजह से बच्चे बीमारियों से बचें| बच्चो का कहना है कि जिस तरह से दशहरे में पठाखे फोड़े गए उससे प्रदूषण बढ़ा जिसकी वजह से आँखों में जलन और साँस लेने में काफी दिक्कत हो रही है|

निस्तारण करने के बजाए आग लगा देते हैं
नगर निगम आयुक्त संतोष कुमार शर्मा कहते हैं कि नियम तो ये है कि शहर में कूड़े को जलाने के बजाय उसका निस्तारण किया जाय। ये जिम्मेदारी बाकायदा कानपुर नगर निगम के पास है। मगर हर जगह तो ऐसा नहीं हो सकता। य​दि कर्मचारी कूड़े का निस्तारण करने के बजाय उसमें आग लगा देते हैं तो वायु मंडल सबसे ज्यादा प्रदूषित हो रहा है। टीम गठित कर कार्यवाही की जायेगी। पालीथीन का यूज रोकेंगे, क्योंकि इसे जलाने से सबसे ज्यादा प्रदूषण होता है।

पाउच जलाना बदस्तूर जारी
साउथ सिटी में कई ऐसी जगहें हैं जंहा पर रात के समय मसाले के पाउच जलाये जा रहे हैं जिसकी वजह से वंहा की क्षेत्रीय जनता ने कई बार विरोध प्रदर्शन किया। लेकिन उसके बाद भी पाउच जलाना बदस्तूर जारी है| इस सम्बन्ध में जब नगर निगम के आयुक्त से बात की गयी तो उनका जवाब था कि इसको संज्ञान में लिया गया है।

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