यूपी: सीओ को पीटता देख भाग गए बाकी पुलिसवाले, गांव वालों ने घेर कर मारा
लखनऊ। वो कहते हैं न कि जब मुश्किल आती है तो अपने भी साथ छोड़ देते हैं, और फिर ये तो उत्तर प्रदेश का पुलिस विभाग है। कुछ दिन पहले अंबेडकर नगर में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने पुलिस विभाग को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया। मामला कुछ ऐसा था कि एक व्यवसायी की हत्या के बाद गुसाए परिजनों को धरने से हटाने पहुंची पुलिस पर पथराव होने लगा। इस पथराव में पूरी पुलिस टीम एक सीओ को छोड़ कर वहां से भाग खड़ी हुई। लोगों ने सीओ को अकेला देख बुरी तरह से उनकी पिटाई की जिसकी वजह से उनका सिर तक फट गया।

सीओ को भीड़ ने घेर कर पीटा
यह पूरा मामला तीन जुलाई का है। राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र के पदुमपुर बाजार में बीते सोमवार की रात व्यावसायी राकेश की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जिसके विरोध में मंगलवार को लोगों ने रास्ता जाम कर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। जब पुलिस ने पहुंच कर जाम खुलवाना चाहा तो भीड़ भी उत्तेजित हो गई और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इसी दौरान भीड़ ने सीओ के के मिश्रा को घेर लिया और उन पर लाठी डंडो से हमला बोल दिया। एक सीओ को घिरता देख जिस पुलिस को उन्हें बचाने के लिए आगे आना चाहिए था वही घटना स्थल से भाग खड़ी हुई।

साथ में आई पुलिस टीम भाग खड़ी हुई
सोशल मीडिया पर वायरल इन फोटोज को देख कर ये सवाल साफ़-साफ़ खड़ा होता है कि सीओ भीड़ में अकेले कैसे? उनके साथ लगे पुलिस वाले गए कहां? हालांकि पुलिस संघर्ष में लापरवाही मानते हुए एक थानाध्यक्ष समेत चार पुलिस कर्मियों के खिलाफ पुलिस अधीक्षक ने कार्रवाई की है। पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्र ने थानाध्यक्ष जहांगीर गंज समेत तीन पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है। पर सवाल तो वही है न कि किसी भी पुलिस ट्रेनिंग में सबसे पहले एकता सिखाई जाती है और पुलिसकर्मी ही इस एकता का खंडन करके निकल लेते हैं।

पहले भी सामने आई है ऐसी घटना
इस घटना ने प्रतापगढ़ में सीओ जियाउल हक हत्याकांड की याद दिला दी, जिसमे भीड़ ने सीओ जियाउलहक की हत्या कर दी थी और वहां भी उनके सुरक्षा कर्मी उन्हें छोड़कर फरार हो गए थे। वहीं दूसरे मामले में पुलिस की लापरवाही से मथुरा के जवाहर बाग कांड में भी एस पी मुकुल द्विवेदी और एस ओ संतोष यादव की जान जा चुकी है।












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