'क्योटो नहीं बना सके तो कुकुर मुक्त ही कर दीजिए', PM Modi के Varanasi दौरे से पहले CM योगी पर अखिलेश का तंज

Akhilesh Yadav Target PM Modi Varanasi Visit: वाराणसी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है, इन दिनों राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है। मंगलवार से शुरू हो रहे पीएम मोदी के दो दिवसीय दौरे से ठीक पहले समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सर सुंदरलाल अस्पताल (SSH-BHU) में आवारा कुत्तों की तस्वीरें और वीडियो शेयर कर योगी आदित्यनाथ सरकार (CM Yogi Adityanath) पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर आप वाराणसी को क्योटो में नहीं बदल सकते, तो कम से कम इसे कुत्तों से मुक्त तो बनाइए।

यह बयान न केवल स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था की दयनीय स्थिति को उजागर करता है, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच तथाकथित 'डबल इंजन' की साझेदारी पर भी सवाल खड़े करता है। यह घटना महज एक स्थानीय मुद्दा नहीं है। यह उत्तर प्रदेश की राजनीति, वाराणसी के विकास के वादों और विपक्ष की रणनीति का गहरा विश्लेषण खोलती है। आइए इस मुद्दे को विस्तार से समझते हैं, राजनीतिक मायनों के साथ...

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BHU अस्पताल में कुत्तों की समस्या: स्वास्थ्य व्यवस्था का आईना

सर सुंदरलाल अस्पताल बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) का प्रमुख चिकित्सा केंद्र है। यहां रोज सैकड़ों मरीज आते हैं। गरीब, मध्यम वर्ग और गंभीर बीमारियां लेकर। अखिलेश यादव ने जो तस्वीरें शेयर कीं, उनमें कुत्ते अस्पताल के गलियारों, ओपीडी, यहां तक कि ICU के पास घूमते दिख रहे हैं। सुरक्षा गार्ड मौजूद होने के बावजूद यह स्थिति बनी हुई है।

यह समस्या नई नहीं। वाराणसी जैसे पवित्र शहर में आवारा कुत्तों का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। कुत्ते काटने की घटनाएं बढ़ रही हैं, रेबीज का खतरा बना रहता है और अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर यह स्वच्छता और सुरक्षा दोनों को चुनौती देता है। अखिलेश यादव ने इसे योगी सरकार की नाकामी के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि अगर 'डबल इंजन' वाली सरकार (केंद्र की भाजपा और राज्य की भाजपा सरकार) वाकई विकास चाहती है, तो बुनियादी समस्याएं क्यों नहीं सुलझ पातीं?

क्योटो समझौता: 2014 का वादा और 2026 की हकीकत

अखिलेश यादव का 'क्योटो' वाला तंज सीधे 2014 के उस समझौते की ओर इशारा करता है, जो प्रधानमंत्री मोदी के जापान दौरे के दौरान हुआ था। तब मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने वाराणसी-क्योटो पार्टनर सिटी एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए। मकसद था कि विरासत संरक्षण, शहर का आधुनिकीकरण, कला-संस्कृति, शिक्षा और स्वच्छता में जापानी विशेषज्ञता का इस्तेमाल।

समझौते में BHU और क्योटो यूनिवर्सिटी के बीच सहयोग, जल प्रबंधन, सीवरेज, कचरा प्रबंधन और शहरी परिवहन पर फोकस था। 11 सदस्यीय समिति भी बनी। लेकिन 12 साल बाद भी वाराणसी 'क्योटो जैसा' नहीं बन पाया। आलोचक कहते हैं कि विरासत संरक्षण के नाम पर कई परियोजनाएं लंबित हैं, जबकि बुनियादी सुविधाएं जैसे अस्पतालों की सफाई अभी भी चुनौती बनी हुई है। अखिलेश यादव ने इसी विडंबना को उजागर किया - अगर क्योटो मॉडल काम करता, तो अस्पताल में कुत्ते क्यों घूमते?

'Double Engine' पर सवाल: टकराव या दोहरी चाल?

अखिलेश यादव ने भाजपा के 'डबल इंजन' नारे को भी घेरा। यह नारा 2017 से UP में भाजपा की चुनावी रणनीति का हिस्सा रहा। केंद्र और राज्य सरकार की साझेदारी से तेज विकास को लेकर इसे बुलंद किया गया। लेकिन सपा प्रमुख ने पूछा कि क्या डबल इंजन के भीतर टकराव चल रहा है?

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को परोक्ष संदेश दिया कि UP के मुख्यमंत्री से बात कीजिए, स्वास्थ्य मंत्री का हाल-चाल पूछिए। उनकी दयनीय स्थिति को ठीक करने के लिए मेडिकल चेक-अप और इलाज का इंतजाम करवाइए। उन्हें हमेशा के लिए आराम करने घर भेज दीजिए।

यह तंज उपराष्ट्रपति पद की शैली में है, लेकिन असल मकसद स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी वाले मंत्री (वर्तमान में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक) पर सवाल उठाना था। अखिलेश ने आगे कहा कि शायद यह 'डबल इंजन की दोहरी चाल' है, जिसका मकसद मोदी की साख को नुकसान पहुंचाना हो। यह बयान राजनीतिक रूप से सधी हुई चाल है। मोदी के दौरे से पहले विपक्षी हमला करके सपा यह संदेश देना चाहती है कि स्थानीय मुद्दों पर सरकार असफल है। वाराणसी में पिछले लोकसभा चुनाव में भी विकास बनाम स्थानीय समस्याओं का मुद्दा उठा था।

वाराणसी का विकास: उपलब्धियां और चुनौतियां क्या?

प्रधानमंत्री मोदी 2014 से वाराणसी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस दौरान कई परियोजनाएं आईं - घाटों का सौंदर्यीकरण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, गंगा सफाई (नमामि गंगे), स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और एयरपोर्ट विस्तार। लेकिन आलोचक कहते हैं कि अस्पताल, सड़कें और स्वच्छता जैसे बुनियादी मुद्दे अभी भी लंबित हैं।

BHU अस्पताल केंद्र-राज्य के साझा दायित्व का उदाहरण है। BHU केंद्रीय विश्वविद्यालय है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं राज्य सरकार की जिम्मेदारी में आती हैं। कुत्तों की समस्या यहां की प्रबंधन व्यवस्था की कमी को दर्शाती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सड़क कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप ABC (Animal Birth Control) कार्यक्रम चलाया है। 2025 में शहरी विकास विभाग ने नए गाइडलाइंस जारी किए- स्टेरलाइजेशन, फीडिंग जोन और लोकल कमेटी। लेकिन अमल पर सवाल उठते रहते हैं। वाराणसी जैसे घनी आबादी वाले शहर में यह चुनौती और बड़ी है।

2027 चुनावों की झलक?

यह हमला 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी का संकेत लगता है। सपा पहले से ही योगी सरकार पर महंगाई, बेरोजगारी और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर हमलावर रही है। अखिलेश यादव की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जो युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाती है।

दूसरी ओर, भाजपा इसे विपक्ष की 'नकारात्मक राजनीति' बता सकती है। मोदी का दौरा विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और जनसंवाद पर केंद्रित होगा। अगर सरकार इस मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई करती है, जैसे अस्पताल में कुत्तों की सफाई अभियान, तो विपक्ष का हमला बैकफायर भी हो सकता है।

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