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यूपी: इस मंदिर के निर्माण का इतिहास है अद्भुत, आखिर क्यों खुदाई करते वक्त बहने लगी थी खून की धार?

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बलरामपुर। यूपी के जनपद बलरामपुर में एक ऐसा मंदिर है जो हजारों साल पुराना है। तुलसीपुर क्षेत्र में स्थापित इस मंदिर का इतिहास अपने आप में बेहद अनोखा है। इस मंदिर में हजारों साल पुरानी नौ देवियों की प्रतिमा के साथ आदिशक्ति विराजमान हैं। शारदीय नवरात्रि में दूर-दराज से श्रद्धालु मां के दर्शन व पूजन कर परिवार के सुख समृद्धि की कामना करने के लिए आते हैं। नौ देवी की प्रतिमा इस मंदिर में वर्षों पुरानी है। मंदिर के निर्माण के बारे में बताया जाता है कि इसका निर्माण कई कालखंडों में हुआ है। इसे नेपाल नरेश तथा सम्राट विक्रमादित्य ने अपने समय में बनवाया था। वर्तमान में मंदिर की हालत बहुत ही खराब हो चुकी है।

यूपी: इस मंदिर के निर्माण का इतिहास है अद्भुत, आखिर क्यों खुदाई करते वक्त बहने लगी थी खून की धार?

मन्दिर निर्माण के पीछे अलग-अलग मान्यता है। बताया जाता है कि हजारों वर्ष पूर्व इस स्थान पर मजलिस नाथ नाम के साधु आश्रम बना कर रहते थे। एक रात उन्हें सपना आया कि यहां कुआं बनाएं। सुबह होते ही सपने की बात भूल कर साधु अपने नित्य कार्य में लग गए। दूसरी रात उन्हें पुनः सपना आया जिसमें कुआं बनाने की बात सामने आई। अगली सुबह अपने सहयोगियों के साथ चर्चा कर साधु ने गांव वालों की मदद से कुएं की खुदाई का काम शुरू करा दिया। जैसे ही कुआ कुछ गहरा हुआ वहां से रक्त की धार बहने लगी। यह नजारा देख सभी लोग अचंभित हो गए। खुदाई स्थल की अच्छी तरह से मिट्टी हटाने पर काले पत्थर में नौ देवियों की प्रतिमा मिली। प्रतिमा खंडित थी तथा उसमे से खून बह रहा था। मौजूद ग्रामीणों ने आस-पास के विद्वानों से राय-मशवरा कर वहीं पर प्रतिमा स्थापित कर मंदिर बनवा दिया।

यूपी: इस मंदिर के निर्माण का इतिहास है अद्भुत, आखिर क्यों खुदाई करते वक्त बहने लगी थी खून की धार?

आज वर्तमान में भी गहरे स्थान पर स्वयंभू प्रतिमा स्थापित है। खुदाई में निकली शिला (देवी प्रतिमा के कान के भाग ) से हल्का जल का रिसाव होता रहता है। मंदिर के महंत गोपाल नाथ योगी बताते हैं कि, मई-जून माह में जल का रिसाव बढ़ जाता है। महंत का दावा है कि जिस वर्ष जल का रिसाव ज्यादा होता है उस वर्ष बरसात खूब होती है। अलग-अलग समय पर मंदिर का जीर्णोद्धार तत्कालीन राजाओं के द्वारा हुआ है। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर निर्माण वर्ष 1244 अंकित है। नवरात्रि में दूरदराज से श्रद्धालु यहां पहुंच मां आदिशक्ति के नवोरूप का दर्शन पूजन करते हैं।

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English summary
people digging a weel then he saw nine sisters of durga in balrampur
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