कांवड़ रूट पर नेम प्लेटों का विपक्ष ने कुछ यूं किया विरोध, सहयोगी दलों ने भी नहीं दिया साथ

Kanwar Yatra route: कांवड़ यात्रा के रूट पर खाने-पीने और फल की दुकानें लगाने वालों को मुजफ्फनगर पुलिस ने अपना-अपना नाम लिखकर टांगने का आदेश दिया। जिसपर योगी सरकार ने भी अपनी मुहर लगाते हुए आदेश भी जारी कर दिया है। सरकार के इस आदेश पर विपक्ष के साथ-साथ बीजेपी नेता और तीनों सहयोगी दल जेडीयू, एलजेपी और आरएलडी ने भी विरोध जताया है।

कांवड़ रूट पर दुकानदारों द्वारा नाम लिखने के आदेश का विरोध जताते हुए जेडीयू के महासचिव केसी त्यागी ने कहा, 'यूपी से बड़ी कांवड़ यात्रा बिहार में निकलती है, लेकिन वहां ऐसे कोई आदेश नहीं है। पीएम मोदी कहते हैं सबका साथ सबका विकास, तो ये सभी को मानना चाहिए।'

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वहीं,केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने कहा, वह पुलिस की सलाह या ऐसी किसी भी चीज का समर्थन नहीं करते हैं जो, जाति या धर्म के नाम पर विभाजन पैदा करती हो।' आरजेडी महासचिव त्रिलोक त्यागी ने कहा, 'राजनीति में धर्म जाति नहीं होनी चाहिए। ये उचित नहीं है कि दुकानों के बाहर नाम लिखा जाए।'

पूर्व मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा था कि 'कुछ अति-उत्साही अधिकारियों के आदेश हड़बड़ी में गडबड़ी वाली ..अस्पृश्यता की बीमारी को बढ़ावा दे सकते हैं...आस्था का सम्मान होना ही चाहिए,पर अस्पृश्यता का संरक्षण नहीं होना चाहिए।'

वहीं, अब इस मामले पर विपक्ष का बयान भी सामने आया है। आरजेडी नेता मनोज झा ने कहा, 'यह एक नासमझी भरी कवायद है। क्या वे फलों से पूछेंगे कि उन्हें हिंदू ने उगाया है या मुसलमान ने...क्या वे सब्जियों से पूछेंगे कि उन्हें किसने उगाया है...ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।'

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा, 'हमारा संविधान हर नागरिक को गारंटी देता है कि उसके साथ जाति, धर्म, भाषा या किसी अन्य आधार पर भेदभाव नहीं होगा। उत्तर प्रदेश में ठेलों, खोमचों और दुकानों पर उनके मालिकों के नाम का बोर्ड लगाने का विभाजनकारी आदेश हमारे संविधान, हमारे लोकतंत्र और हमारी साझी विरासत पर हमला है।'

प्रियंका गांधी ने कहा कि समाज में जाति और धर्म के आधार पर विभाजन पैदा करना संविधान के खिलाफ अपराध है। यह आदेश तुरंत वापस लिया जाना चाहिए और जिन अधिकारियों ने इसे जारी किया है, उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, बीएसपी सुप्रीमों मायावती ने कहा, 'पश्चिमी यूपी व मुजफ्फरनगर जिला के कांवड़ यात्रा रूट में पड़ने वाले सभी होटल, ढाबा, ठेला आदि के दुकानदारों को मालिक का पूरा नाम प्रमुखता से प्रदर्शित करने का नया सरकारी आदेश यह गलत परम्परा है जो सौहार्दपूर्ण वातावरण को बिगाड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि जनहित में सरकार इसे तुरन्त वापस ले। इसी प्रकार, यूपी के संभल जिला प्रशासन द्वारा बेसिक सरकारी स्कूलों में शिक्षक व छात्रों को कक्षा में जूते-चप्पल उतार कर जाने का यह अनुचित आदेश भी काफी चर्चा में है। इस मामले में भी सरकार तुरन्त ध्यान दे।'

इस मुद्दे पर अखिलेश यादव ने कहा था कि, '... और जिसका नाम गुड्डू, मुन्ना, छोटू या फत्ते है, उसके नाम से क्या पता चलेगा? माननीय न्यायालय स्वत: संज्ञान ले और ऐसे प्रशासन के पीछे के शासन तक की मंशा की जाँच करवाकर, उचित दंडात्मक कार्रवाई करे। ऐसे आदेश सामाजिक अपराध हैं, जो सौहार्द के शांतिपूर्ण वातावरण को बिगाड़ना चाहते हैं।'

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