CM Yogi का Operation Torch क्या है? घुसपैठियों पर करेगा Surgical Strike, कहां UP में तैयार डिटेंशन सेंटर-LIST
UP Govt Yogi Adityanath Operation Torch: उत्तर प्रदेश में अवैध घुसपैठ के खिलाफ योगी आदित्यनाथ सरकार ने कमर कस ली है। 'शून्य सहनशीलता' की नीति के तहत शुरू हुआ 'ऑपरेशन टॉर्च' अब 'सर्जिकल स्ट्राइक' का रूप ले रहा है। रात के अंधेरे में टॉर्च की रोशनी से झुग्गी-झोपड़ियों और सार्वजनिक स्थानों पर सत्यापन अभियान चल रहा है, जहां बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की तलाश तेज हो गई है।
वाराणसी में 500+ संदिग्ध चिह्नित, मुजफ्फरनगर-सहारनपुर में रातभर चेकिंग, ये अभियान राज्य की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने का दावा कर रहा है। साथ ही, 17 जिलों में 15,000 क्षमता वाले हाई-सिक्योरिटी डिटेंशन सेंटर तैयार हो रहे हैं। लेकिन क्या ये ड्राइव सरकारी योजनाओं के अपात्र लाभार्थियों को रोक पाएगी, या मानवाधिकारों पर सवाल खड़े करेगी? आइए, इस ऑपरेशन के हर पहलू को विस्तार से समझते हैं...

What Is Operation Torch:'ऑपरेशन टॉर्च' क्या है? रात में टॉर्च से 'सर्जिकल स्ट्राइक' का प्लान
'ऑपरेशन टॉर्च' यूपी पुलिस का विशेष सत्यापन अभियान है, जो अवैध घुसपैठियों-खासकर बांग्लादेशी, रोहिंग्या और अन्य विदेशी नागरिकों-की पहचान के लिए चलाया जा रहा है। सीएम योगी के 22 नवंबर 2025 के निर्देश पर शुरू यह ड्राइव 'सर्जिकल स्ट्राइक' की तरह सटीक है:- रात के अंधेरे में टॉर्च की रोशनी से झुग्गी-झोपड़ियां, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, सड़क किनारे बस्तियां और अस्थायी आवासों पर छापेमारी।
- कैसे चल रहा अभियान? पुलिस टीमें घर-घर जाकर आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, निवास प्रमाण और मोबाइल नंबर चेक कर रही हैं। आने की तारीख, रोजगार स्रोत और पूर्व निवास स्थान पर सवाल। अगर दस्तावेज फर्जी या अधूरे, तो 1 हफ्ते का समय दिया जाता है सत्यापन के लिए। कन्फर्म होने पर डिटेंशन सेंटर भेजा जाता है।
- क्यों 'टॉर्च'अभियान? रात्रिकालीन चेकिंग से घुसपैठिए अचानक पकड़े जाते हैं, जो दिन में छिप जाते हैं। मुजफ्फरनगर में सोमवार-मंगलवार रात को शुरू यह ऑपरेशन अब राज्यव्यापी है।
- मकसद: राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव। योगी सरकार का दावा: घुसपैठिए सरकारी योजनाओं (राशन, पेंशन) का अपात्र लाभ ले रहे हैं, जो असली हकदारों से छिन रहा है। वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) के साथ ये ड्राइव जुड़ी है।
वाराणसी पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने कहा, 'हम बंगाल से आए संदिग्धों को टारगेट कर रहे हैं, जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं। 500+ चिह्नित हो चुके हैं। फर्जी पाए जाने पर डिटेंशन सेंटर भेजेंगे।' मेरठ में 6,500 संदिग्ध, सहारनपुर-शामली में 3,000+-अभियान तेज।
Bangladeshi Ghuspaith Network: कॉक्स बाजार से यूपी तक, दलालों का गठजोड़-कैसे हो रही सेंध?
खुफिया एजेंसियों की तफ्तीश में खुलासा: बांग्लादेशी घुसपैठियों का नेटवर्क कॉक्स बाजार, चटगांव से त्रिपुरा-पश्चिम बंगाल बॉर्डर तक फैला है। दलाल ₹10-20 हजार में बॉर्डर क्रॉस करवाते हैं, ₹50 हजार-1 लाख में फर्जी आधार-निवास दस्तावेज बनवाते।
- क्या हैं रूट्स?: त्रिपुरा बॉर्डर, पश्चिम बंगाल के 24 परगना, मालदा, मुर्शिदाबाद, कूच बिहार की टिस्टा नदी, सिलीगुड़ी फुलवारी और धैरोला-सानिया जान। बांग्लादेशी-भारतीय दलालों का सांठगांठ।
- खुलासा कैसे? वजीरगंज पुलिस ने गिरफ्तार हसन शेख (गोपालगंज, बांग्लादेश) से पूछताछ में नेटवर्क का राज खुला। हसन 8 साल पहले पिता मूसा शेख और साथी के साथ बॉर्डर क्रॉस कर कोलकाता पहुंचा। वहां ठगी गैंग बनाया, फिर मुंबई-दिल्ली-लखनऊ। 15 नवंबर को चूड़ी व्यापारी गुल्लू सोनकर से ₹2 लाख की ठगी। उसके साथी उमर शेख (24 परगना) भी जेल में।
- अपराध कनेक्शन: घुसपैठिए ठगी, चोरी और जासूसी में लिप्त। पुलिस रिमांड पर लेगी, मोबिन (साथी) और मूसा की तलाश जारी। DCP विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि 'सभी बिंदुओं की जांच हो रही। गिरोह ध्वस्त करेंगे।' ये नेटवर्क अपराध बढ़ा रहा, जैसे 2025 बिहार चुनावों में फर्जी वोटर पकड़े गए।
UP Detention Centres List: 17 जिलों में 15,000 क्षमता, 3-लेयर सिक्योरिटी-कहां-कहां तैयार?
योगी सरकार ने हर जिले में अस्थायी डिटेंशन सेंटर बनाने का आदेश दिया। कुल 17 प्रमुख जिलों में सेंटर तैयार, क्षमता 15,000। सेंटरों में 3-लेयर सिक्योरिटी (सीएसएफ गार्ड्स), मेडिकल-फूड सुविधा। विदेशी नागरिकता कन्फर्म होने पर डिपोर्टेशन।
| क्रमांक | जिला | सेंटर डिटेल्स |
|---|---|---|
| 1 | लखनऊ | राजधानी में केंद्रीय सेंटर, 1,000+ क्षमता |
| 2 | गाजियाबाद | नंदग्राम में तैयार, 500 क्षमता |
| 3 | बरेली | डिविजनल सेंटर, बड़ौन-पिलीभीत कवर |
| 4 | मेरठ | नया सेंटर, 500 विदेशी रख सकेंगे |
| 5 | गोरखपुर | शाहपुर रेन शेल्टर, 50 बेड (30 पुरुष, 20 महिला) |
| 6 | मथुरा | बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट, सिक्योरिटी हाई |
| 7 | कानपुर | इंडस्ट्रियल एरिया में सेटअप |
| 8 | झांसी | बंडेलखंड रीजनल सेंटर |
| 9 | मुरादाबाद | रोहिल्ला डिविजन, बॉर्डर फोकस |
| 10 | प्रयागराज | संगम शहर में अस्थायी सेंटर |
| 11 | अलीगढ़ | वेस्टर्न यूपी कवर |
| 12 | सहारनपुर | नेपाल बॉर्डर नजदीक, हाई अलर्ट |
| 13 | वाराणसी | काशी जोन, 500+ संदिग्ध कवर |
| 14 | अयोध्या | धार्मिक शहर, सिक्योरिटी टाइट |
| 15 | शाहजहांपुर | बरेली डिविजन, अस्थायी सेटअप |
| 16 | आगरा | ताजनगरी में सेंटर |
| 17 | फिरोजाबाद | डीएम ने लैंड आइडेंटिफाई किया |
ये सेंटर फॉरेनर्स एक्ट 1946 और पासपोर्ट एक्ट के तहत चलेंगे। गोरखपुर में शाहपुर रेन शेल्टर को डिटेंशन में बदला गया।
लाभ और विवाद: सुरक्षा मजबूत, लेकिन मानवाधिकार पर सवाल
सरकार का दावा: अपराध कम, योजनाओं का सही वितरण। लेकिन विपक्ष (कांग्रेस) सवाल उठा रहा:- '8 साल बाद अब एक्शन? गरीबों को टारगेट मत करो।' मानवाधिकार संगठन कहते हैं कि ड्राइव में SOP फॉलो हो, अन्यथा कम्युनिटी टारगेटिंग का खतरा।
ये अभियान SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के साथ जुड़ा, जो 4 दिसंबर तक चलेगा। क्या ये 'सर्जिकल स्ट्राइक' सफल होगी? आपकी राय? कमेंट्स में शेयर करें।
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