Noida Protest: नोएडा हिंसा का 'पाकिस्तानी कनेक्शन'? बाहरी तत्वों ने रची साजिश, 7 पर FIR, 300 उपद्रवी गिरफ्तार

Noida Protests: गौतमबुद्ध नगर में सोमवार को श्रमिकों के आंदोलन के दौरान हुई हिंसक घटनाओं पर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि इस हिंसा और आगजनी के पीछे स्थानीय श्रमिकों के बजाय 'बाहरी तत्वों' का हाथ था। आइए जानतें हैं पुलिस प्रशासन ने इस मामले में क्या अपडेट दिया है।

पुलिस प्रशासन के अनुसार, जब श्रमिक शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन स्थल से हट रहे थे, तभी सीमावर्ती इलाकों से आए कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल खराब करने और हिंसा फैलाने का प्रयास किया। पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने सोमवार रात स्पष्ट किया कि 'बाहरी तत्वों' की पहचान कर ली गई है। उन्होंने बताया कि इस समूह के कुछ सदस्यों को हिरासत में लिया गया है और अन्य उपद्रवियों की तलाश जारी है।

noida worker protests

हिंसा की गंभीरता को देखते हुए पूरे कमिश्नरेट के विभिन्न थानों में अब तक सात मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने बताया कि सोमवार को जिले में 80 से अधिक स्थानों पर करीब 40 से 45 हजार श्रमिक जुटे थे। सेक्टर-63 और मदरसेन (Motherson) कंपनी के पास स्थिति अधिक तनावपूर्ण हो गई थी, जहां उपद्रवियों ने आगजनी की।

क्या है सरकार का फैसला और वर्तमान स्थिति?

इस तनाव के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए उनकी मजदूरी में 21 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। प्रशासन ने जानकारी दी है कि श्रमिकों की पांच में से चार मांगों को स्वीकार कर लिया गया है और शेष मुद्दों के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है।

पुलिस का कहना है कि वर्तमान में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। जोनल पुलिस और अग्निशमन विभाग की मुस्तैदी से आगजनी पर काबू पाया गया और न्यूनतम बल प्रयोग कर शांति व्यवस्था बहाल की गई। पुलिस ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

शहर में कई जगहों पर आगजनी और पथराव की घटनाओं की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी और अब तक 300 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

हिंसा के पीछे पाकिस्तानी लिंक

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने इस पूरे घटनाक्रम को एक 'नियोजित साजिश' करार दिया है। उन्होंने आशंका जताई है कि इस अशांति के पीछे पाकिस्तानी हैंडलर्स का हाथ हो सकता है। मंत्री ने कहा कि हाल ही में मेरठ और नोएडा से पकड़े गए संदिग्ध आतंकवादियों के तार पाकिस्तान से जुड़े थे, ऐसे में राज्य की स्थिरता को भंग करने के लिए इस प्रदर्शन का सहारा लिया गया हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह अशांति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुजफ्फरनगर कार्यक्रम में खलल डालने की कोशिश हो सकती है।

क्यों भड़का श्रमिकों का गुस्सा?

श्रमिकों के इस गुस्से की मुख्य वजह पड़ोसी राज्य हरियाणा द्वारा न्यूनतम वेतन में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी करना है। नोएडा के श्रमिकों का कहना है कि वे 12-12 घंटे काम करने के बावजूद केवल 11,000 से 15,000 रुपये कमा पा रहे हैं, जिससे घर चलाना मुश्किल है। उनकी मांग है कि वेतन कम से कम 20,000 से 25,000 रुपये किया जाए। हालांकि, यूपी सरकार का कहना है कि उन्होंने 1 अप्रैल को ही दरें संशोधित की हैं, जिसके तहत अकुशल श्रमिकों के लिए 13,690 रुपये तय किए गए हैं।

राजनीतिक घमासान और सरकार का आश्वासन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रमिकों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उद्यमियों को भी कर्मचारियों के साथ संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा की नीतियां केवल उद्योगपतियों के पक्ष में हैं, जिसके कारण श्रमिकों की अनदेखी हो रही है और वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।

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