Noida Protest से UP की सियासत गरमाई! 'ससम्मान इस गद्दी से उतर जाइए', Akhilesh Yadav का CM Yogi पर तीखा कटाक्ष
Noida Protest News Update: फैक्ट्री मजदूरों का सैलरी बढ़ोतरी वाला प्रदर्शन अब यूपी की राजनीति का सबसे गर्म मुद्दा बन गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ पर सीधा निशाना साधते हुए तीखा कटाक्ष किया है। उन्होंने CM को 'ससम्मान गद्दी से उतर जाने' की सलाह दी और नक्सलवाद की साजिश वाले बयान पर सवाल उठाते हुए पूछा कि '10 साल में आपने मजदूरों के लिए क्या किया कि हालात इतने बिगड़ गए?'
अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह बयान न सिर्फ नोएडा प्रदर्शन को लेकर है, बल्कि महंगाई, भाजपा की नीतियों और प्रशासनिक नाकामी पर भी हमला है।

अखिलेश यादव का पूरा हमला- क्या कहा सपा प्रमुख ने?
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर माननीय मुख्यमंत्री जी नोएडा के मजदूरों के आंदोलन को किसी की साजिश बता रहे हैं तो एक सवाल जनता आपसे पूछ रही है कि अगर ये सच है तो आपकी खुफिया पुलिस क्या आपके साथ बंगाल प्रचार करने गई थी या वनस्पति की खोजबीन में लीन थी या उसके प्रभाव में?'
उन्होंने आगे ये भी कहा कि 'मजदूरों के आंदोलन को नक्सलवाद के आरोप से बदनाम करने से पहले आप ये बताएं कि आपने ऐसा क्या किया है कि 10 सालों में ऐसे हालात बन गए। आप मजदूरों के जख्मों पर मलहम नहीं लगा सकते तो न लगाएं, लेकिन उन जख्मों पर नमक तो न छिड़कें।'
अखिलेश ने महंगाई को भी भाजपा की कमीशनखोरी से जोड़ते हुए कहा कि 'भाजपाई कमीशनखोरी से जन्मी महंगाई के कारण परिवारवाले वैसे ही दुखी हैं। उसके ऊपर अवांछित दोषारोपण करने का जो पाप आप कर रहे हैं, वो घोर निंदनीय है। इससे हालात बद से बदतर हो सकते हैं।'
सबसे तीखा कटाक्ष ये रहा कि 'अगर आपसे प्रदेश नहीं संभल रहा है तो ससम्मान इस गद्दी से उतरकर जाइए, नहीं तो जनता उतार देगी। भाजपाई खुद तो अंतिम दौर के भ्रष्टाचार में आकंठ लिप्त हैं, इसीलिए न इनसे देश संभल रहा है, न प्रदेश। भाजपा का डबल इंजन जनता के लिए ट्रबल इंजन बन गया है। जनता इन सब इंजनों के पहिए खोल देगी और पुर्जे निकालकर हमेशा के लिए कबाड़खाने में भेज देगी।'
सीएम योगी का पक्ष: नक्सलवाद पुनर्जीवित करने की साजिश?
इससे पहले सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने रविवार (12 अप्रैल 2026) को स्पष्ट रूप से कहा था कि देश में नक्सलवाद लगभग समाप्त होने की स्थिति में है, लेकिन इसे पुनर्जीवित करने की साजिश हो सकती है। उन्होंने औद्योगिक क्षेत्रों में खुफिया तंत्र को अलर्ट रहने और विघटनकारी तत्वों पर नजर रखने के निर्देश दिए थे।
CM ने मजदूर कल्याण को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि कुछ ताकतें मजदूरों की वैध शिकायतों का फायदा उठाकर कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर रही हैं।
कांग्रेस का भी हमला: 'महंगाई कमर तोड़ रही, पुलिस का आंसू गैस जवाब नहीं'
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नोएडा में मदरसन कंपनी के बाहर की तस्वीरें विचलित करने वाली हैं। जब महंगाई कमर तोड़ रही हो और वेतन के नाम पर मजदूरों का शोषण हो रहा है, तो युवा सड़क पर उतरने को मजबूर होगा ही। योगी जी, भारी भरकम विज्ञापनों से पेट नहीं भरता! पुलिस के आंसू गैस के गोले भूखे पेट का जवाब नहीं हो सकते। मजदूरों की जायज मांगों को अनसुना करना बंद करिए और दमन की जगह समाधान निकालिए।'
इतिहास दोहरा रहा है? 2013 का नोएडा हिंसा
यह पहली बार नहीं, जब नोएडा के होजरी कॉम्प्लेक्स में मजदूर प्रदर्शन हिंसक हुआ हो। 21 फरवरी 2013 को ट्रेड यूनियनों के बंद के दौरान भी उग्र भीड़ ने 500 से ज्यादा उद्योगों में तोड़फोड़ की, 15 वाहनों में आग लगाई और दर्जनों गाड़ियां क्षतिग्रस्त की थीं। पुलिस को रबर बुलेट और लाठीचार्ज करना पड़ा था।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ा
यूपी में 2027 में 403 सीटों पर विधानसभा चुनाव (UP Election 2027) होने हैं। पंचायत चुनाव भी इसी साल होने थे, लेकिन LPG गैस की कमी और महंगाई जैसी समस्याओं के चलते अटकलें लग रही हैं कि इन्हें अगले साल टाला जा सकता है। नोएडा प्रदर्शन, महंगाई और मजदूर असंतोष जैसे मुद्दे विपक्ष को सरकार घेरने का मौका दे रहे हैं।
नोएडा का मजदूर आंदोलन अब सिर्फ वेतन-ओवरटाइम का मुद्दा नहीं रह गया। यह यूपी की सियासत का नया चरण बन चुका है। अखिलेश यादव ने इसे 10 साल की भाजपा सरकार की नाकामी से जोड़कर हमला बोला, जबकि योगी सरकार इसे बाहरी साजिश बता रही है। कांग्रेस भी दमन के बजाय समाधान की बात कर रही है।
मजदूरों की वैध मांगें (हरियाणा बराबर वेतन, 8 घंटे शिफ्ट, सुरक्षा) जायज हैं, लेकिन अगर इन्हें राजनीतिक रंग दिया गया तो स्थिति और बिगड़ सकती है। 2027 चुनाव से पहले ऐसे मुद्दे दोनों पक्षों के लिए हथियार बन रहे हैं।
अभी नोएडा में पुलिस-प्रशासन स्थिति काबू में लाने की कोशिश कर रहा है। प्रशासन मजदूरों से बातचीत भी कर रहा है। लेकिन सियासी बयानबाजी से शांति की राह और मुश्किल हो रही है।
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