लखीमपुर खीरी: लड़की का हाथ काटने के बाद भी हुई शर्मनाक घटना
पीड़िता को लखनऊ ले जाने के लिए एक घंटे तक एंबुलेंस नही पहुंची। इस घटना के बाद एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग सवालों के घेरे में आ गया।
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लखीमपुर खीरी। यूपी के लखीमपुर खीरी मे सिरफिरे आशिक द्वारा बालिका पर तलवार से हमला कर हाथ काटने के मामले में जिला अस्पताल की बड़ी लापरवाही सामने आई है। गंभीर रूप से घायल पीड़िता को हायर सेंटर रेफर तो कर दिया गया लेकिन पीड़िता को लखनऊ ले जाने के लिए एक घंटे तक एंबुलेंस नही पहुंची। इस घटना के बाद एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग सवालों के घेरे में आ गया। गरीब पीड़िता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह निजी एंबुलेंस से लखनऊ चली जाती जिसके बाद लोगों ने पीड़िता की मां को चंदे के रूप में पैसे इकट्ठा करके दिए तो वहीं लखनऊ के अस्पताल मे भी ब्लड के लिए पीड़ित परिवार को परेशान होना पड़ा।
एक घंटे तक नहीं आई एंबुलेंस
दरअसल लखीमपुर खीरी के सदर कोतवाली क्षेत्र मे बुधवार को एक सिरफिरे आशिक ने एकतरफा प्यार में नाबालिग लड़की पर तलवार से हमला कर दिया गया था। अस्पताल मे भर्ती कराने के बाद जब एक घंटा तक एंबुलेंस नहीं पहुची तो मीडिया कर्मियों ने सीएमएस एसके गौतम से बात की तो उनके पास कोई जवाब नहीं था और फोन पर एंबुलेंस विभाग के किसी अधिकारी को सिर्फ फटकार ही लगाए जा रहे थे।
जिला अस्पताल की बड़ी लापरवाही
हालांकि एक घंटे के देरी से एंबुलेंस जिला अस्पताल पहुंची जिसके बाद घायल को लखनऊ के केजीएमयू ले जाया गया जबकि जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा था कि अगर 6 घंटे के अंदर ही हाथ को दोबारा से जोड़ा जाए तो ये जुड़ सकता है। उसके बाद भी पीड़िता को एक घंटा सिर्फ एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा।
वहीं जिसकी दुकान पर पीड़िता का भाई काम करता है उस दुकानदार का कहना है कि एक घंटा पहले ही लड़की दवा लेकर गई थी। उसका भाई काम पर नहीं आया था। चार्जर का लफड़ा पहले चल रहा था और ये मामला छेड़छाड़ से भी जुड़ा हुआ है। पीड़िता के भाई को चार्जर लेकर बहन के साथ बाहर आने के लिए कहा, उसके बाद उस पर बीच रोड पर हमला कर दिया गया।

लोगों ने दिए नेत्रहीन मां को पैसे
अस्पताल में मौजूद लोगों ने एंबुलेंस न मिल पाने पर अपनी नाराजगी जताई। लोगों का कहना था कि अस्पताल के डॉक्टर को सूचना मिलते ही एंबुलेंस का इंतजाम कर लेना चाहिये था लेकिन नही किया। उनका कहना है कि अगर इंतजाम नहीं हो पा रहा था तो हमें बताना चाहिए था, हम लोग अपने पैसे से घायल को अस्पताल भेजते। ऐसे में अस्पताल के सीएमएस और एंबुलेंस की ड्राइवर के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जब एक घंटे तक पीड़िता को एंबुलेंस नही मिल पाई तो उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी। ये देखकर मानवता के नाते लोगों ने आगे आकर पीड़िता की नेत्रहीन मां को पैसे देने शुरू किए।

लखनऊ में भी पीड़िता को नहीं मिला ब्लड!
देखते ही देखते महिला के पास चार से पांच हजार रुपये इकट्ठा हो गए लेकिन इतने मे एंबुलेंस आई। पीड़िता को लखनऊ के लिए भेज दिया गया। ये लापरवाही तो जिला अस्पताल की थी लेकिन जब लखनऊ पहुंची तो पीड़िता को ब्लड नहीं मिल पाया तो इससे साफ हो गया कि स्वास्थ्य विभाग अभी सुधरा नहीं है। इस मामले में अभी अपडेट का इंतजार है।












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