तबाही का मंजर देख आधी रात में किया NDRF को फोन, 330 लोगों को निकाला सुरक्षित
बहराइच। 'हैल्लो एनडीआरएफ वाले साहब बोल रहे हैं क्या? हमारे गांव में पानी आ गया है। हमारे घर में घुटने तक पानी घुस गया है। पानी बहुत तेज बढ़ रहा है। सुबह तक हम सब लोग डूब जाएंगे। हम लोगों को बचा लीजिए साहब। हमस सब तो एक बार किसी भी तरह निकल भी जाएंगे लेकिन बच्चे और महिलाएं कैसे निकलेंगी?' ये व्यथा एक ग्रामीण ने एनडीआरएफ टीम को फोन के माध्यम से रात को बताया।

सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की टीम ने अपने आलाधिकारियों को सूचना देने के बाद गांव के लिए रवाना हो गए। एनडीआरएफ के जवानों ने कड़ी मशक्कत के बाद ग्रामीणों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान बेल्हा-बेहरौली तटबंध पर पहुंचा दिया है, लेकिन बाढ़ विभषिका का खौफ लोगों के चेहरों पर साफ नजर आ रहा है।

नेपाल के पहाड़ों पर मूसलाधार बारिश से घाघरा, सरयू और राप्ती नदी उफान पर हैं। इसके चलते जिले के कई गांव पूरी तरह बाढ़ की जद में हैं। सबसे खराब हालत महसी तहसील के बरुहा बेहड़ गांव की है। इस गांव में पण्डितपुरवा, रामपुरवा, पासिनपुरवा, लोधनपुरवा, पुरबियनपुरवा मजरे में 330 लोग रहते हैं। ये सभी गांव घाघरा नदी के उस पार है। बीती रात को जब ग्रामीण सो रहे थे तभी पानी गांव में घुस आया। ग्रामीणों को तब पता चला जब सभी के घर में दो दो मीटर तक पानी घुस गया। क्षेत्र के राम विजय और पारस कुमार ने इसकी सूचना एनडीआरएफ 11वीं वाहिनी के टीम कमांडर संजीव कुमार को दी।
संजीव ने बताया कि रात में ग्रामीणों का फोन आया और वो घबराएं हुए थे। उनकी बातों से ये लग रहा था कि वे बहुत घबराएं हुए है। मैने उनका पूरा पता पूछा और उनके पास जल्द पहुचकर बाहर निकलाने का पूरा भरोसा दिलवाया। जिससे वे लोग घबराएं न। डरे सहमे बूढ़े, बच्चों और महिलाओं ने घरों की छतों पर डेरा जमाया। आखिरकार एनडीआरएफ ने कड़ी मशक्कत के बाद बरुहा बेहड़ गांव से 330 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में सफलता हासिल की है। बाढ़ चैकियों पर बाढ़ पीड़ितों के खाने और रहने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने राहत सामग्री के अलावा तिरपाल मुहैया कराई है।












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