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Mulayam Singh Yadav ने अपने राजनीतिक जीवन में लिए ये 5 बड़े अहम फैसले 

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी नेता Mulyam Singh Yadav नहीं रहे। उनका जाना यूपी ही नहीं दिया की राजनीति मन शून्यता पैदा कर गया। हालाकि मुलायम सिंह यादव ने अपने राजनीतिक जीवन में कई सारे फैसले लिए। लेकिन उनमें कुछ फैसले ऐतिहासिक साबित हुए। अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवाने का मामला हो या फिर 2012 में अखिलेश को सीएम बनने का निर्णय हो, अपने हर फैसले से एक बड़ा संदेश देने का प्रयास किया था। मुलायम के लिए गए हर फैसले की गूंज काफी दूर तक सुनाई दी। इसमें भी अखिलेश को उन्होंने अखिलेश का फैसला उस समय लिया था जब Samajwadi Party अपने चरम पर थी।

अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवाई

अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवाई

मुलायम सिंह यादव के जीवन में सबसे बड़ा एतिहासिक फैसला अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों पर गोली चलवाने का लिया था। इस एक फैसले से मुलायम सिंह यादव ने मुस्लिम समुदाय का विश्वास जीतने को कोशिश की थी। हालाकि अपने इस फैसले का कई मंचों से उन्होंने बचाव भी किया था। कारसेवकों पर गोली चलवाने के मामले में मुलायम सिंह यादव हमेशा विरोधियों के निशाने पर रहे। इस कांड के बाद ही मुलायम की छवि मुस्लिम हितैषी बन गई। इस घटना के बाद ही उन्हें मुल्ला मुलायम के नाम से जाना जाने लगा। हालांकि इन राजनीतिक गतिविधियों के बीच मुलायम के बीजेपी नेताओं के साथ रिश्ते काफी अच्छे रहे।

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश को सीएम बनाया

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश को सीएम बनाया

यह 2012 का वह दौर था जब समाजवादी पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी को मात देकर पुर्ण बहुमत हासिल किया था। इसके बहुमत के पीछे नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव की कड़ी मेहनत थी। मुलायम सिंह ने सड़क पर उतरकर बसपा और मायावती की नीतियों का विरोध किया था। तब अखिलेश अभी राजनीति में नए थे। हालांकि अखिलेश ने 2012 के चुनाव के दौरान यूपी में साइकिल यात्रा निकालकर एक माहौल बनाने की कोशिश की थी लेकिन चुनाव के बाद जब सपा को पुर्ण बहुमत मिला तब यही कयास लगाए जा रहे थे कि मुलायम सिंह ही चीफ मिनिस्टर बनेंगे लेकिन सबको चौंकाते हुए उन्होंने अखिलेश जैसे युवा को यूपी की कमान सौंप दी थी।

 प्रोफेसर रामगोपाल को पार्टी से निकाला

प्रोफेसर रामगोपाल को पार्टी से निकाला

यूपी में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी की कमान संभालने को लेकर अखिलेश और उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच रार मची हुई थी। इसी रार के बीच मुलायम सिंह यादव ने बड़ा फैसला लेते हुए अपने सबसे करीबी और विश्वासपात्र नेता प्रोफेसर रामगोपाल यादव को पार्टी से निकाल दिया था। उस समय मुलायम सिंह के सामने कई तरह के धर्मसंकट थे। एक तरफ अखिलेश थे तो दूसरी तरफ उनके अपने भाई शिवपाल यादव। शिवपाल यादव के दबाव में मुलायम ने रामगोपाल को हटाने का निर्णय लिया था लेकिन बाद में रामगोपाल अखिलेश के सहयोग से पार्टी में वापसी करने में कामयाब हो गए थे।

यूपी में मुलायम ने नकल अध्यादेश वापस लिया

यूपी में मुलायम ने नकल अध्यादेश वापस लिया

यूपी में नकल विरोधी अधिनियम, 1992 भारतीय जनता पार्टी के कल्याण सिंह की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 1992 में उस समय लाया गया था जब राजनाथ सिंह यूपी के शिक्षा मंत्री हुआ करते थे। नकल अध्यादेश मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के दिमाग की उपज था। इस कानून का उद्देश्य राज्य में स्कूल और विश्वविद्यालय परीक्षाओं में सामूहिक नकल की प्रथा को रोकना था। अधिनियम ने परीक्षाओं में अनुचित साधनों के प्रयोग को एक संज्ञेय अपराध बना दिया और यह गैर-जमानती था। मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सरकार जब 1993 में सत्ता में आई तो इसे निरस्त कर दिया।

शहीदों के पार्थिव शरीर को घर भेजने का निर्णय

शहीदों के पार्थिव शरीर को घर भेजने का निर्णय

मुलायम सिंह ने यूपी की राजनीति में तो कई कारनामे किए लेकिन जब वह रक्षा मंत्री थे तब उन्होंने शहीदों के पार्थिव शरीर को घर भेजने की प्रथा शुरू की थी जो आज भी चल रही है। पहले जब कोई जवान शहीद होता तो उसकी मिट्‌टी ही घर आती थी। साथ में उसकी वर्दी और सामान होता था लेकिन जब मुलायम सिंह देश के रक्षामंत्री बने तब उन्होंने यह व्यवस्था लागू की थी कि किसी भी जवान या अधिकारी के शहीद होने पर उनके पार्थिव शरीर को उनके घर भेजा जाएगा। यह परम्परा आज भी चल रही है। मुलायम सिंह का यह फैसला हमेशा उनकी याद दिलाता रहेगा।

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