यूपी: ट्रेन की चपेट में आ गए मां-बेटे, चीखता रह गया बेबस बाप
मिर्जापुर क्षेत्र में झारखंड संपर्क क्रांति एक्सप्रेस की चपेट में आने से मां और बेटे की मौत हो गई। ट्रेन की आहट से बेखबर मां-बेटे रेलवे क्रॉसिंग को पार कर रहे थे।
मिर्जापुर। यूपी के मिर्जापुर के पडरी थाना क्षेत्र के अघवार गांव के पास बुधवार की शाम सात बजे के करीब रेलवे फाटक पार करते समय झारखण्ड सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस की चपेट में आने से मां-बेटे की मौत हो गयी। मृतका रेलवे क्रॉसिंग को पार कर मुल्हवां गांव स्थित अपने मायके जा रही थी। मृतका के साथ उसका पति भी था। मामले की जानकारी होते ही मौके पर सिविल पुलिस के साथ ही जीआरपी और आरपीएफ भी पहुंच गयी। शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए सुरक्षित रखवा दिया गया।

मृतका के मायके में थी शादी
नगर के घंटाघर मोहल्वा निवासी दिलीप कुमार साहू की ससुराल पड़री थाना क्षेत्र के मुल्हवां गांव में है उनके ससुराल में शादी थी। उसी में शामिल होने के लिए दिलीप कुमार साहू अपनी पत्नी गुंजा (35) व पुत्र शिवम(12) को रोडवेज तिराहे से एक आटो में सवार हो कर अघवार पहुंच गए। इसके बाद पैदल ही दिलीप अपनी पत्नी और पुत्र को साथ लेकर मुल्हवां की तरफ जाने लगा। सभी महिलाएं आपस में बात करते हुए आगे बढ़ी तो झिंगुरा रेलवे स्टेशन के पश्चिमी छोर पर स्थित फाटक झारखण्ड सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस के गुजरने के कारण बंद था।
गुंजा अपने पुत्र शिवम को साथ लेकर ट्रेन की आहट लिए बगैर क्रासिंग को पार करने लगी। इसी बीच डाउन लाइन से गुजर रही झारखण्ड सम्पर्क क्रांति सुपरफास्ट ट्रेन की चपेट में आने से गुंजा व उसके पुत्र की मौत हो गयी। यह देख पति दिलीप कुमार चीखने लगा। मौके पर रोने-पीटने की आवाज सुन आसपास के लोग भी पहुंच गए। स्थानीय लोगों की सूचना पर आरपीएफ के प्रभारी निरीक्षक अर्जुन कौंतेय, जीआरपी के थानाध्यक्ष एचडी सिंह यादव व पड़री थानाध्यक्ष फोर्स लेकर पहुंच गए। पुलिस ने दिलीप के घर पर टेलीफोन कर इसकी सूचना दे दी।
मुल्हवां में मचा कोहराम, शादी का माहौल गम में बदला
ट्रेन की चपेट में आने से मां-बेटें की मौत से पड़री थाना क्षेत्र के मुल्हवां गांव के साथ ही नगर के घंटाघर मोहल्ले में बुधवार की रात कोहराम मच गया। मां-बेटे की मौत की खबर सुनते ही गुंजा के सुसराल और मायके वाले स्तब्ध हो गए। कोई कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। शादी का माहौल गम में बदल गया। घर पर मंगल गीत की बजाय करुण क्रंदन मच गया। महिलाएं और बच्चें फूट-फूट कर रो रहे थे।












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