मोदी के ऐलान के बाद भी लखनऊ में 22 नवंबर को होगी किसान महापंचायत, जानिए क्यों नहीं पीएम पर भरोसा
लखनऊ, 19 नवंबर: उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी है। पीएम मोदी ने देश के नाम संबोधन में कहा कि सरकार आगामी सत्र के दौरान तीनों कानूनों को वापस लेने की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी कर लेगी। किसान अपने घर लौट जाएं। सरकार ने नेक नियत से इसको आगे बढ़ाने का प्रयास किया था लेकिन किसानों की असहमति की वजह से इस कानून को वापस लिया जा रहा है। लेकिन इस बीच किसान संगठन के नेताओं ने कहा है कि जब तब यह काला कानून संसद से पास नहीं हो जाएगा तब तब वो अपना आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे क्योंकि उन्हें पीएम के बयान पर भरोसा नहीं है।

22 नवंबर को किसान महापंचायत की तैयारियां जारी रहेंगी
संयुक्त किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष हरनाम सिंह ने कहा कि अभी जानकारी मिली है कि पीएम मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी है। पीएम को यह फैसला बहुत पहले ही ले लेना चाहिए था। आज गुरुनानक जयंती है। प्रकाश पर्व पर पीएम मोदी को सद्बुद्धि आई है। लखनऊ में 22 नवंबर को होने वाली किसान महापंचायत की तैयारियां में जुटे हुए हैं। अभी किसान मोर्चा के नेता राकेश टिकैत महाराष्ट्र में है। उनके साथ बातचीत के बाद ही आगे का कोई फैसला लिया जाएगा।

संसद में कानून बनने तक वापसी नहीं
किसान नेता हरनाम सिंह ने पीएम मोदी पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी बातों पर भरोसा नहीं है। जब तक संसद में लिखा पढ़ी के माध्यम से कानून वापस लेने का कागज हमारे हाथ में नही आ जाता तब तक हम नहीं हटेंगे। पीएम ने कानून वापस लेने की तो बात की है लेकिन उनका क्या होगा जिन्होंने इस आंदोलन में अपनों को खोया है। मोदी को किसानों की याद बहुत देर से आई। किसानों की मौत के बाद याद आई यह दुखद है। लेकिन हम सत्र का इंतजार करेंगे। पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसपर आगे का फैसला लिया जाएगा।

पीएम पर भरोसा नहीं, जो 704 किसान मारे गए उनका क्या होगा
हरनाम सिंह कहते हैं कि, अभी संसद से वापसी नहीं होगी तब तक बैठे रहेंगे। किसान मोर्चा के नेताओं के साथ बैठक के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। जिस दिन कागज में रद्द होगा तब तक भरोसा नहीं। पीएम पर अविश्वास क्यों है- उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। 704 किसान मर गए। उनका दर्द कौन सहेगा। किसानों का दर्द कौन समझेगा। गुरु नानक जी का जन्मदिन है। आज पीएम ने कहा है कि पीएम की बात पर विश्वास नहीं है। जब तक संसद से वापसी नहीं होगी तब तक नहीं होगा

लखनऊ में 22 नवंबर को किसान महापंचायत की चल रही थी तैयारियां
हालांकि किसान मोर्चा की तरफ से लखनऊ में 22 नवंबर को प्रस्तावित किसान महापंचायत के लिए युद्धस्तर पर मरम्मत का काम चल रहा है। भारतीय किसान संघ (बीकेयू) के एनसीआर अध्यक्ष मंगेराम त्यागी ने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर 22 तारीख को लखनऊ में किसान महापंचायत लखनऊ में सरकार की ओर से कोई हस्तक्षेप होता है तो मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर को भी उत्तर प्रदेश की जमीन पर नहीं उतरने दिया जाएगा। लेकिन अब जबकि केंद्र सरकार ने तीनों कानूनों को वापस लेने का फैसला कर लिया है तो क्या ये पंचायत होगी या इसे टाला जाएगा। हालांकि इस बात को लेकर जब महापंचायत की तैयारियों में जुटे किसान नेता हरनाम सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह मोर्चा की ओर से तय किया जाएगा कि अगला कदम क्या होगा।

किसान महापंचायत में कई मुद्दों पर होनी है चर्चा
संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 22 नवंबर को लखनऊ में किसान महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। इसमें तीन कृषि कानूनों के साथ-साथ केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी की गिरफ्तारी-बर्खास्तगी पर भी चर्चा होनी थी। इस महापंचायत में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली की सीमा पर बैठे बीकेयू नेता राकेश टिकैत, गुरनाम चादुनी समेत कई किसान नेता दिल्ली जाएंगे. महापंचायत को लेकर खुद बीकेयू अध्यक्ष नरेश टिकैत कई बार बैठक कर चुके हैं। किसानों को डर है कि उन्हें लखनऊ महापंचायत में शामिल होने से रोका जा सकता है। इस महापंचायत में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के किसान नेताओं के नेतृत्व में किसानों का एक जत्था लखनऊ आने वाला है।












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