मोदी लहर में अखिलेश के इन मंत्रियों की डूब गई नैया
मोदी लहर में अखिलेश यादव के कई मंत्रियों की डूबी लुटिया, अपने गढ़ में भी नहीं बचा पाए ये मंत्री अपनी सीट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चुनावी परिणाम ने समाजवादी पार्टी को प्रदेश में ऐसे स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है जिसकी किसी ने भी कल्पना नहीं की थी। प्रदेश में सपा महज 47 सीटें हासिल हुई और इसे 2012 की तुलना में 177 सीटें का नुकसान उठाना पड़ा। पार्टी के कई बड़े नेताओं को हार का मुंह देखना पड़ा जिसमें कई मंत्री भी शामिल हैं। यूपी में अखिलेश यादव की इस हार के पीछे की सबसे बड़ी वजह उनके परिवार के भीतर कलह और कांग्रेस के साथ गठबंधन को माना जा रहा है।
सपा को सबसे बड़ा झटका प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लगा, यहां पार्टी को सिर्फ एक ही सीट पर जीत हासिल हुई और उस सीट पर भी जीत इसलिए हासिल हुई क्योंकि भाजपा ने यहां से कोई उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा। मोहनलालगंज एकमात्र ऐसी सीट है जहां सपा को जीत हासिल हुई। लेकिन लखनऊ में सपा के दो मंत्री चुनाव हार गए जिसमें रविदास मेहरोत्रा और अभिषेक मिश्रा शामिल हैं।

अखिलेश के राइट हैंड भी चित
अखिलेश सरकार में रविदास मेहरोत्रा और अभिषेक मिश्रा दोनों ही मंत्री थे और अभिषेक मिश्रा को अखिलेश यादव का बेहद ही करीबी माना जाता था। लखनऊ में की उत्तरी सीट से वह पहली बार चुनाव जीतकर आए थे और माना जाता था कि वह अपनी सीट को आसानी से बचा लेंगे लेकिन उन्हें नीरज बोरा से हार का सामना करना पड़ा। अभिषेक मिश्रा अखिलेश यादव के साथ हर वक्त साए की तरह साथ रहते थे और तमाम मौकों पर वह उनके लिए बेहतर कम्युनिकेटर की भूमिका अदा करते थे।

फरार गायत्री प्रजापति को भी मिली हार
वहीं सपा के सबसे विवादित नेता और कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति भी अमेठी से चुनाव हार गए, चुनाव के आखिरी समय में जिस तरह से उनपर गैंगरेप का आरोप लगा और वह फरार हुए उसने सपा की मुश्किलें बढ़ाने का काम किया और आखिरकार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। गायत्री प्रजापति अखिलेश सरकार में खनन मंत्री थे, जिसके बाद उन्हें परिवहन मंत्री भी बनाया गया था, वह पहली बार अमेठी से जीतकर आए थे और उन्हें मुलायम का करीबी माना जाता था।

रानीगंज, पीलीभीत से भी हारे अखिलेश के मंत्री
राजनीगंज से सपा उम्मीदवार शिवकांत ओझा भी मोदी लहर में हार गए वह भाजपा के उम्मीदवार से 29215 वोटों के अंतर से हारे, जबकि पीलीभीत से अखिलेश के मंत्री रियाज अहमद भी अपनी कुर्सी नहीं बचा पाए, जलालपुर से सपा के बड़े नेता और अखिलेश सरकार में मंत्री शंखलाल मांझी भी 31 हजार से अधिक वोटों से हार गए। सपा के एक और बड़े नेता अऱविंद सिंह गोप भी इस बार बाराबंकी की रामनगर सीट से हार गए।

अरविंद सिंह गोप समेत कई नेताओं की लुटिया डूबी
अरविंद सिंह गोप को भी अखिलेश यादव का करीबी माना जाता था और उन्हें सपा में विवाद से पहले शिवपाल यादव ने टिकट नहीं दिया था, लेकिन विवाद के बाद अखिलेश यादव ने उन्हें टिकट दिया था और उनके लिए प्रचार भी करने पहुंचे थे, लेकिन वह भी अपनी सीट नहीं बचा पाए और 22 हजार से अधिक वोटों से हार गाए। इनके अलावा अवधेश प्रसाद, ब्रम्हशंकर त्रिपाठी, राममूर्ती वर्मा, शाहिद मंजूर और कमाल अख्तर भी मोदी लहर में हार गए जोकि अखिलेश यादव के करीबी भी थे।












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