एके शर्मा एवं जितिन को सांसदों एवं मंत्रियों की बैठक में मिली तरजीह, जेपी नड्डा ने दोनों से लिया था फीडबैक
लखनऊ, 11 अगस्त: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सात जुलाई को दो दिवसीय दौरे पर लखनऊ आए थे। लखनऊ में दो दिनों के प्रवास के दौरान उन्होंने पदाधिकारियों, मंत्रियों और सांसदों के साथ अलग- अलग बैठक कर चुनावी तैयारियों का फीडबैक लिया था। बैठक में कुछ मंत्रियों और सांसदों ने शीर्ष नेतृत्व के सामने अपनी व्यथा सुनाई थी और कहा था कि धार्मिक मामलों से ज्यादा जनता से जुड़े मुददों पर ही फोकस करना सही होगा। हालांकि मंत्रियों और सांसदों के साथ हुई इस बैठक में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और मोदी के करीबी एके शर्मा और हाल ही में भाजपा में शामिल हुए जितिन प्रसाद भी शामिल हुए थे।

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने अपने सभी कील कांटे दुरुस्त करना शुरू कर दिया है। तैयारियों का जायजा लेने के लिए ही पिछले दिनों नड्डा के दौरे के समय केंद्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष, प्रदेश प्रभारी राधामोहन सिंह शामिल हुए थे। शीर्ष नेतृत्व की तरफ से मंत्रियों को दो टूक कहा गया कि जिन मंत्रियों का परफारमेंस सही नहीं होगा उनकी मंत्रिमंडल से छुट्टी तय है।
भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की माने तो जेपी नड्डा ने लखनऊ दौरे के समय मंत्रियों और सांसदों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में भाजपा के किसी पदाधिकारी को शामिल नहीं किया गया था लेकिन यूपी के दो ऐसे चेहरे इस बैठक में शामिल हुए थे जो इस बैठक के लिए अपेक्षित नहीं थे। प्रधानमंत्री मोदी के खास माने जाने वाले पूर्व आईएएस और अब पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष एके शर्मा को भी बुलाया गया था। बैठक में शर्मा के अलावा हाल ही में कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए जितिन प्रसाद भी शामिल हुए थे। जितिन ने अपनी तरफ से पार्टी को कुछ सुझाव भी दिए थे।
मंत्रिमंडल में शामिल करने की अटकलों के बीच उपाध्यक्ष बनाए गए थे एके शर्मा
प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के 18 साल से भरोसेमंद रहे रिटायर्ड आईएएस अफसर और MLC अरविंद कुमार शर्मा को दो महीने पहले ही प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया था। शर्मा को संगठन और सरकार में जगह देने के लिए पिछले कुछ समय से अटकलों का बाजार गर्म था। पूर्व आईएएस एके शर्मा वीआरएस लेकर राजनीति में आए हैं। राजनीति में उनकी एंट्री भी धमाकेदार रही थी। पहले उन्हें भाजपा में शामिल कराया गया और फिर अगले दिन ही उन्हें MLC का टिकट भी पकड़ा दिया गया। उसी समय से अटकलें थीं कि शर्मा को यूपी में कुछ बड़ा पद दिया जाएगा। उन्हें डिप्टी सीएम का दावेदार भी बताया गया। लेकिन बाद में उन्हें संगठन में जगह मिली थी और उन्हें पार्टी का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया था।
महामारी के दौरान वाराणसी समेत कई जिलों में काम किया था
एके शर्मा काशी व पूर्वांचल के आसपास कोविड नियंत्रण से जुड़ी रणनीति बनाने व उसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पीएम मोदी के करीबी माने जाने वाले शर्मा कोविड की दूसरी लहर में लगातार सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। केवल वाराणसी ही नहीं बल्कि पूर्वांचल के अन्य 20 से ज्यादा जिलों में भी लगातार एक्टिव हैं। वाराणसी में कोरोना की रोकथाम को लेकर वे लगातार काशी में डेरा जमाए हुए हैं और स्थिति को काबू में करने के लिए प्रयास कर रहे थे।
ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने के लिए जितिन को मिल रही तरजीह
योगी सरकार के खिलाफ लगातार मुखर हो रहे ब्राह्मण संगठनों की आवाज उठाने के लिए नेता जितिन प्रसाद ने ब्राह्मण चेतना यात्रा निकाली थी। हालांकि जितिन प्रसाद तब कांग्रेस के नेताओं में शुमार हुआ करते थे। इस चेतना यात्रा के लिए जितिन यूपी में ब्राह्मणों के पीड़ित परिवारों से मिलना शुरू किया था। इसी कड़ी में उन्होंने लखनऊ में मारे गए हिन्दूवादी नेता कमलेश तिवारी से मुलाकात की थी वहीं बस्ती जाकर उन्होंने छात्रनेता आदित्य नारायण तिवारी के परिजनों से मुलाकात की थी। ब्राह्मण चेतना यात्रा निकालने से पहले जितिन ने उन जिलों को चिन्हित कर लिया था जिनमें ब्राह्मणों की हत्याएं हुई थीं।
जितिन ने कई पीड़ित परिवारों से की थी मुलाकात
तब जितिन ने कहा था कि योगी सरकार में लगातार ब्राह्मणों पर अत्याचार हो रहा है। वह उनको न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। प्रसाद ने एक रूट चार्ट तैयार किया था जिसमें उन जिलों का जिक्र किया गया था जहां ब्राह्मणों की हत्याएं हुईं थीं। जितिन ने एक महीने की इस यात्रा के दौरान सभी जगह जाकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात थी। इस यात्रा के कुछ दिनों बाद ही जितिन ने खुद भाजपा का दामन थाम लिया था। अटकलें लगाई जा रही हैं कि जितिन को भाजपा एमएलसी बना सकती है और उनका इस्तेमाल ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने में करेगी।












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