Milkipur bypoll: अयोध्या में टूटेगा PDA का तिलिस्म! मिल्कीपुर में कटेहरी जैसी जंग, क्या कहते हैं आंकड़े
Milkipur bypoll: बीजेपी की लोकसभा चुनाव में अयोध्या सीट पर हार का बदला चुकता करने की पूरी तैयारी है। वहीं दूसरी ओर सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद की जीत पक्की करने के लिए सपा एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। ऐसे में कयासों का बाजार गर्म है। मिल्कीपुर में स्थानीय स्तर इस बार जैसा उपचुनाव कभी नहीं देखा गया। तुलना की जा रही है कि अंबेडकर नगर की कटेहरी सीट से, रणनीतिक गठबंधन और दलबदल ने भाजपा की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यहां भी, सपा की सहयोगी कांग्रेस के स्थानीय नेता अमित वर्मा के कूदकर मायावती की बसपा में शामिल होने के बाद चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय हो गया।
अयोध्या लोकसभा सीट पर सांसद लल्लू सिहं की हार बीजेपी को अखर ही रही थी, इसे और अधिक कुरेदने का काम तब हुआ जब लोकसभा में राहुल गांधी ने सांसद अवधेश प्रसाद से हाथ मिलाकर तंज कसा। मिल्कीपुर उपचुनाव इस वक्त यूपी की राजनीतिक घटनाक्रम का केंद्र सा बन चुका है। ऐसे में इस उप चुनाव की तुलना पड़ोसी जिले अंबेडकरनगर की कटेहरी सीट से की जा रही है, जहां रणनीतिक गठबंधन और दलबदल ने भाजपा की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सपा की सहयोगी कांग्रेस के स्थानीय नेता अमित वर्मा जब बसपा में शामिल हुए तो चुनाव त्रिकोणीय मुकाबले में बदल गया। अमित वर्मा और लालजी वर्मा दोनों ही रिश्ते में करीबी हैं और दोनो ही सपा से टिकट पाने के प्रयास में जुटे थे। लेकिन सपा ने इस सीट पर उपचुनाव में अमित वर्मा की पत्नी शोभावती को मौका दिया और अमित वर्मा लगभग 42,000 वोट हासिल करने में कामयाब रहे, यह आंकड़ा भाजपा उम्मीदवार और तीन बार के विधायक धर्मराज निषाद के जीत के अंतर से अधिक था, जिन्हें 104091 वोट मिले, जो कि एसपी शोभावती के 69577 वोटों से 34514 वोट अधिक थे।
मिल्कीपुर की लड़ाई कटेहरी जैसी क्यों?
मिल्कीपुर में बीजेपी ने इस बार बाबा गोरखनाथ का पत्ता काटकर दो बार के जिला पंचायत सदस्य चंद्रभान पासवान को इस बार मौका दिया है। पासवान की पत्नी कंचन वर्मा मौजूदा जिला पंचायत सदस्य हैं।
हालांकि मिल्कीपुर में भीम आर्मी प्रमुख चन्द्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (एएसपी) ने समाजवादी पार्टी से आए सूरज चौधरी को मौका दिया है। चौधरी सपा सांसद अवधेश प्रसाद के करीबी सहयोगी रहे हैं जिनके बेटे अजीत सपा के टिकट पर मैदान में हैं। हाल ही चौधरी की समाजवादी पार्टी से दूरियां बढ़ा लीं और एएसपी ज्वॉइन कर लिया।
सवर्ण, दलित मिल्कीपुर का करेंगे निर्णय
मिल्कीपुर में दलितों की बड़ी आबादी है। दावा ये भी किया जा रहा है कि भाजपा, सपा और आजाद समाज पार्टी में बंट सकता है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो मिल्कीपुर में सपा और बीजेपी के बीच प्रतिष्ठा चुनाव माना जा रहा यह उपचुनाव त्रिकोणीय भी हो सकता है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियां सिर्फ दो ही दलों सपा और बसपा के बीच लड़ाई रहने का संकेत देती हैं।












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