मेरठ: 'वर्दी वाला गुंडा' के लिए मशहूर हुए उपन्यासकार वेदप्रकाश शर्मा का निधन

1993 में वर्दी वाला गुंडा की पहले ही दिन देशभर में 15 लाख कॉपी बिक गई थीं और मेरठ शहर के सभी बुक स्टॉल से नॉवेल घंटों में ही बिक गए।

मेरठ। अपनी लेखनी से बॉलीवुड में अच्छी पहचान रखने वाले जाने-माने लेखक और उपन्यासकार वेदप्रकाश शर्मा का बीती शुक्रवार रात करीब 12 बजे निधन हो गया। शर्मा करीबन एक साल से बीमार थे और मेरठ से मुंबई तक उनका इलाज चला। वेद कैंसर से पीड़ित थे। उनका निधन शास्त्रीनगर के-ब्लॉक स्थित उनके आवास पर हुआ। ऐसे में साहित्य जगत में शोक छा गया है। उनके शरीर का अंतिम संस्कार सूरजकुंड शमशान घाट पर होगा। गौरतलब है कि वेद वर्दी वाला गुंडा, इंटरनेशनल खिलाड़ी, सबसे बड़ा खिलाड़ी समेत कई फिल्मों के लेखक रहे हैं। ये भी पढ़ें: कर्पूरी ठाकुर: बिहार की दमदार आवाज

वर्दी वाला गुंडा की पहले ही दिन देशभर बिकी में 15 लाख कॉपी

वर्दी वाला गुंडा की पहले ही दिन देशभर बिकी में 15 लाख कॉपी

बता दें कि 6 जून 1955 को जन्मे वेद प्रकाश शर्मा हिन्दी के लोकप्रिय लेखक और उपन्यासकार रहे हैं। बताया गया कि 1993 में वर्दी वाला गुंडा की पहले ही दिन देशभर में 15 लाख कॉपी बिक गई थीं और मेरठ शहर के सभी बुक स्टॉल से नॉवेल घंटों में ही बिक गए। वहीं, प्री-ऑर्डर और एडवांस बुकिंग वाले आज के 'बेस्टसेलर' जमाने से पहले लोग, पहले उनके नॉवेल एडवांस में बुक करवाते थे। इस उपन्यास की अभी तक लगभग 8 करोड़ प्रतियां बिक चुकी हैं।

खिलाड़ी कुमार के लिए भी लिखी फिल्में

खिलाड़ी कुमार के लिए भी लिखी फिल्में

बता दें कि वेद ने खिलाड़ी कुमार के लिए भी फिल्में लिखी थी जिनमें 'सबसे बड़ा खिलाड़ी' और 'इंटरनेशनल खिलाड़ी' शामिल हैं। वेद प्रकाश के पिता पं. मिश्री लाल शर्मा मुजफ्फरनगर के बिहरा गांव के रहने वाले थे। परिजनों के मुताबिक, 62 वर्षीय वेद प्रकाश लंबे समय से कैंसर से पीड़ित चल रहे थे। बॉम्बे स्थित हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था। पिछले करीब डेढ़ माह से वे घर पर ही थे। शुक्रवार रात करीब 12 बजे उनका निधन हो गया। जीवन और समाज को करीब से देखने वाले वेद प्रकाश की तीन बेटियां करिश्मा, गरिमा और खुशबू और उपन्यासकार बेटा शगुन शादीशुदा हैं। वेदप्रकाश तुलसी पॉकेट बुक्स के मालिक भी थे।

ये हैं 'असली खिलाड़ी' के लेखक की कुछ खास बातें

ये हैं 'असली खिलाड़ी' के लेखक की कुछ खास बातें

1-पहली कहानी 1971 में 'पेनों की जेल' स्कूल मैग्जीन में प्रकाशित हुई। वे उस पत्रिका के छात्र संपादक बनाए गए थे।

2-हाईस्कूल में पढ़ रहे थे, तभी 1972 में पहला उपन्यास 'सीक्रेट फाइल' छपा।

3-फिल्म 'वर्दी वाला गुंडा' के पहले संस्करण की 15 लाख प्रतियां छापी गईं। बाद के संस्करणों की प्रतियों की गिनती नहीं रखी गई।

4-साल में दो-तीन नॉवेल लिखते थे और पहली बार में 1.5 लाख कॉपी छपती थी।

5-जब लिखने बैठते थे तो करीब आठ घंटे तक लगातार लिखते थे। इस बीच न खाते-पीते और न किसी से बातचीत करते थे।

6. फिल्म अभिनेता आमिर खान की फिल्म के लिए स्क्रिप्ट लिख रहे थें।

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