श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर हिंदू पक्ष को झटका! शाही ईदगाह ‘विवादित ढांचा’ नहीं, याचिका खारिज, विवाद की जड़ क्या?
Mathura Shri Krishna Janmabhoomi Shahi Idgah Mosque Case Timeline: मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष को जोरदार झटका दिया है। कोर्ट ने शाही ईदगाह को 'विवादित ढांचा' घोषित करने की याचिका खारिज कर दी है। यह फैसला 3 जुलाई 2025 को सुनाया गया।
हिंदू पक्ष के वकील महेंद्र प्रताप सिंह ने 5 मार्च को दायर याचिका (आवेदन ए-44) में मांग की थी कि शाही ईदगाह मस्जिद को आधिकारिक दस्तावेजों और कोर्ट की कार्यवाही में 'विवादित ढांचा' के रूप में दर्ज किया जाए। उनका दावा था कि मस्जिद श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर परिसर की 13.37 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण करके बनाई गई है। याचिका में कोर्ट से स्टेनोग्राफर को निर्देश देने की मांग की गई थी कि 'शाही ईदगाह मस्जिद' के बजाय 'विवादित ढांचा' शब्द का उपयोग किया जाए।

मुस्लिम पक्ष की आपत्ति
मुस्लिम पक्ष ने इस मांग का कड़ा विरोध करते हुए लिखित आपत्ति दायर की। उनका कहना था कि यह मांग गलत है और मस्जिद को ऐतिहासिक रूप से मान्यता प्राप्त है।
कोर्ट का फैसला
न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद 23 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। 3 जुलाई को कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इसमें 'ठोस कानूनी आधार' का अभाव है। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की आपत्ति को बरकरार रखा। इस मामले की अगली सुनवाई 2 अगस्त 2025 को होगी।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह में विवाद की क्या जड़ ?
- विवादित जमीन: मथुरा में 13.37 एकड़ जमीन, जिसमें 11 एकड़ पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर और 2.37 एकड़ पर शाही ईदगाह मस्जिद स्थित है।
- हिंदू पक्ष का दावा: मस्जिद के नीचे भगवान कृष्ण की जन्मस्थली है। मस्जिद को हटाकर जमीन हिंदू पक्ष को दी जाए। 1968 का समझौता अवैध है।
- मुस्लिम पक्ष का दावा: 1968 का समझौता वैध है। प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के तहत मस्जिद की स्थिति नहीं बदली जा सकती। मामला वक्फ ट्रिब्यूनल में सुना जाना चाहिए।
Hindu side Arguments: हिंदू पक्ष की प्रमुख दलीलें क्या?
- मस्जिद के नीचे श्रीकृष्ण जन्मस्थली के प्रमाण मौजूद हैं, जैसे कमल के आकार का स्तंभ और शेषनाग की आकृति।
- मुगलों ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी।
- जमीन का स्वामित्व कटरा केशव देव का है, वक्फ बोर्ड का दावा अवैध है।
- शाही ईदगाह में साल में केवल दो बार नमाज होती है, यह मस्जिद नहीं बल्कि ईदगाह है।
Muslim Side Arguments: मुस्लिम पक्ष की क्या दलीलें ?
- 1968 का समझौता वैध है, इसे 60 साल बाद चुनौती देना गलत है।
- प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 और लिमिटेशन एक्ट के तहत मामला सुनवाई योग्य नहीं।
- 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्थल था, उसकी प्रकृति नहीं बदली जा सकती।
कबसे चल रहा है ये विवाद?
- 1670: औरंगजेब ने कथित तौर पर केशवनाथ मंदिर तोड़कर शाही ईदगाह मस्जिद बनवाई।
- 1935: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 13.37 एकड़ जमीन बनारस के राजा कृष्ण दास को दी।
- 1951: श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट ने जमीन अधिग्रहित की।
- 1968: ट्रस्ट और ईदगाह कमेटी के बीच समझौता हुआ, जिसमें जमीन का स्वामित्व ट्रस्ट को और मस्जिद का प्रबंधन ईदगाह कमेटी को मिला।
- 2020: हिंदू पक्ष ने मथुरा कोर्ट में मस्जिद हटाने की याचिका दायर की।
- 2023: मथुरा कोर्ट ने 1968 के समझौते को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार की।
आगे की क्या हो सकती है स्थिति?
यह मामला श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ी 18 अन्य याचिकाओं का हिस्सा है, जिन पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। यह विवाद धार्मिक और ऐतिहासिक दावों के साथ-साथ कानूनी जटिलताओं से भरा है, जिसका समाधान निकट भविष्य में चुनौतीपूर्ण रहेगा।
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