कुत्ते को देख 'जानवर' बन गया इंसान, मजे-मजे में उतार दिया मौत के घाट
मुरादाबाद। जिला अस्पताल में आज सामने आई एक तस्वीर ने मानवता को शर्मसार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जिला अस्पताल परिसर में घूम रहे एक आवारा कुत्ते को कुछ लोगों ने आदमखोर होने का तमगा देकर खुद ही पत्थरों और लाठी-डंडों से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। कुत्ते को दौड़ा-दौड़ा कर मारने वाले लोग कुत्तें की मौत के बाद खुश नजर आए लेकिन एक जानवर के साथ जानवरों की तरह पेश आने वाले लोग भूल गए की उनको किसने यह हक दिया।

जिला अस्पताल में घूम रहे एक आवारा कुत्तें की मौत की यह तस्वीरें इंसानियत को शर्मिंदा करने के लिए काफी है। अपनी जान बचाने के लिए भागता, दौड़ता और गाड़ियों की आड़ में छुपता यह जानवर शायद नहीं जानता था की उसका सामना आज उन इंसानों से होने जा रहा है जो जानवरों से भी ज्यादा बेरहम बन जाते है।
पहले पत्थरों से कुत्तें को दौड़ा कर उसकी हिम्मत तोड़ी गई और उसके बाद जान बचाने की कवायद में थक चुके कुत्ते के सिर पर डंडों से ऐसा वार किया गया कि एक ही वार से कुत्ता निढाल होकर जमीन पर गिर गया। एक बार गिरने के बाद कुत्ता उठने की हालत में नहीं था और ना ही उसने ऐसी कोई कोशिश की।
कुत्तें पर आरोप था कि वह अस्पताल में आने वाले मरीजों और तीमारदारों को काट कर घायल कर रहा था। कुत्ते ने कितने लोगों को शिकार बनाया और और वो लोग कहां इलाज करा रहे हैं, इसकी पूरी जानकारी मारने वाले लोगों को भी नहीं थी। कुत्तें को मौत की नींद सुलाने वाले शिवा नाम के युवक के मुताबिक कुत्ता आदमखोर हो चुका था और उसको मारना मजबूरी थी।
कुत्ता भले ही आदमखोर रहा हो लेकिन कुत्ते को बेरहमी से मौत के घाट उतारने वाले लोगों को यह हक किसने दिया कि वो कानून अपने हाथ में लें। मेनका गांधी की संस्था से जुड़े अखिलेश शुक्ला से जब इस बाबत इस पर फोन पर बात की तो उनका कहना है की यह पशुओं के खिलाफ अमानवीय व्यहवार का मामला है और इसकी शिकायत अधिकारियों से की जाएंगी।












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