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Mahakumbh 2025: कौन हैं ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ महाकुंभ पहुंचने वाले साधु? जानिए इंदर गिरी महाराज के बारे में

Mahakumbh 2025: संगम नगरी प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ मेले की तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में हैं। महज कुछ दिनों में दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन शुरू होने जा रहा है, जो न केवल आध्यात्मिकता का केंद्र बनता है, बल्कि आस्था और विश्वास का जीवंत प्रतीक भी है। इस आयोजन में साधु-संत, महात्मा, अखाड़े के सदस्य और श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचने लगे हैं।

इस विशाल धार्मिक आयोजन में एक विशेष तस्वीर सामने आई है, जो आस्था की शक्ति को दर्शाती है। श्री पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा के श्रीमंत श्री इंदर गिरी महाराज, जो शारीरिक रूप से चलने-फिरने में असमर्थ हैं और हमेशा ऑक्सीजन सिलेंडर पर निर्भर रहते हैं, महाकुंभ मेला में शामिल होने के लिए प्रयागराज पहुंचे हैं।

mahakumbh mela 2025

भक्तों ने नाम दिया ऑक्सीजन बाबा

उनका मां गंगा और अपने इष्टदेव के प्रति विश्वास इतना प्रबल है कि वह अपनी अस्वस्थता के बावजूद इस धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए संगम तट पर पहुंचे हैं।श्रीमंत श्री इंदर गिरी महाराज को "ऑक्सीजन बाबा" के नाम से भी जाना जाता है और उनकी आस्था की यह विशेष तस्वीर महाकुंभ की आस्था और विश्वास के प्रतीक के रूप में सामने आई है।

डॉक्टरों ने दिया जवाब, सेवक साथ लेकर चल रहे दवाईयां

2021 में कोरोना महामारी के दौरान अस्वस्थ होने के बाद श्रीमंत श्री इंदर गिरी महाराज का इलाज चला, लेकिन डॉक्टरों ने जवाब दे दिया है। वह चौबीस घंटे ऑक्सीजन सिलेंडर पर निर्भर रहते हैं। इस कठिन परिस्थिति में भी वह महाकुंभ में भाग लेने के लिए प्रयागराज पहुंचे हैं, ताकि परंपरा निभा सकें। बाबा के अनुसार, यह समागम केवल एक धार्मिक दायित्व नहीं है, बल्कि एक गहन अनुभव है जो भौतिक क्षेत्र से परे है, जो दिव्य संबंध और सांप्रदायिक सद्भाव का एक क्षण प्रदान करता है।

श्रीमंत श्री इंदर गिरी महाराज ने बताया कि डॉक्टरों ने उनके इलाज को लेकर जवाब दे दिया है, लेकिन वह अस्वस्थता के बावजूद परंपरा का निर्वहन करने के लिए कुंभ पहुंचे हैं। उनके सेवक दवाई लेकर उनके साथ सेवा कर रहे हैं।

ऑक्सीजन बाबा ने बताया कुंभ मेले का महत्त्व

कुंभ मेला भारतीय संस्कृति और धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विशाल आयोजन है, जो पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यह आयोजन हर चार साल में होता है, लेकिन इसके स्थान का चयन हर बार अलग-अलग होता है। इस स्थान के चयन में ज्योतिष शास्त्र का अहम योगदान होता है।

कुंभ मेले का आयोजन तब होता है जब सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति ग्रहों की स्थिति विशेष रूप से अनुकूल होती है। ज्योतिषियों के अनुसार, जब सूर्य और चंद्रमा मकर राशि में होते हैं और बृहस्पति वृषभ राशि में होते हैं, तब कुंभ मेला प्रयागराज में आयोजित किया जाता है। इस ग्रह स्थिति को विशेष रूप से शुभ माना जाता है, और इसे कुंभ मेला आयोजन के लिए उपयुक्त माना जाता है।

यह भी पढ़े Mahakumbh 2025: महाकुंभ में 'क्रिया योग शिविर', विदेशी श्रद्धालु पहुंचे प्रयागराज, जानिए उनके अनुभव

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