Mahakumbh 2025 Amrit Snan: पहले 'अमृत स्नान' पर 10 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, जानें कितने और बाकी?
Mahakumbh 2025 Amrit Snan: महाकुंभ 2025 का आयोजन प्रयागराज के पवित्र संगम पर शुरू हो चुका है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर महाकुंभ का पहला अमृत स्नान (शाही स्नान) मनाया जा रहा है। स्नान मकर संक्रांति के अवसर पर मंगलवार सुबह 5:30 बजे शुरू हुआ।
करीब 10 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। यह स्नान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। लाखों श्रद्धालु, साधु-संत, और नागा बाबाओं ने संगम पर जुटकर इसे भव्य रूप दिया है। आइए जानते हैं अमृत स्नान की तिथियां और महत्व...

अमृत स्नान की तिथियां और महत्व
1. पहला अमृत स्नान: 14 जनवरी 2025 (मकर संक्रांति)
- महत्व: मकर संक्रांति पर सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का समय अत्यंत शुभ माना जाता है।
- गंगा में स्नान से सभी पापों से मुक्ति और विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
- इस दिन तिल, गुड़, और खिचड़ी का दान अक्षय फल देता है।
दूसरा अमृत स्नान: 29 जनवरी 2025 (मौनी अमावस्या)
- महत्व: मौनी अमावस्या पर मौन रहकर स्नान-दान करने का विशेष महत्व है।
- इस दिन संगम में स्नान करने से शुभ फलों की कई गुना प्राप्ति होती है।
तीसरा अमृत स्नान: 3 फरवरी 2025 (बसंत पंचमी)
- महत्व: बसंत पंचमी पर विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा के साथ संगम स्नान से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
अमृत स्नान के दिन किन बातों का ध्यान रखें?
नागा साधुओं का पहला अधिकार:
- अमृत स्नान का प्रारंभ नागा साधुओं और प्रमुख अखाड़ों के स्नान से होता है।
- उनके स्नान के बाद ही अन्य श्रद्धालु स्नान कर सकते हैं।
स्वच्छता का ध्यान:
- गंगा स्नान के दौरान साबुन, शैंपू, या अन्य रसायनों का उपयोग न करें।
- पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखें।
दर्शन:
- स्नान के बाद संगम किनारे स्थित लेटे हुए हनुमान जी और अक्षय वट मंदिर के दर्शन अवश्य करें।
दान:
- स्नान के बाद गरीबों को अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, और धन का दान करें।
- यह दान पुण्य बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।
महाकुंभ की विशेषताएं
भव्य आयोजन:
- महाकुंभ 2025 में 10,000 एकड़ के क्षेत्र में आयोजन हो रहा है।
- 1.5 लाख शौचालय, 15,000 सफाई कर्मचारी, और 69,000 सौर एलईडी लाइटें स्थापित की गई हैं।
सुरक्षा:
- 10,000 से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है।
- श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 24x7 कमांड और नियंत्रण केंद्र कार्यरत हैं।
अन्य प्रबंध:
- 1.5 लाख टेंट, 2,750 निगरानी कैमरे और 25,000 कर्मचारी मेला क्षेत्र में तैनात हैं।
- डिजिटल खोया-पाया केंद्रों की स्थापना की गई है।
अमृत स्नान: आध्यात्मिक अनुभव
महाकुंभ का अमृत स्नान न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का अवसर है, बल्कि जीवन को पवित्र और उन्नत बनाने का एक मार्ग भी है। इस दौरान की गई पूजा, दान, और स्नान का विशेष महत्व है, और यह हर हिंदू के लिए पुण्य अर्जित करने का श्रेष्ठ समय माना जाता है।
क्यों खास है अमृत स्नान?
श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी और श्री शंभू पंचायती अटल अखाड़ा मकर संक्रांति पर 'अमृत स्नान' करने वाले पहले अखाड़े थे। पहला 'अमृत स्नान' कई मायनों में खास है। यह 'पौष पूर्णिमा' के अवसर पर संगम क्षेत्र में सोमवार को पहले बड़े 'स्नान' के एक दिन बाद हुआ। महाकुंभ में विभिन्न संप्रदायों के संतों के 13 अखाड़े भाग ले रहे हैं। 'हर हर महादेव', 'जय श्री राम' और 'जय गंगा मैया' के नारे सुने जा सकते थे, क्योंकि भक्त ठंड के मौसम में जमने वाले पानी के बावजूद समूहों में स्नान क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे।
कुंभ का वर्तमान संस्करण 12 वर्षों के बाद आयोजित किया जा रहा है, हालांकि संतों का दावा है कि इस आयोजन के लिए खगोलीय संयोग 144 साल के बाद हो रहे हैं, जिससे यह अवसर और भी अधिक शुभ हो गया है।
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