Lucknow Lok Sabha Seat: लखनऊ में 40 साल से नहीं जीती कांग्रेस, लगातार 8 बार जीत चुकी BJP को हरा पाएगी?
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ लोकसभा सीट से नामांकन पत्र भर दिया है। उनके नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी मौजूद थे। लखनऊ में 5वें चरण में 20 मई को मतदान होगा।
राजनाथ सिंह 2014 और 2019 में लखनऊ से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। 2009 में राजनाथ सिंह ने गाजियाबाद लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की थी। सपा ने लखनऊ लोकसभा सीट से रविदास मेहरोत्रा को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, बसपा ने यहां से सरवर मलिक को टिकट दिया है।

लखनऊ सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है। यहां से पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी बिहारी वाजपेयी पांच बार सांसद चुने गए थे। राजनाथ सिंह से पहले 2009 में इस सीट से बीजेपी के लालजी टंडन से जीत हासिल की।
1957 और 1962 में लखनऊ से दो बार चुनाव हारने के बाद पहली बार अटल बिहारी ने पहली बार 1991 में इस सीट से लोकसभा चुनाव जीता था। इसके बाद से बीजेपी लगातार 8 चुनाव में लखनऊ से जीत हासिल कर चुकी है। वहीं, कांग्रेस 40 सालों से लखनऊ सीट पर जीत हासिल करने में कामयाब नहीं हो पाई है।
लखनऊ का राजनीतिक इतिहास
लखनऊ लोकसभा सीट को लेकर कहा जाता है कि यहां पर किसी तरह का जातिगत समीकरण काम नहीं करता है। यही वजह है कि पिछले 30 सालों से बीजेपी बिना अधिक मेहनत के यहां से जीत हासिल कर रही है।
2009 के चुनाव से पहले अटल बिहारी वाजपेई ने राजनीति से संन्यास ले लिया था। ऐसे में बीजेपी इस बात लेकर काफी असमंजस में थी कि आखिर अटल जी की विरासत को कौन संभालेगा। इस मुश्किल वक्त में बीजेपी ने अटल बिहारी के बेहद खास रहे लाल जी टंडन पर भरोसा जताया था। इस चुनाव में टंडन ने वाजपेयी के नाम पर वोट मांगे थे और उनकी खड़ाऊं लेकर प्रचार किया था। लाल जी टंडन ने रीता बहुगुणा जोशी को करीब 41 हजार मतों से हराया।
लखनऊ का जातीय समीकरण
लखनऊ लोकसभा के अंतर्गत कुल मतदाताओं की संख्या करीब 36 लाख से ज्यादा है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, लखनऊ जिले की आबादी 45.89 लाख है जिनमे पुरुषों की आबादी 23.94 लाख और महिलाओं की आबादी 21.95 लाख है।2011 की जनगणना के मुताबिक लखनऊ में 71 फीसदी से अधिक हिंदू आबादी रहती है, वहीं, 26 फीसदी से अधिक आबादी मुसलमानों की है।
लखनऊ में करीब 14 फीसदी अनुसूचित जाति की आबादी है। वहीं, ओबीसी वोटर्स की संख्या 28 फीसदी है। इनके अलावा सवर्ण वोटरों की भी आबादी ठीक-ठाक है। अब देखना होगा कि बीजेपी अपने इस मजबूत गढ़ को बचाए रख पाती है या इस बार यहां पर विपक्ष सेंधमारी कर जीत का लंबा इंतजार खत्म कर पाएगा?












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