OI Exclusive: Premanand Maharaj से शिकायत करने 150KM साइकिल चलाई, मां की किस बात से खफा था 7वीं का छात्र?
OI Exclusive Complain to Premanand Maharaj: मां की डांट से नाराज सातवीं कक्षा का एक छात्र अपनी रेंजर साइकिल उठाकर प्रेमानंद महाराज से मिलने 150 किलोमीटर दूर वृंदावन चला गया। 20 अगस्त 2025 को लखनऊ के बुद्धेश्वर से निकला 13 वर्षीय विराट देर शाम तक घर नहीं लौटा। परिजनों ने पारा थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज की। तीन दिन बाद, 23 अगस्त को पुलिस ने वृंदावन के एक आश्रम से विराट को सकुशल बरामद कर माता-पिता को सौंप दिया।
इस बच्चे की मासूम जिद और साहस की कहानी ने हर किसी का दिल छू लिया है। Oneindia Hindi को एक्सक्लूसिव बातचीत में बच्चे को सकुशल बरामद करने वाले, मोहान रोड चौकी प्रभारी सचिन कौशिक ने पूरी घटना सिलसिलेवार बयां की। आइए विस्तार से जानते हैं क्या-क्या हुआ?

मां की डांट, मासूम चला शिकायत करने!
लखनऊ के पिंक सिटी, बुद्धेश्वर के रहने वाले सर्राफ की धनियामहरी पुल के पास ज्वैलरी की दुकान है। उनका बेटा विराट पारा के एक स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ता है। 20 अगस्त को विराट ने अपनी मां से किताब के लिए 100 रुपये मांगे। मां ने डांटते हुए कहा, 'तुम पढ़ाई तो करते नहीं, जब पापा आएंगे तब रुपये मिलेंगे।' इस डांट से नाराज विराट ने दोपहर 4:15 बजे अपनी रेंजर साइकिल उठाई और घर से गुस्से में निकल गया। सीधे निकल पड़ा मथुरा की ओर। उसके मन में बस एक ही ख्याल था कि वह वृंदावन जाकर प्रेमानंद महाराज से अपनी शिकायत करेगा।
बेटा अचानक घर से गायब हो गया। घरवालों ने सोचा कि वह दोस्तों के पास गया होगा, लेकिन जब देर रात तक वापस नहीं लौटा तो सबकी सांसें थम गईं। खोजबीन शुरू हुई, पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई और फिर जो कहानी सामने आई उसने हर किसी को हैरान कर दिया। विराट ने पुलिस को बताया, 'मुझे मां की डांट अच्छी नहीं लगी। मैं प्रेमानंद महाराज का बहुत बड़ा भक्त हूं। मैंने सोचा, उनसे मिलकर अपनी बात कहूंगा।' उसने मां के मोबाइल पर लखनऊ से मथुरा की दूरी सर्च की और 'राधा-राधा' जपते हुए वृंदावन की ओर चल पड़ा।

150 KM का साहसिक सफर
विराट का यह सफर आसान नहीं था। उसने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 70 किलोमीटर तक साइकिल चलाई। काकोरी के रेवरी टोल प्लाजा के CCTV में वह साइकिल चलाते दिखा। बांगरमऊ कट पर मासूम ने ट्रक वाले से लिफ्ट भी ली। अपनी साइकिल लादकर आगरा पहुंचा। वहां से उसने यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते साइकिल से वृंदावन तक का सफर तय किया। रास्ते में उसने अपनी शर्ट उतारकर साइकिल के हैंडल पर बांध ली और 'राधा-राधा' जपते आगे बढ़ता रहा।
पुलिस का रेस्क्यू ऑपरेशन सफल, मासूम को सकुशल परिवार को सौंपा
विराट के देर रात तक घर न लौटने पर परिजनों ने पारा थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज की। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (वेस्ट) विश्वजीत श्रीवास्तव के निर्देश पर मोहान रोड चौकी प्रभारी सचिन कौशिक ने दो टीमें बनाईं। सचिन कौशिक वनइंडिया से खास बातचीत में बताते हैं कि पुलिस ने 100 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले। शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय के पास बीहोप हॉस्पिटल के CCTV में विराट साइकिल चलाते दिखा। इसके बाद बांगरमऊ और यमुना एक्सप्रेसवे के फुटेज ने उसकी दिशा का पता दिया।
23 अगस्त को पुलिस वृंदावन के एक धर्मशाला तक पहुंची, जहां विराट खाना खा रहा था। मासूम को सकुशल बरामद किया। उसने पुलिस को बताया कि वह अपनी मां की डांट से आहत था और प्रेमानंद महाराज से मिलकर अपनी बात कहना चाहता था। पुलिस ने उसे लखनऊ लाकर परिजनों को सौंप दिया।
'बेटे के लिए फूट-फूट कर रोई मां'
विराट की मां ने रोते हुए कहा, 'मैंने उसे सिर्फ पढ़ाई के लिए डांटा था। मुझे नहीं पता था कि वह इतना दूर चला जाएगा। जब वह घर नहीं लौटा, तो हम डर गए। भगवान का लाख-लाख शुक्र है कि मेरा बेटा सुरक्षित है।' पुलिस को मां ने बताया कि विराट प्रेमानंद महाराज के वीडियो देखता था और अक्सर उनसे मिलने की बात करता था। विराट के पिता ने कहा, 'पुलिस का बहुत शुक्रिया। मेरे बेटे को सही सलामत लौटाया। अब हम उसका ज्यादा ध्यान रखेंगे।'
एक्सप्रेसवे पर साइकिल: यूपीडा की चूक
विराट ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 70 किलोमीटर साइकिल चलाई, जबकि यूपी एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) ने एक्सप्रेसवे पर साइकिल चलाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। फिर भी, विराट बांगरमऊ तक पहुंच गया, और टोल कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। सुरक्षा अधिकारी आरके सिंह चंदेल ने कहा, 'यह गंभीर चूक है। हम जांच कर रहे हैं कि कर्मचारियों ने इसे कैसे नजरअंदाज किया। दोषियों पर कार्रवाई होगी।'
क्या है सबक?
विराट की यह कहानी मासूम भक्ति, साहस, और माता-पिता के साथ संवाद की कमी को दर्शाती है। एक बच्चे का 150 किलोमीटर का साहसिक सफर न केवल उसकी जिद को दिखाता है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि बच्चों की भावनाओं को समझने में परिवार कितना पीछे रह जाता है। लखनऊ पुलिस की तत्परता ने विराट को सुरक्षित घर लौटाया, लेकिन यह घटना हर माता-पिता के लिए एक सबक है कि बच्चों की छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देना कितना जरूरी है।
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