लोकसभा चुनाव 2024: यूपी में भाजपा और सपा के लिए क्यों बेहद अहम हैं रालोद नेता जयंत चौधरी?
Lok Sabha elections 2024: लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी इंडिया गठबंधन एक बार फिर हिचकोले खा रहा है। पश्चिम बंगाल, बिहार के बाद दावा किया जा रहा है कि अब ये विपक्षी गठबंधन में टूट की बयार उत्तर प्रदेश पहुंच चुकी है।

दावा किया जा रहा है कि यूपी में समाजवादी पार्टी के गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) प्रमुख जयंत चौधरी उन्हें छोड़कर भाजपा का हाथ थाम कर एनडीए में जल्द शामिल होने जा रहे हैं। हालांकि जयंत चौधरी ने इसके बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
बता दें अखिलेश यादव से लेकर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एक ओर जयंत चौधरी सपा और इंडिया गठबंधन से अलग ना हो इसलिए उनकी मान-मनौव्वल करने में जुटे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर भाजपा का शीर्ष नेतृतव भी राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख जयंत चौधरी को एनडीए गठबंधन में शामिल करने के लिए बेचैन नजर आ रही है।
आइए ऐसे में जानते हैं कि आखिर जयंत चौधरी को लेकर सपा और भाजपा आरएलडी के बीच घमासान क्यों मचा हुआ है। सपा जयंत चौधरी को क्यों नहीं खोना चाहती और लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा क्यों जयंत चौधरी पर डोरे डाल रही है।
सपा और इंडिया गठबंधन के लिए क्यों अहम हैं?
राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) समाजवादी पार्टी की एक महत्वपूर्ण सहयोगी पार्टी है। जयंत के एनडीए में शामिल होने से 'इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस' (इंडिया) से भी बड़ा झटका समाजवादी पार्टी को लगेगा। सपा के लिए ये बड़ा नुकसान इसलिए होगा क्योंकि सपा ने आरएलडी के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 202 लड़ा था जिसमें 111 सीटें जीती थीं और 9 सीटों पर जयंत चौधरी की आरएलडी ने सीटें जीती थी।
पश्चिम यूपी जहां पर आरएलडी के कारण सपा की मजबूत पकड़ है, लेकिन आरएलडी के साथ छोड़ने से सपा के वोटरों के बीच सहीं संदेश नहीं जाएगा, जिसका खामियाजा लोकसभा चुनाव में उसे भुगतना पड़ सकता है। ये ही कारण है कि सपा मुखिया अखिलेश यादव, डिंपल यादव और शिवपाल सिंह यादव ने जहां आरएलडी और बीजेपी के गठबंधन को भाजपा के द्वारा फैलाई गई अफवाह साजिश बताया।
वहीं अखिलेश यादव जिन्होंने जयंत की आरएलडी को 7 सीटें आगामी चुनाव में ऐलान करके जयंत चौधरी को नाराज कर दिया था, अब वो ही उन्हें मनाने में जुटे हुए हैं। हालांकि ये भी दावा किया जा रहा है कि जयंत कुमार अधिक सीटें पाने के लिए ये सब करके दबाव बना रहे हैं।
जयंत चौधरी के साथ आने से भाजपा को क्या होगा लाभ?
वहीं भाजपा की बात की जाए तो पश्विमी यूपी जिसे जाटलैंड के नाम से भी जाना जाता है, वहां पर जयंत चौधरी के राजनीतिक दल आरएलडी की पकड़ मजबूर है। पश्विम यूपी में कुल 27 लोकसभा सीटें हैं जिनमें 22 जाट बहुल्य वोटरों वाली सीटें हैं। इन सीटों पर जाट वोटर ही निर्णायक भूमिका निभाते है।
बता दें 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्विम यूपी की कुल 27 में से 19 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी, जिनमें जाट बहुल्य पश्विम यूपी की कुल 27 में से 19 सीटों पर जीत हासिल की थी।वहीं सपा ने बहुजन समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर कुल 8 सीट पर जीत हासिल की थी।
इस चुनाव के बाद सपा-बसपा का गठबंधन टूट गया था और 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में सपा ने जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी से दोस्ती कर ली थी जिसकी बदौलत सपा को पश्चिम यूपी में सीटों पर जीत मिली थी।
इन वोटरों को भी साधने की है भाजपा की तैयारी
यूपी में वर्तमान सयम में भाजपा मजबूत स्थित में है और भाजपा के यूपी की 80 में से 62 सीटों पर जीत की भविष्यवाणी ओपिनियन पोल में भी हो चुकी है। ऐसे में जयंत चौधरी को लेकर पश्चिम यूपी में भाजपा कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती है।
जयंत चौधरी को एनडीए में शामिल करके जाटलैंड के वोटरों का वोट चाहती है साथ ही पश्विम यूपी के उन नाराज किसानों को भी लोकसभा चुनाव 2024 से पहले मनाना चाहती है जिन्होंने मोदी सरकार द्वारा लागू किए गए संसोधित किसान कानून का जमकर विरोध किया था। उन्होंने संसोधित किसान कानून को रद्द करवाने के लिए यूपी, दिल्ली समेत देश भर में महीनों धरना-प्रदर्शन किया था, जिसके आगे मोदी सरकार को झुककर किसान कानून वापस लेना पड़ा था।
जयंत चौधरी को क्या होगा लाभ
वहीं बात करें एनडीए गठबंधन में शामिल होने से जयंत चौधरी के फायदे की तो भाजपा के साथ आने से आरएलडी को गवांई हुई मथुर लोकसभा सीट के साथ अन्य जाट बहुल क्षेत्रों की सीटों पर खोई जमीन वापस मिल जाएगा जिसे 2019 में भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ने के बाद गवां दी थी।
भाजपा ने दिया है ये ऑफर
गौरतलब है कि खबरों के अनुसार जयंत चौधरी को भाजपा ने 4 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ने का ऑफर दिया है और जयंत चौधरी की आरएलटी प्रवक्ता ने कहा कि हमने तो 12 लोकसभा सीटों पर लोकसभा सीटें जीतने की तैयारी की है। खैर अब देखना ये रोचक होगा कि आगामी लोकसभा चुनाव में जयंत चौधरी सपा या भाजपा किसका हाथ थामकर आगे बढ़ते हैं।
ये भी पढ़ें- आज हुए लोकसभा चुनाव तो यूपी में भाजपा और सपा को मिलेंगी कितनी सीटें? क्या होगा 'पंजा' और 'हाथी' का हाल?












Click it and Unblock the Notifications