Lok Sabha Election: बसपा में क्या हो रहा है, सांसद क्यों छोड़ रहे हैं मायावती का साथ?
लोकसभा चुनावों के लिए तारीखों की घोषणाओं का समय नजदीक आ गया है। राजनीतिक दलों ने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान भी शुरू कर दिया है। लेकिन, यूपी में बहुजन समाज पार्टी पलायन का संकट झेल रही है। इसके बड़े नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं। फिलहाल यह सिलसिला रुकता नजर नहीं आ रहा है।
बसपा छोड़कर जाने वालों में सबसे ताजा नाम पार्टी के अंबेडकर नगर लोकसभा क्षेत्र के सांसद रितेश पांडे का है, जो बीजेपी में शामिल हुए हैं। पांडे की शिकायत है कि वह काफी कोशिशों के बावजूद पार्टी नेतृत्व से बात नहीं कर पा रहे थे और मायावती से भी मिल पाना मुमकिन नहीं हो रहा था।

दूसरा विकल्प तलाश रहे हैं बसपा के कई सांसद
2019 के लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन में रहकर बीएसपी ने यूपी की 10 सीटें जीती थी। उनमें से 4 सांसद या तो बसपा छोड़ चुके हैं या स्पष्ट संकेत दे चुके हैं कि वह नया विकल्प तलाशेंगे।
बीएसपी के दो और सांसदों के जल्द पाला बदलने की अटकलें हैं। इनमें से एक पश्चिमी यूपी के सांसद हैं, जो अब अपना भविष्य जयंत चौधरी के राष्ट्रीय लोक दल में देख रहे हैं। आरएलडी हाल ही में भाजपा के साथ आ चुका है।
यूपी की लालगंज सीट से बसपा सांसद संगीता आजाद के भी भाजपा में शामिल होने की चर्चा है। उन्हें उनके पति के साथ बजट सत्र के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दफ्तर के बाहर देखे जाने से इन कयासों को और हवा मिली है।
अफजाल अंसारी को सपा ने घोषित किया है उम्मीदवार
इसी महीने समाजवादी पार्टी ने गाजीपुर के बीएसपी सांसद अफजाल अंसारी को उसी सीट से अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाने की घोषणा की है। पिछली बार अंसारी ने जम्मू और कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा को हराया था।
दानिश अली की बढ़ गई है कांग्रेस से दोस्ती
अमरोहा से बसपा के एक और चर्चित सांसद हैं दानिश अली। मायावती ने उन्हें पहले ही टीएमसी के पूर्व सांसद महुआ मोइत्रा के रिश्वत के बदले प्रश्न पूछने के मामले में उनका समर्थन करने के लिए निलंबित कर दिया था।
दानिश का लगभग साफ है कि उनके लिए कांग्रेस पार्टी का दरवाजा खुला है। वह राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में भी शामिल हो चुके हैं।
जौनपुर के बसपा सांसद श्याम सिंह यादव ने भी कांग्रेस की यात्रा में शिरकत करके अपना इरादा साफ कर दिया है। वह मुलायम सिंह यादव के जन्मदिवस से जुड़े कार्यक्रमों में भी भाग ले चुके हैं।
बीएसपी के कुछ और सांसदों के भाजपा नेताओं के संपर्क में होने की चर्चा
जानकारी के मुताबिक बसपा के कई और सांसद जिन्हें भाजपा के साथ अपना राजनीतिक भविष्य ज्यादा सुरक्षित नजर आता है, वह पार्टी महासचिव सुनील बंसल के संपर्क में हैं।
बसपा मीडिया पर फोड़ना चाह रही है ठीकरा
वहीं मायावती की ओर से यह बताने की कोशिश की जा रही है कि असल में दूसरी पार्टियों में भविष्य तलाश रहे पार्टी सांसदों को बीएसपी में अपना टिकट असुरक्षित लग रहा है।
क्योंकि, उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्रों में काम नहीं किया है। इसलिए बसपा को लगता है कि मीडिया का यह कहना कि बीएसपी कमजोर हुई इसलिए नेता पार्टी छोड़ रहे हैं, सही नहीं है।
लोकसभा में बसपा के सदन के नेता गिरिश चंद्रा का कहना है कि 'जिन्होंने पार्टी छोड़ी है या जिनकी ऐसा करने की योजना है, वह अपने हित में ऐसा कर रहे हैं।' उनके मुताबिक 'इससे पार्टी पर कोई भी असर नहीं पड़ेगा।'
नेता-सांसद क्यों छोड़ रहे हैं मायावती का साथ?
राजनीति के ज्यादातर जानकारों को लगता है कि बीएसपी में मची इस उथल-पुथल के पीछे बसपा का विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक से दूरी बनाकर चलने की नीति है।
ऊपर से बसपा सुप्रीमो मयावती जिस तरह से राजनीतिक तौर पर ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आ रही हैं, उससे भी सांसदों को विकल्प तलाशने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
पिछले दो चुनावों में यूपी में बसपा का प्रदर्शन
2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी में बसपा अकेले लड़ी थी और उसे एक भी सीट नहीं मिली थी। तब उसका वोटर शेयर 19.77% रहा था। 2019 में उसने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा और 10 सीटें जीत गई। पिछले चुनाव में उसका वोट शेयर 19.4% था।












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