UP में कम बारिश बनी किसानों के लिए संकट, जानिए सरकार पर क्यों बन रहा ये बड़ा दबाव

लखनऊ, 19 अगस्त: उत्तर प्रदेश में इस साल औसत से कम बारिश होने की वजह से सूखे का संकट मंडराया हुआ है। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए सरकार अपनी तैयारी शुरू कर चुकी है। हालांकि सरकार की तरफ से अभी तक सूखे का ऐलान नहीं किया गया है लेकिन अब यूपी के सांसद और विधायक भी योगी को पत्र लिखकर कई जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग उठाने लगे हैं। हालांकि सरकार इस बात का अध्ययन करने में जुटी है कि किन किन जिलों को इसमें शामिल किया जाए। सरकार जल्द ही इसपर कोई अंतिम फैसला ले सकती है।

योगी आदित्यनाथ

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद हरीश द्विवेदी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बस्ती और पूर्वी यूपी को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है। राज्य के बड़े हिस्से में कम बारिश के मद्देनजर मांग करने वाले यूपी के दूसरे नेता हैं।

कम बारिश की वजह से धान की बुवाई प्रभावित

द्विवेदी ने कहा कि कम वर्षा के कारण धान की बुवाई नहीं कर पाने के कारण किसान तनाव में हैं। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में, बस्ती लोकसभा सासंद ने कहा कि राज्य को पूर्वी यूपी के बस्ती और अन्य जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करना चाहिए क्योंकि या तो किसान धान की बुवाई नहीं कर पाए हैं या मौसम की स्थिति के कारण बीज सूख गए हैं। सिंचाई सुविधा का अभाव।

विधायक वीर विक्रम सिंह ने भी उठाई आवाज

इससे पहले यूपी के शाहजहांपुर जिले की कटरा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक वीर विक्रम सिंह ने इससे पहले शाहजहांपुर जिले के लिए भी इसी तरह का अनुरोध किया थ। उन्होंने कहा था कि कम वोल्टेज बिजली आपूर्ति के कारण किसानों को नलकूपों के संचालन में परेशानी हो रही है। सिंह ने कहा कि राज्य सरकार को जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर उनकी मदद करनी चाहिए और राहत कार्य शुरू करना चाहिए।

पूर्वी और पश्चिमी यूपी में हुई कम बारिश

इस बीच मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 16 अगस्त तक इस मानसून में 45% कम बारिश हुई है। यूपी के लिए सामान्य माने जाने वाले 488.9 मिमी की तुलना में, राज्य में 270.88 मिमी बारिश हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, 16 अगस्त तक पूर्वी यूपी में 47 फीसदी कम बारिश हुई जबकि पश्चिमी यूपी में 40 फीसदी कम बारिश हुई।

सीएम ने दिए थे किसानों से सम्पर्क करने के निर्देश

जुलाई के अंत में हुई एक समीक्षा बैठक में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को बारिश में कमी से निपटने के लिए एक कार्य योजना तैयार करने और सभी जिलों में कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि वैज्ञानिकों के माध्यम से किसानों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने का निर्देश दिया ताकि सही जानकारी दी जा सके।

इन जिलों में हुई कम बारिश

जानकारी के अनुसार हालांकि अमेठी, बहराइच, बलिया, बांदा, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, फतेहपुर , गोंडा, जौनपुर, कानपुर देहात, कौशांबी, कुशीनगर, महाराजगंज, मऊ, रायबरेली, संतकबीरनगर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, बागपत, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, ज्यातिबाबाई फुलेनगर, महोबा, मुरादाबाद, रामपुर, शाहजहांपुर ऐसे जिले हैं, जहां पर औसत बारिश से पचास प्रतिशत से भी कम वर्षा हुई है।

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