लखीमपुर हिंसा: प्रियंका गांधी बोलीं- यूपी पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है
लखीमपुर खीरी
नई दिल्ली, अक्टूबर 04: यूपी के लखीमपुर खीरी में रविवार को हुई हिंसा में पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। कई राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लिया गया है। नेताओं को तिनुकिया गांव की यात्रा करने से रोका गया है। जहां प्रदर्शनकारी किसानों और केंद्रीय राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे के काफिले के बीच घातक झड़प हुई थी। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को लखनऊ में नजरबंद रखा गया था, लेकिन सोमवार को वो लखीमपुर खीरी निकलने में कामयाब रहीं। हालांकि बाद में उन्हें यूपी पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

इंडिया टुडे के मुताबिक, प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि उनके वाहन को उत्तर प्रदेश पुलिस ने सीतापुर और लखीमपुर खीरी के बीच की सीमा पर रोका था। उस कार में दीपेंद्र सिंह हुड्डा सहित हम पांच लोग थे। हमारे साथ और कोई कार नहीं थी। पुलिस वाले हमारी कार की चाबियां ले गए और हमसे कहा कि हम कहीं नहीं जा सकते हैं और उनके साथ जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कर्मियों ने उनके साथ आए कांग्रेस नेताओं के साथ धक्का-मुक्की और अभद्रता की।
प्रियंका गांधी ने कहा कि, उन्होंने [पुलिस] ने मुझे कारों के अंदर घुसाने की कोशिश की। मैंने उनसे कहा कि वे पुलिस हो सकते हैं लेकिन बिना गिरफ्तारी वारंट या कानूनी नोटिस के मुझे हिरासत में लेने का कोई आधार नहीं है। हम धारा 144 का उल्लंघन भी नहीं कर रहे थे। मैंने उनसे [पुलिस] कहा कि मुझे एक कार में भरकर बिना किसी कानूनी नोटिस के कहीं ले जाना अपहरण के समान होगा।
प्रियंका ने कहा कि, उन्होंने मुझे बताया कि मुझे धारा 151 [सीआरपीसी] के तहत हिरासत में लिया जा रहा है। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि दो महिलाएं और दो पुरुष कांस्टेबल उन्हें सीतापुर में प्रांतीय सशस्त्र पुलिस (पीएसी) गेस्ट हाउस ले गए, जहां उन्हें अभी भी रखा गया है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, मैं तब से यहां हूं। मुझे उस धारा के बारे में नहीं बताया गया है जिसके आधार पर मुझे हिरासत में रखा जा रहा है।
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प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि, हिंसा हिंसा होती है। मैंने इसे अपने जीवन में कई बार देखा है। जो कुछ भी हुआ वह गलत है, चाहे वह किसानों के साथ हो या किसी और के साथ। वे शांति से विरोध कर रहे थे और इस मंत्री के बेटे ने आकर उन्हें कुचल दिया, लोगों गुस्से में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका गए लेकिन दिल्ली की सीमाओं पर केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध कर रहे सैकड़ों किसानों से नहीं मिल सके।












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