किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय करेगा सबसे खराब शिक्षक की घोषणा, फैसले का हो रहा विरोध
किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय अमूमन विवादों का हिस्सा बना रहता है। कभी अपने नाम को लेकर तो कभी छात्रों को पास और फेल करने के विषय में। इस बार मुद्दा ऐसा है, जो शायद ही कभी हुआ हो।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय (KGMU) ने ऐसा ऐलान कर दिया, जिससे यहां के प्राध्यापक के कान खड़े हो गए। इतना ही नहीं KGMU की ओर से घोषणा करने के बाद यहां के प्राध्यापक आंदोलित हो गए हैं। बता दें कि KGMU ने घोषणा की है कि वो शनिवार को अपने स्थापना दिवस के दिन छात्रों के फीडबैक के आधार पर 'सबसे खराब प्राध्यापक' की घोषणा करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले का KGMU टीचर्स एसोसिएशन ने कड़ा विरोध करते हुए कानूनी कार्यवाही करने की धमकी दी है। एसोसिएशन ने पहले ही लिखित में विश्वविद्यालय प्रशासन को इस फैसेले के संबंध में अपना विरोध जाहिर कर दिया है। बीते दो सालों से 5 सितंबर, शिक्षक दिवस के सबसे अच्छे प्राध्यापक चुने जाने वाले प्रोफेसर कौसेर उस्मान ने कहा कि यह किसी शिक्षक की प्रोफाइल पर बड़ा दाग होगा, इसे कैसे सुधार सकते हैं?
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ऐसे आया ये आईडिया
वहीं KGMU के वाइस चांसलर प्रोफेसर रविकांत ने इस फैसले को सही बताते हुए कहा कि यह जरूरी कदम था, ताकि फैकेल्टी ज्यादा मेहनत करे और भयभीत हो कर काम करे। कहा कि यह आईडिया सातवें वेतन आयोग के इंक्रीमेंट पैटर्न को ध्यान में रख कर आया, जिसमें कहा गया है कि अच्छा काम करने वालों को ही प्रोन्नति मिलेगी। प्रो. रविकांत ने कहा कि इससे स्टाफ के बीच असंतोष उत्पन्न होगा लेकिन KGMU अपने स्टाफ को यह बताएगा कि आप अच्छा काम नहीं कर रहे हैं और लायक नहीं है।
बता दें KGMU का गठन 1911 में हुआ था। 1911 से 2002 तक यह मेडिकल कॉलेज था। साल 2007 से 2012 तक KGMU छत्रपति शाहू जी महाराज मेडिकल यूनिवर्सिटी नाम से जाना जाता रहा। इस विश्वविद्यालय के नाम को लेकर भी राज्य के दो दलों के बीच काफी गहमागहमी का माहौल रहा। बहुजन समाज पार्टी जब सत्ता में रही तो इसका नाम छत्रपति शाहू जी महाराज मेडिकल यूनिवर्सिटी था, वहीं 2012 में समाजवादी पार्टी के सत्ता में आने के बाद इसका नाम फिर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी कर दिया गया।
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