केशव प्रसाद मौर्या को हार के बावजूद बनाया गया डिप्टी सीएम, क्यों कटा दिनेश शर्मा का पत्ता
लखनऊ, 25 मार्च । यूपी में शुक्रवार को इकाना स्टेडियम में योगी और उनकी नई कैबिनेट के मंत्रियों ने शपथ ली। वहीं चुनाव में सिराथू सीट से हारने के बावजूद केशव प्रसाद मौर्या को दोबारा डिप्टी सीएम की कुर्सी पर बिठा दिया गया वहीं दिनेश शर्मा का पत्ता कट करके भाजपा ने योगी की पिछली सरकार में कानून मंत्री रहे बृजेश पाठक को डिप्टी सीएम बना दिया। आखिर ऐसी क्या वजह है कि हारने वाले मौर्या को डिप्टी सीएम बने और दिनेश शर्मा को क्यों इस सरकार में डिप्टी सीएम क्या मंत्रीमंडल तक में शामिल नहीं किया गया है?

हार के बावजूद क्यों मौर्या को बनाया गया डिप्टी सीएम
बात अगर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या की बात करें तो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में सक्रिय रहने के बाद भाजपा में एंट्री लेने वाले मौर्या पिछड़ी जाति का बड़ा चेहरा हैं। भाजपा में पिछड़ी जाति को भाजपा के पक्ष में करने में मौर्या की प्रमुख भूमिका रही है । 2024 में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं इसको टॉरगेट करते हुए मौर्या को ये पद हार के बावजूद दिया गया है। 2022 विधानसभा चुनाव में मौर्या ने जिस प्रकार चुनाव मैनेजमेंट किया उसको ध्यान में रखते हुए उन्हें ये पद दिया गया है।
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भाजपा में कद्दावर नेता और पिछड़ों का बड़ा चेहरा
विश्व हिंदू परिषद नेता अशोक सिंघल के करीबी केशव प्रसाद मौर्य भाजपा में कद्दावर नेता ने 2012 जब प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की थी तब मौर्या अकेले मंडल की सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा को जीत दिलाकर इकलौते विधायक बने थे। राष्ट्रवादी और हिंदुत्ववादी छवि वाले इस नेता ने बड़ी संख्या में भाजपा में पिछड़ों को शामिल करवाया है। अगर 2022 में अगर उनके सिराथू से चुनाव हारने की बात की जाए तो डिप्टी सीएम होने के नाते वो अन्य जगहों पर चुनाव प्रचार करने के चक्कर में अपनी सीट पर प्रचार पर ध्यान नहीं दे पाए और सपा की डॉ. पल्लवी पटेल से 7, 377 वोटो से हार गए। दोबारा डिप्टी सीएम बनने पर उनके सपोर्टस फूले नहीं समा रहे हैं।

दिनेश शर्मा को क्यों नहीं बनाया गया डिप्टी सीएम
वहीं पिछली सरकार में डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा की बात की जाए तो उनकी छवि सीधे-साधे नेता की रही है,ब्राह्मणों को साधने के लिए पिछली सरकार में उन्हें डिप्टी सीएम बनाया गया था लेकिन पिछली सरकार के कार्यकाल में कई ऐसे मौके आए जब वो ब्राह्मणों के हितैषी नहीं नजर आए। वहीं उनकी तुलना में बृजेश पाठक एक तेज तर्रार नेता और जनता के प्रिय नेता है।

बृजेश पाठक को क्यों बनाया गया डिप्टी सीएम
बसपा में रहते हुए उन्होंने बड़ी संख्या में दलितों की पार्टी से ब्राह्मण वोटरों को रिझाकर ये साबित कर दिया था कि उनमें कितना दम हैं। लखनऊ से विधायक बने बृजेश पाठक को डिप्टी सीएम बनाने के पीछे भी उनका जनप्रिय होना तो है ही साथ 2024 के लिए भाजपा की जमीन को मजबूत करना है।












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