किसान आंदोलन से बैकफुट पर आई BJP क्या चुनाव का रुख मोड़ना चाहती है, जानिए केशव के बयान के मायने
लखनऊ, 02 दिसंबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के एक ट्वीट ने यूपी की सियासत में उबाल पैदा कर दिया। माना जा रहा है कि किसान आंदोलन से बैकफुट पर आई योगी सरकार अब जनता के सामने नया एजेंडा सेट करना चाहती है। अयोध्या में मंदिर निर्माण के बाद अब काशी में विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मंस्जिद विवाद और मथुरा में मंदिर-ईदगाह विवाद भी अब चुनावी मुद्दा बनेगा। अयोध्या में जैसे जैसे राम मंदिर का निर्माण हो रहा है वैसे वैसे उस मुद्दे की धार कुंद होती दिख रही है इसलिए बीजेपी इस चुनाव में अब काशी और मथुरा के एजेंडे के साथ चुनाव में जाना चाहती है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने यह बयान बीजेपी की सोची समझी रणनीति के तहत ही दिया है जिसका दूरगामी परिणाम देखने को मिलेगा।

बुधवार को उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव को लेकर लहरें पैदा कर दीं, जो कुछ ही घंटों में तूफान में बदल गई। केशव प्रसाद ने लिखा- 'अयोध्या काशी भव्य मंदिर निर्माण हो रहा है, मथुरा की तैयारी कर रहा है...' साथ ही हैश टैग- 'जय श्री राम, जय शिव शंभू, जय श्री राधे-कृष्ण।' इसे भगवा एजेंडे का संकेत माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि विधानसभा चुनाव में मथुरा भी एक मुद्दा बन सकता है।
'राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे...!'
राम मंदिर आंदोलन के साथ देश और राज्य की राजनीति को बड़ा घटनाक्रम दिखाने वाला यह संकल्प अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के साथ सिद्धि की राह पर है, इसलिए अब एक बार फिर राजनीति एक नई राह पर चलती नजर आ रही है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के ट्वीट, '...अब मथुरा की तैयारी' में यही अर्थ लिया जा रहा है कि अयोध्या विध्वंस की बरसी (6 दिसंबर) से ठीक पहले श्रीकृष्ण जन्मस्थान मुद्दे को धार देने के प्रयास शुरू हो गए हैं।

पिछले दो चुनावों से करवट ले रही यूपी की की सियासत
दरअसल, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद से उत्तर प्रदेश की सियासत ने भी करवट ली है। दशकों से अयोध्या से पर्याप्त दूरी बनाकर खुद को 'धर्मनिरपेक्ष' कहने वाले गैर-भाजपा दलों के नेताओं ने धीरे-धीरे हिंदुत्व की ओर एक कड़ा कदम उठाया है। बीजेपी पर भगवान राम के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाने के साथ-साथ सपा प्रमुख अखिलेश यादव कई बार भगवान कृष्ण को अपना आराध्य कहते रहे हैं। वह मथुरा, चित्रकूट समेत कई धार्मिक स्थलों पर गए, वहां से राजनीतिक कार्यक्रम शुरू किए।
इसी तरह कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंदिर-मंदिर का दर्शन करना शुरू कर दिया और बसपा ने भी ब्राह्मणों को लुभाने के लिए अयोध्या से प्रबुद्ध सम्मेलनों की शुरुआत की. हाल ही में आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी रामलला का दर्शन करने पहुंचे थे। हालांकि केशव के इस बयान पर सपा चीफ अखिलेश यादव ने कहा कि, ''बीजेपी का गरीबों को लूटने और अमीरों की जेब भरने का एजेंडा है, उसने हमेशा अमीरों को फायदा पहुंचाने का काम किया है। कोई भी रथ यात्रा या मंत्र आगामी चुनावों में भाजपा की मदद करने वाला नहीं है।''

अशोक सिंहल के करीबी रहे हैं केशव मौर्या
उल्लेखनीय है कि ढांचा गिराए जाने की बरसी से महज पांच दिन पहले मौर्य का बयान इसलिए अहम माना जाता है क्योंकि वह विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महासचिव अशोक सिंहल के नेतृत्व में मंदिर आंदोलन में सक्रिय भागीदार रहे हैं। मथुरा इन दिनों सुर्खियों में है। मथुरा इन दिनों ढांचे को तोड़े जाने की बरसी को लेकर चर्चा में है। 6 दिसंबर को कुछ संगठन शाही मस्जिद ईदगाह पर लड्डू गोपाल का जलाभिषेक करना चाहते थे। मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर ने भी कहा है कि उन संगठनों ने धारा 144 लागू होने के कारण अपने कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। कुछ को प्रतिबंधित भी किया गया है।
अयोध्या की तरह संवेदनशील है मथुरा भी
योगी सरकार के धार्मिक-सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के एजेंडे में कई तीर्थ शामिल हैं, लेकिन एक ही परिसर में मंदिर और मस्जिद होने की स्थिति मथुरा को अयोध्या जितना संवेदनशील बनाती है। 1832 से चल रहा है श्रीकृष्ण जन्मस्थान का विवाद मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मस्थान का परिसर 13.37 एकड़ का है। इसी में शाही मस्जिद ईदगाह भी है। मंदिर के पक्षकारों का दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर को ध्वस्त कर दिया था और यहां एक मस्जिद का निर्माण किया था। 1832 में इस मामले में पहली सुनवाई जिला कलेक्टर के दरबार में हुई। हालाँकि, 1968 में, श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही मस्जिद ईदगाह समिति के बीच यथास्थिति बनाए रखने के लिए एक समझौता हुआ। फिर उस समझौते को चुनौती देने वाले सभी मुकदमे कोर्ट में दाखिल किए जा चुके हैं।

अयोध्या में चल रहा मंदिर का निर्माण
दरअसल, 2003 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा 15 साल तक राज्य की सत्ता से बाहर रही। मंडल की राजनीति कमंडल की राजनीति पर हावी रही। 2014 से शुरू हुए एक सफल कार्यकाल के बाद बीजेपी ने हर चुनाव में हिन्दुत्व को अपना कोर मुद्दा बनाए रखा जिसका उसे फायदा भी मिला। आने वाले समय में ये मुद्दा और गरम होगा और हिन्दुत्व के सहारे लोगों को साधने की कोशिश होगी। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से चल रहा है और अब भाजपा सरकार द्वारा इसे एक प्रमुख चुनावी मुद्दे के रूप में पेश किया जा रहा है, काशी-विश्वनाथ गलियारा - प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट - का उद्घाटन किया जाना है।












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