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Kashi Tamil Sangamam: काशी विश्वनाथ मंदिर से तमिलनाडु तक, काशी तमिल संगमम में जीवंत हुआ सांस्कृतिक संबंध

Kashi Tamil Sangamam: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की पहल पर आयोजित काशी तमिल संगमम का तीसरा संस्करण बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पं. ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में हो रहा है। इस कार्यक्रम में शुक्रवार को तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

उनके साथ बीएचयू के कुलपति प्रो. संजय कुमार, समाजशास्त्र विभाग की प्रो. श्वेता प्रसाद और महिला अध्ययन केंद्र की प्रो. मीनाक्षी झा भी उपस्थित रहीं। इस दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया गया। इसमें प्रो. टी. जगदीश और उनके शोधार्थियों द्वारा अनुवादित 10 बाल पुस्तकों का हिंदी संस्करण और "काशी कुंभाभिषेकम" (लेखक - सुब्बू सुंदरम और उनकी पत्नी) शामिल थीं।

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काशी-तमिलनाडु के ऐतिहासिक संबंधों पर भाषण

अपने संबोधन में राज्यपाल आर. एन. रवि ने काशी और तमिलनाडु के ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि 1801 से पहले हर साल 50,000 से अधिक तीर्थयात्री रामेश्वरम से काशी की यात्रा करते थे। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर का कुंभाभिषेक 239 वर्षों के बाद संपन्न हुआ, जो उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता को दर्शाता है।

राज्यपाल ने ब्रिटिश शासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच कृत्रिम विभाजन बनाया। उन्होंने संत तुलसीदास, उनके गुरु रामानंद और उनके गुरु रामानुजाचार्य का उल्लेख किया, जिन्होंने भक्ति आंदोलन के माध्यम से पूरे भारत को एक किया।

"एक भारत, श्रेष्ठ भारत" की अवधारणा पर बल

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत एक जीवंत सभ्यता है, जहाँ 'एक राष्ट्र, एक परिवार' की अवधारणा सदियों से जीवित है। उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए महिला नेतृत्व को बढ़ावा देना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि मुद्रा योजना और जन धन योजना जैसी सरकारी पहलों से महिला उद्यमिता को समर्थन मिला है। 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए वित्तीय समावेशन और महिला सशक्तिकरण महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम की शुरुआत और महत्वपूर्ण घोषणाएँ

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गान और बीएचयू कुलगीत से हुई। इसके बाद माँ सरस्वती, महामना मदन मोहन मालवीय और पं. ओंकारनाथ ठाकुर की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। बीएचयू के कुलपति प्रो. संजय कुमार ने अपने संबोधन में बीएचयू को "लघु भारत" बताते हुए कहा कि यहाँ विभिन्न क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिलते हैं।

उन्होंने आदि शंकराचार्य के योगदान को रेखांकित किया, जिन्होंने अपने ज्ञान और दर्शन के माध्यम से पूरे भारत को एकता के सूत्र में पिरोया। इसके अलावा, काशी तमिल संगमम पर एक वृत्तचित्र भी दिखाया गया, जिसमें तमिलनाडु और काशी की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया।

महिलाओं के उत्थान पर महत्वपूर्ण चर्चा

इस बारे में प्रो. श्वेता प्रसाद ने लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण पर विचार रखते हुए बताया कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और मिशन शक्ति जैसी योजनाओं से महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ है।

उन्होंने बताया कि भारत में पहली बार 1020 महिलाएँ प्रति 1000 पुरुषों के अनुपात को पार कर चुकी हैं। साथ ही, सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 3.25 करोड़ बैंक खाते खोले गए और पोषण अभियान के माध्यम से 10 करोड़ लाभार्थियों को सहायता मिली है।

कार्यक्रम का समापन और धन्यवाद ज्ञापन

कार्यक्रम का समापन डॉ. शन्मुग सुंदरम (वाणिज्य संकाय, बीएचयू) के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने महिला सशक्तिकरण में योगदान देने वाले सभी वक्ताओं, संगठनों और स्वयं सहायता समूहों का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेंगी।

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