अपने इलाहाबाद वाले बाहुबली के लिए कटप्पा की भूमिका में बीजेपी!
बाहुबली करवरिया बंधुओं पर मेहरबान योगी सरकार ने उन्हें वापस इलाहाबाद नैनी सेंट्रल जेल बुलाने का आदेश जारी कर दिया है...
इलाहाबाद। कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुटी योगी सरकार, मुख्तार अंसारी से लेकर अतीक तक अपनी नकेल कस रही है। बाहुबली बृजेश सिंह हों या बाहुबली मुन्ना बजरंगी सब पर शिकंजा कसने की मंशा जाहिर की जा रही है। इसीलिए दलीलें सामने ये आ रही हैं कि इन्हें नजदीकी इलाकों से दूर भेज दिया गया है। लेकिन जब बात अपने बाहुबलियों की आई तो योगी सरकार के सुर ही बदल गए।

अपने बाहुबली पर मेहरबान योगी सरकार!
बाहुबली करवरिया बंधुओं पर मेहरबान योगी सरकार ने उन्हें वापस इलाहाबाद नैनी सेंट्रल जेल बुलाने का आदेश जारी कर दिया है। याद दिला दें की विधानसभा चुनाव के दौरान पूर्व विधायक उदय भान के जेल में होने के चलते उनकी पत्नी नीलम करवरिया मेजा विधानसभा से चुनाव मैदान में उतरी थीं। करवरिया बंधुओं के वर्चस्व से सीट फिसलते देख सरकार ने करवरिया बंधुओं को इलाहाबाद से मिर्जापुर ट्रांसफर करा दिया था।

करवरिया टाइटल का नीलम पत्थर
लेकिन नीलम करवरिया की जीत के साथ ही ये तय हो गया था कि राजनीति में डूब रहे करवरिया टाइटल का खेवनहार मिल गया है! अब जब सूबे में भाजपा की सरकार है तो ऐसे में भाजपा नेताओं को लाभ मिलना तय माना जा रहा है। बीजेपी की पहली फेहरिस्त में करवरिया बंधुओं को मिर्जापुर जेल से वापस इलाहाबाद ले आया जाएगा। लेकिन ये फैसला विरोधी दलों के गले नहीं उतर रहा और योगी सरकार को निशाने पर लेने की कोशिश शुरू हो गई है।

राजनीति के तीनों दिग्गज
इलाहाबाद की राजनीति में अपने वर्चस्व के लिए ख्याति प्राप्त पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया, पूर्व विधायक उदय भान करवरिया और एमएलसी सूरज भान करवरिया कई साल से जेल में हैं। इन पर विधायक जवाहर यादव की हत्या समेत कई केस चल रहे हैं। जेल से जमानत न मिलने के चलते तीनों में से कोई चुनाव नहीं लड़ सका था। ऐसे में माना जा रहा था की अब इन बाहुबली करवरिया बंधुओं का राजनीतिक कैरियर अस्त हो जाएगा।

अतीक से 36 का आंकड़ा
इलाहाबाद की राजनीति में अतीक अहमद को करवरिया बंधुओं ने ही सीधी टक्कर दी और एक तरह से अतीक के एकछत्र राज को खत्म कर दिया था। इनका अतीक के साथ 36 का आंकड़ा जग जाहिर था। सपा सरकार में बाहुबली अतीक अहमद बाहर थे और करवरिया बंधुओं को जेल में डाल दिया गया था। अब सत्ता परिवर्तन के साथ ही अतीक की मुश्किल जहां बढ़ गई है। वहीं करवरिया बंधुओं को राहत मिलनी शुरू हो गई है। बता दें की करवरिया बंधू उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के करीबी माने जाते हैं।
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