लकवा से पिता हुए असहाय, मर्दों का सैलून खोलकर घर चला रही हैं यूपी की ये बेटियां

Uttar pradesh news, कुशीनगर। उत्तर प्रदेश में कुशीनगर जिले के पडरौना क्षेत्र में एक गांव है बनवारी टोला। इस गांव की दो बहनें हैं ज्योति और नेहा। ज्योति 18 साल की हैं और नेहा 16 की। ये दोनों बहनें दूसरी लड़कियों से काफी अलग हैं, या यूं कहें अपने माता-पिता के लिए लड़कों से भी बढ़कर हैं। इनके भाई भी नहीं हैं। दोनों अपने गांव में मर्दों का सैलून चलाती हैं। दाढ़ी बनाकर और बाल काटकर घर चला रही हैं। इनकी इस हालत के पीछे की वजह बहुत इमोशनल कर देने वाली है, जिसके चलते दोनों ने खुद को लड़कों जैसा बना लिया है।

Jyoti and Neha, Two sisters running salon in kushinagar

पिता को लकवा मारा तो संभाल लिया घर-बार
इन बेटियों के पिता हैं ध्रुव नारायण। ध्रुव नारायण की कुल छह बेटियां हैं। वह इसी गांव में दाढ़ी-बाल बनाने की छोटी सी गुमटी लगाया करते थे, जिससे हुई कमाई से ही उन्होंने अपनी चार बेटियों की शादी कराई। उसके बाद घर में ज्योति और नेहा ही रह गईं। पांच साल तक सबकुछ ठीक रहा, लेकिन 2014 में इस छोटे से परिवार पर बीमारी का कहर बरपा।

ज्योति और नेहा के पिता ध्रुव नारायण को लकवा मार गया। तब ज्योति की उम्र 13 साल थी और नेहा 11 की साल। पिता का बुरा हाल होते ही घर में खाने के लाले पड़ने लगे। मगर, ज्योति ने हिम्मत नहीं हारी। दोनों बहनों ने खुद ही मां-पिता और खुद का सहारा बनने की ठानी। बंद पड़ी दुकान फिर खोली।

उन्होंने 5 साल इतनी मेहनत की कि उनके पिता की वही छोटी दुकान सैलून बन गई। पूछे जाने पर इन बहनों ने बताया कि शुरुआती कई साल तक उन्होंने बहुत झेला। लोग मजाक उड़ाते थे। एक ओर पिता की बीमारी का इलाज चल रहा था, वहीं दूसरी ओर खुद की सुरक्षा की भी फिक्र होती थी। गांव में दाढ़ी बनाने का काम आदमी ही करते थे, हमारे तो दादा-पापा ने काम किया था। लेकिन कभी कोई लड़की भी ये काम करेगी, यह किसी ने भी हमारे गांव में नहीं सोचा था।''

बकौल ज्योति, 'इस काम के लिए उन्हें अपना पूरा गेटअप चेंज करना पड़ा। खुद ब्वॉयकट कराया, लड़कों जैसे कपड़े पहने और कुछ वैसा ही बर्ताव किया। यहां तक कि अपना नाम भी बदल लिया। फिर लोगों को भी लगने लगा कि मैं लड़की नहीं, बल्कि कोई लड़का हूं। धीरे-धीरे लोग दुकान पर आने लगे। अब हम रोज 400 रुपए तक भी कमा लेती हैं।''

बता दें कि, ज्योति और नेहा अपनी इसी कमाई से न केवल अपने पिता का इलाज करा रही हैं, बल्कि घर का खर्च भी उठा रही हैं। अब वे चाहती हैं कि बाल कटिंग से बढ़कर एक ब्यूटी पार्लर खोल लें। ताकि स्थिति और सुधरे। फिलहाल ध्रुव नारायण की तबियत में भी काफी सुधार हुआ है। वह खुद कई बार सैलून पर आ बैठते हैं। दोनों पति-पत्नियों को अपनी इन बेटियों पर गर्व हो रहा है। यहां तक कि गांव के लोग भी कहने लगे हैं कि बेटी हों तो ऐसी। नेहा और ज्योति जैसी।

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