कन्नौज में डॉक्टरों की हड़ताल, मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़
यह लापरवाही मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है। राजकीय मेडिकल कालेज के नाक, कान व गला (ईएनटी) विभाग के जनरल वार्ड में स्टाफ नर्स के इंजेक्शन लगाने के बाद 6 मरीजों की हालत बिगड़ गई।
कन्नौज। जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने के बाद कन्नौज मेडिकल कालेज के हालात खराब होते जा रहे हैं। यहां मरीजों के इलाज में लापरवाही बढ़ती जा रही है। यह लापरवाही मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है। राजकीय मेडिकल कालेज के नाक, कान व गला (ईएनटी) विभाग के जनरल वार्ड में स्टाफ नर्स के इंजेक्शन लगाने के बाद 6 मरीजों की हालत बिगड़ गई। तीन के मुंह से खून व दो को उल्टी व एक को घबराहट होने लगी। तीमारदारों ने गलत इंजेक्शन लगाने की बात कह हंगामा शुरू कर दिया। आनन-फानन में विशेषज्ञ डाक्टर ने पहुंचकर मरीजों का इलाज कर हालत संभाली।

जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने के बाद हालत यह है कि कन्नौज मेडिकल कालेज पूरी तरह से डॉक्टर विहीन हो गया है। कालेज प्रशासन ने जूनियर डॉक्टरों की गैरमौजूदगी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट से इलाज कराना शुरू कर दिया है जिसका नतीजा मरीजो को भुगतना पड़ रहा है। सीनियर डॉक्टर हमेशा नदारद रहते हैं। हम आपको बताते चलें कि राजकीय मेडिकल कालेज के ईएनटी जनरल वार्ड में 10 मरीज भर्ती हैं।

स्टाफ नर्स अंजू उमराव ने बेड हेड टिकट (बीएचटी) फाइल पर डॉक्टर के निर्देश के मुताबिक 6 मरीजों को इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन देने के कुछ मिनट बाद ड्यूटी खत्म होने से स्टाफ नर्स घर चली गई। इसके बाद सभी छह मरीजों की हालत बिगड़ गई। मरीजों की हालत बिगड़ते देख तीमारदारों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस पर डॉ.अशरफ ने सभी मरीजों की जांच के बाद उपचार किया, जिसके बाद उनकी हालत में सुधार हुआ।
जब एमबीबीएस स्टूडेंट के गलत इलाज से मरीजो की हालत बिगड़ी तो कॉलेज प्रशासन ने आनन फानन में सीनियर को बुलाकर स्थिति सम्भाली। मरीजों को क्या हुआ था, उनकी तबियत अचानक कैसे बिगड़ी, यह बताने वाला मेडिकल कालेज में कोई न मिला। जब कालेज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. दिलीप सिंह का मोबाइल मिलाया तो उनका नम्बर भी नहीं लगा। सवाल यह उठता है कि सरकार की इतनी सख्ती और नसीहतों के बाद भी सरकारी स्वाथ्य सेवाएं इतनी बदहाल क्यों हैं?












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