Jayant Chaudhary in UP: 2024 से पहले दरक रहा SP-RLD गठबंधन, जानिए कैसे मिल रहे संकेत

उत्तर प्रदेश में सभी दल अपने अपने हिसाब से सियासी गोटियां सेट करने में जुटे हैं। जयंत चौधरी के एक ट्विट के बाद अब रालोद के प्रदेश अध्यक्ष ने साफतौर पर कहा है कि 2024 में सपा के साथ गठबंधन पर पार्टी पुनर्विचार कर सकती है।

Rashtriya Lokdal: लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर जैसे जैसे माहौल गरम हो रहा है वैसे वैसे राजनीतिक दलों की एक दूसरे के प्रति प्रतिबद्धता भी दरकती दिखाई दे रही है। राष्ट्रीय लोक दल (RLD) प्रमुख जयंत चौधरी के हाल में किए गए ट्विट के बाद से ही रालोद-सपा के बीच गठबंधन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। रालोद के प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि 2024 से पहले रालोद सपा के साथ गठबंधन पर पुनर्विचार कर सकता है।

2024 में सपा के साथ गठबंधन पर पुनर्विचार

रालोद के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने सपा के साथ अपनी पार्टी के मतभेदों को व्यक्त करने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई है। राय ने कहा कि रालोद 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले सपा के साथ अपने संबंधों पर पुनर्विचार कर सकता है।

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सपा के साथ गठबंधन को लेकर प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने कहा,

हां, ये एक सच्चाई है। रालोद अपने दम पर अधिक सीटें जीत सकती थी या यदि सपा ने रालोद को कुछ जीतने योग्य सीटें दे दी होतीं। गठबंधन ने पार्टी को उन सीटों पर चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया जो उसका गढ़ थीं। उदाहरण के लिए, आरएलडी उम्मीदवार 2017 में मथुरा की मांट विधानसभा सीट केवल कुछ सौ वोटों के मामूली अंतर से हार गए थे, जब पार्टी अपने दम पर लड़ी थी। लेकिन 2022 में सपा ने वह सीट हमें नहीं दी और अपना उम्मीदवार खड़ा कर दिया जो हार गया।

मांट सीट पर न लड़ने का कई सीटों पर असर पड़ा

राय ने आगे कहा कि मांट सीट से आरएलडी उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारने से क्षेत्र के जाट मतदाता नाराज हो गए और उन्होंने मथुरा, आगरा और हाथरस जिलों की कई सीटों पर भाजपा का समर्थन करने का फैसला किया। बाद में चुनाव आयोग ने रालोद से राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा वापस ले लिया और अगर सपा रालोद को कुछ और सीटें दे देती तो इस स्थिति से बचा जा सकता था।

वह कहते हैं कि,

हमारा लक्ष्य 2024 में अधिक से अधिक सीटें जीतने के उद्देश्य से कम से कम एक दर्जन सीटों पर चुनाव लड़ना है ताकि आरएलडी राज्य स्तरीय पार्टी के रूप में अपनी खोई हुई पहचान वापस पा सके। मुजफ्फरनगर, बागपत, अमरोहा, बिजनोर, नगीना, मेरठ, मथुरा, हाथरस और, फ़तेहपुर कुछ ऐसी लोकसभा सीटें हैं जहां पार्टी स्वाभाविक दावेदार है। इस बार हम पूर्वी यूपी की देवरिया सीट से भी चुनाव लड़ना चाहेंगे।

सपा के साथ रिश्ते कायम रखने की कोशिश

रालोद के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने कहा कि, हम सपा के साथ अपने रिश्ते कायम रखने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनकी तरफ से कई बार संकेत सकारात्मक नहीं होते। उदाहरण के लिए एसपी ने मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र के लिए भी पार्टी प्रभारी नियुक्त किया है।

निकाय चुनाव में टिकट वितरण में आई समस्या

उन्होंने कहा कि दिवंगत चौधरी अजित सिंह 2019 में लगभग 5,000 वोटों से हार गए थे और इसलिए इस सीट पर आरएलडी का पहला दावा है। हाल के निकाय चुनावों के लिए टिकट वितरण के दौरान भी समस्याएं सामने आईं। सपा की इस तरह की एकतरफा कार्रवाई से अनावश्यक रूप से गठबंधन में दरार पैदा हो रही है।

कांग्रेस के बिना कोई गठबन काम नहीं करेगा

राय ने कहा कि हमारी प्राथमिकता भाजपा के खिलाफ गठबंधन में कांग्रेस को साथ लेना है। हमारा दृढ़ विश्वास है कि कांग्रेस के बिना कोई भी भाजपा विरोधी गठबंधन काम नहीं करेगा और लाभ नहीं देगा। चुनौती का सामना करने के लिए सपा-रालोद गठबंधन पर्याप्त नहीं है।

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