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UP News: वकील को ही क्लेम लेने में लग गए 9 साल, तो क्या आम आदमी के लिए दूर की कौड़ी है न्याय ?

'भगवान के घर देर है, पर अंधेर नहीं..', यह कहावत फिलहाल देश की न्यायपालिका की मौजूदा हालत पर फिट बैठती नजर आती है। एटा जनपद से सामने आए इस ताजा मामले में एक अधिवक्ता को खुद अपने केस में 9 साल बाद न्याय मिला। अधिवक्ता ने 2014 में एक बीमा कंपनी के खिलाफ केस किया था, जिसमे अब जाकर कोर्ट का फैसला आया। बीमा कंपनी अधिवक्ता को 3.02 लाख रुपये मुआवजे के तौर पर देगी।

दरअसल, एटा के सिविल लाइन्स निवासी अधिवक्ता जॉय कुलश्रेष्ठ ने जानकारी देते हुए बताया कि वो एचडीएफसी (HDFC) बैंक के बचत खाता धारक हैं और उन्होंने अपनी सामान्य बैंकिंग सेवाओं के लिए 1 लाख की आर्थिक सीमा वाला एक डेबिट कार्ड जारी कराया था। वहीं जनवरी 2013 से एचडीएफसी बैंक के प्रबंधक व उसकी बीमा कंपनी 'एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी' के प्रबंधक बार-बार मेडिकल हेल्थ इंश्योरेंस पाॅलिसी लेने पर जोर देते रहे।

it took 9 years for the lawyer to take the claim against HDFC Ergo General Insurance Company

जिसके बाद एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने 21 जनवरी 2013 से 28 जनवरी 2014 तक की अवधि की एक पाॅलिसी जारी कर दी। इस पॉलिसी के अनुसार, अधिवक्ता व उनकी पत्नी का मेडिकल कवर 3 लाख रुपये घोषित किया गया। साथ ही अस्पताल में अधिकतम 30 दिन की भर्ती की दशा में प्रतिदिन 1 हजार रुपये देने का भी प्रस्ताव दिया गया।

इसी बीच 23 अक्टूबर 2013 को प्रार्थी के बीमार होने पर वो आगरा के लोटस हार्ट केयर सेंटर में भर्ती हुए। इसी दौरान उन्होंने बीमा कंपनी से जब मेडिकल कार्ड और कैशलेस इलाज की सुविधा देने को कहा तो बीमा कंपनी ने कैशलेस इलाज की सुविधा से इंकार कर दिया। जबकि यह हॉस्पिटल बीमा कंपनी के लिस्टेड हॉस्पिटल्स में भी आता था।

वहीं कुछ समय बाद बीमा कंपनी द्वारा अधिवक्ता को टरकाने के बाद उन्होंने क्लेम निरस्त कर दिया। जिस पर अधिवक्ता ने आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया। 9 साल चली सुनवाई के बाद आयोग ने पाया कि क्लेम न देकर बीमा कंपनी ने सेवा में कमी की है। जिस पर अध्यक्ष योगेंद्र राम गुप्ता व सदस्य राजकमल दीक्षित एवं भारती चतुर्वेदी ने परिवाद को आंशिक स्वीकारते हुए एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ आदेश पारित किया है।

जिसके अनुसार अधिवक्ता को मेडिकल क्लेम न देने पर बीमा एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को 2014 से सालाना 7 प्रतिशत ब्याज की दर के साथ 3.02 लाख रुपये मुआवजा राशि देनी पड़ेगी। इसके साथ ही मानसिक परेशानी को लेकर तीन हजार व मुकदमा खर्च दो हजार रुपये भी बीमा कंपनी को अदा करने होंगे।

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