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रहस्‍यमयी ''राय साहब'' बने अखिलेश यादव के ''गाइड'', किसी को नहीं देते नंबर, पूरा नाम तक नहीं पता!

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    नई दिल्‍ली। ''राय साहब''... समाजवादी का हर बड़ा नेता पिछले कुछ महीनों से इस नाम को सुन रहा है। समाजवादी पार्टी हर अहम बैठक में ''राय साहब'' मौजूद रहते हैं। वह सलाह भी देते हैं, समझाते भी हैं। जरूरत पड़ने पर फोन भी करते हैं, लेकिन किसी को उनका पूरा नाम तक नहीं मालूम, बस इतना जानते हैं कि जो शख्‍स उन्‍हें समझा रहा है उनका नाम ''राय साहब'' है। मतलब पूरा भी नहीं मालूम। करीब 70 साल के राय साहब से कुछ पूछने की हिम्‍मत कोई इसलिए भी नहीं करता है, क्‍योंकि वह अखिलेश यादव के विश्‍वासपात्र हैं। रहस्‍यमी ''राय साहब'' कब और कैसे अखिलेश यादव के इतने करीब आ गए, यह भी किसी को मालूम नहीं है।

    ''राय साहब'' सपा नेताओं को बताते हैं बीजेपी-आरएसएस से लड़ने के तरीके

    ''राय साहब'' सपा नेताओं को बताते हैं बीजेपी-आरएसएस से लड़ने के तरीके

    द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2018 से ''राय साहब'' समाजवादी पार्टी की करीब-करीब हर मीटिंग में मौजूद रहे। उन्‍होंने पार्टी के पदाधिकारियों को समझाया कि कैसे बर्ताव करें, क्‍या करें और बीजेपी-आरएसएस के साथ कैसे लड़ना है। अखिलेश यादव उनक परिचय मीटिंग कुछ इस तरह कराते हैं... ''ये राय साहब हैं, हमारी मदद करने आए हैं....ये आपको पार्टी और चुनावी तैयारियों के बारे में कुछ बताएंगे। इनकों ध्‍यान से सुनें...''

    किसी को नहीं पता ''राय साहब'' का पूरा नाम

    किसी को नहीं पता ''राय साहब'' का पूरा नाम

    अखिलेश यादव जब ''राय साहब'' का परिचय करा देते हैं तो उसके बाद ''राय साहब'' कमान संभालते हैं और लगभग हर मुद्दे पर बात कररते हैं। वह कहते हैं कि सपा के प्रवक्‍ताओं को मीडिया में ऐसी बातें करने से बचना चाहिए, जिससे लोग उन्‍हें हिंदू विरोधी न समझें। समाजवादी पार्टी के वरिष्‍ठ नेता द प्रिंट को बताया, ''राय साहब'' ने मुझे कॉल किया। पार्टी की रणनीति पर चर्चा की और रणनीति को कैसे जमीन पर उतारा जाए इस बारे में भी बात की। लेकिन मुझे उनका पूरा नाम तक नहीं पता है। मेरे पास उनका नंबर सेव है। मैं उनसे तभी बात करता हूं, जब वह फोन करते हैं।''

    जापान के बारे में बहुत बातें करते हैं ''राय साहब''

    जापान के बारे में बहुत बातें करते हैं ''राय साहब''

    ''राय साहब'' के बारे में ज्‍यादा जानकारी तो नहीं है, लेकिन ऐसा बताया जा रहा है कि वह उत्‍तर प्रदेश के मथुरा से हैं। वह विदेश में भी रहे हैं, खासकर जापान में। जापान की बातों का उदाहरण वह अपनी बातों में खूब देते हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, ''राय साहब'' की अखिलेश यादव के साथ मुलाकात संभवत: जनवरी 2018 में हुई। लखनऊ में पार्टी के एक दलित एक्टिविस्‍ट ने ''राय साहब'' से अखिलेश यादव को मिलवाया था। इस मीटिंग के दौरान ''राय साहब'' ने एक ब्‍लू प्रिंट पेश किया कि कैसे समाजवादी पार्टी को आगामी चुनाव लड़ना चाहिए। ''राय साहब'' का ब्‍लूप्रिंट अखिलेश यादव को पसंद आया और उन्‍होंने इसे मंजूरी दे दी।

    पहली बार अप्रैल में अखिलेश ने सपा नेताओं से कराया ''राय साहब'' का परिचय

    पहली बार अप्रैल में अखिलेश ने सपा नेताओं से कराया ''राय साहब'' का परिचय

    पार्टी सूत्रों के मुताबिक, ''राय साहब'' के साथ सपा के प्रमुख नेताओं का परिचय अप्रैल में कराया गया। अखिलेश यादव ने लखनऊ में पार्टी वर्कर्स की तीन दिवसीय बैठक बुलाई थी। इस दौरान सभी बैठकों में ''राय साहब'' मौजूद रहे और उन्‍होंने नेताओं को बताया कि कैंपेन कैसा होना चाहिए। पिछले महीने समाजवादी पार्टी की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणाी की बैठक लखनऊ में हुई। इसमें भी ''राय साहब'' मौजूद थे।

    जब भी कोई नंबर मांगता है तो अखिलेश यादव के पास भेज देते हैं ''राय साहब''

    जब भी कोई नंबर मांगता है तो अखिलेश यादव के पास भेज देते हैं ''राय साहब''

    एक खास बात और जो ''राय साहब'' के बारे में सामने आई है, वह यह है कि वह किसी को अपना मोबाइल नंबर नहीं देते हैं। पार्टी के कई नेताओं ने उनसे मोबाइल नंबर मांगने की कोशिश की, लेकिन वह हर किसी को एक ही जवाब देते हैं, अखिलेश यादव से ले लीजिए। ''राय साहब'' जब चाहे किसी भी पार्टी नेता से बात करते हैं, लेकिन कोई भी नेता उनसे अपनी मर्जी से बात नहीं कर सकता है, तब तक... जब तक कि ''राय साहब'' न चाहें।

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    English summary
    Inside story: a mysterious 70 year old became Akhilesh Yadav’s best friend in seven months.

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