घर बैठे वोट डालने के इच्छुक नहीं हैं यूपी के बुजुर्ग और दिव्यांग वोटर, सिर्फ 10 हजार ने चुनी ये सेवा
लखनऊ, फरवरी 07। कोरोना काल को देखते हुए चुनाव आयोग ने इस बार पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में 80 साल से अधिक उम्र और कोरोना संक्रमित मतदाताओं के लिए घर से ही अपना वोट डालने की सुविधा दी है। चुनाव आयोग ने जब पांचों राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया था तो उसी वक्त इस सुविधा की घोषणा की थी, लेकिन चुनाव आयोग के हालिया सर्वे से पता चला है कि प्रदेश के बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाता इस सेवा का लाभ उठाने के इच्छुक नहीं हैं।

24 लाख से में 10 हजार वोटरों ने ही चुनी ये सेवा
चुनाव आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि यूपी में 24.2 लाख वोटर 80 साल से अधिक उम्र के या फिर दिव्यांग हैं। उनमें से सिर्फ 10 हजार मतदाताओं ने ही घर से वोट डालने का विकल्प चुनाव है। चुनाव आयोग के 5 फरवरी तक अपडेट किए गए डेटा से ये पता चलता है। वेस्ट यूपी के मुरादाबाद जिले में 40 हजार मतदाता 80 से अधिक उम्र के या फिर दिव्यांग हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ 460 वोटरों ने ही घर बैठे वोट डालने की सेवा को चुना है।
चुनाव आयोग की सिफारिश पर नियमों में हुआ था संशोधन
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, यूपी में घर से वोट डालने के लिए चुने गए 10 हजार मतदाताओं में से 7,396 लोग 80 साल से अधिक उम्र के हैं, जबकि 3,312 वोटर दिव्यांग हैं, जिनमें 40 प्रतिशत की विकलांगता है। आपको बता दें कि चुनाव आयोग की सिफारिश पर ही कानून और न्याय मंत्रालय ने चुनाव नियम, 1961 में संशोधन किया था, जिससे वरिष्ठ नागरिकों और विकलांग व्यक्तियों को 2019 में अनुपस्थित मतदाता सूची में शामिल किया गया था। ऐसे मतदाता पोस्टल बैलेट का विकल्प चुन सकते हैं, एक ऐसा कदम जो मतदान प्रतिशत बढ़ाने में मदद कर सकता है।
विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में यह पहली बार है जब 80 से ऊपर की उम्र के लोगों और कोविड रोगियों के लिए पोस्टल बैलेट का इंतजाम किया गया है।












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