यूपी चुनाव: भाजपा-सपा की टक्कर में निषाद और राजभर भी होंगे आमने-सामने, आरक्षण इनका सबसे बड़ा मुद्दा
लखनऊ, 18 दिसंबर। साल 2022 में होने वाले यूपी चुनाव में वैसे तो मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के बीच माना जा रहा है लेकिन इस फाइट में इन दो बड़े दलों को समर्थन देने वाले छोटे दल भी मोर्चा ले रहे हैं। इस बार कमल और साइकिल के बीच टक्कर में निषाद और राजभर भी आमने-सामने होंगे। भाजपा के साथ रह चुके सुभासपा के ओम प्रकाश राजभर इस बार सपा के साथ हैं। वहीं सपा के सहारे आगे बढ़ी निषाद पार्टी के संजय निषाद 2022 यूपी चुनाव में भाजपा का साथ दे रहे हैं। निषाद और राजभर दोनों ही ओबीसी में आने वाली जातियां हैं जिनके नेता अनुसूचित जाति (एससी) कैटेगरी का आरक्षण चाहते हैं। इसके लिए सत्ता में भागीदारी और किंगमेकर बनने का सपना इन छोटी पार्टियों ने कांशीराम से सीखा है। संजय निषाद और ओम प्रकाश राजभर दोनों ही कभी बसपा में रहे हैं। निषाद और राजभर यूपी की सियासत में ऐसी ताकत बनकर उभरे हैं जिसने अपनी मांगों और तेवर से बड़ी पार्टियों की नाक में दम कर दिया है। भाजपा जैसी बड़ी पार्टियां भी इन छोटे दलों को नाराज नहीं कर सकती। शुक्रवार को निषाद पार्टी की रैली में गृह मंत्री अमित शाह आए लेकिन रैली खत्म होने के बाद जो माहौल नजर आया उससे पता चलता है कि इन छोटे दलों के समर्थकों का मूड क्या है?

'आरक्षण नहीं तो वोट नहीं'
शुक्रवार को लखनऊ के रमाबाई पार्क में आयोजित निषादों की रैली में गृह मंत्री अमित शाह ने आरक्षण को लेकर कुछ नहीं कहा। उन्होंने भाषण में सिर्फ इतना कहा कि अगर 2022 में यूपी में पार्टी की सरकार बनी तो निषादों के मसलों का हल निकाला जाएगा। अमित शाह के रवैये से रैली में आए निषाद पार्टी समर्थक नाराज हो गए। 'आरक्षण नहीं तो वोट नहीं' की विचारधारा पर चल रही निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद को भी समर्थकों की नाराजगी के बाद सीएम योगी को चिट्ठी लिखनी पड़ गई। दरअसल, योगी सरकार ने निषाद, राजभर समेत ओबीसी की 17 जातियों को एससी कैटेगरी में डाला था लेकिन हाईकोर्ट ने इस आदेश पर यह कहकर रोक लगा दी थी कि ऐसा करने का अधिकार सिर्फ संसद को है। संजय निषाद अमित शाह से यही उम्मीद लगाए बैठे थे कि वे संसद के जरिए कोई हल निकालेंगे। उन्होंने सीएम योगी को लिखा कि आरक्षण के मामले का समाधान निकालना चाहिए तभी भाजपा को निषाद वोटबैंक से फायदा होगा। उधर, सपा के साथ गठबंधन में शामिल ओम प्रकाश राजभर लगातार समर्थकों से कह रहे हैं कि भाजपा के शासन में आरक्षण नहीं मिला तो अब सपा की सरकार बनने पर मिलेगा। इस तरह से आरक्षण के मुद्दे को लेकर निषाद और राजभर यूपी में संघर्ष कर रहे हैं। इस संघर्ष में दोनों ने दो पार्टियों को चुना है। यह भी दलीय राजनीति का रोचक पहलू है कि भाजपा की सीढ़ी से सत्ता तक पहुंचे राजभर आज सपा के साथ हैं और सपा की सीढ़ी से आगे बढ़े निषाद भाजपा के साथ हैं। बहरहाल, यूपी चुनाव में निषाद और राजभर भी एक दूसरे को टक्कर देंगे।

खुद को किंगमेकर मानते हैं निषाद और राजभर
संजय निषाद और ओम प्रकाश राजभर दोनों ही खुद को किंगमेकर मानते हैं। कांशीराम भी किंगमेकर थे और कहा करते थे सत्ता वो चाबी है जिससे हर ताले खोले जा सकते हैं। आबादी के आधार पर हिस्सेदारी और सत्ता में भागीदारी की विचारधारा को लेकर स्थापित हुई बसपा से निकले निषाद और राजभर कांशीराम की विरासत को ही आगे बढ़ा रहे हैं। यह अलग बात है कि कांशीराम बहुजन की बात करते थे जिसमें दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक आते थे। वहीं, निषाद और राजभर अपनी जातियों के हितों की बात करते हैं। 2017 में भाजपा ने पटेल और राजभर जैसी जातियों के नेताओं के साथ गठबंधन किया था जिनका पूर्वांचल की कई सीटों पर असर है। इसका फायदा भी मिला था। ओम प्रकाश राजभर के चार विधायक विधानसभा में पहुंच गए थे। ओपी राजभर को योगी मंत्रिमंडल में जगह भी मिल गई थी। इसी तरह से संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद को जब सपा ने गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में टिकट दिया था तो उन्होंने योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर सीट भाजपा से छीन ली थी। निषादों की इसी ताकत को देखते हुए भाजपा ने संजय निषाद को अपने खेमे में लिया था। संजय निषाद और ओम प्रकाश राजभर दोनों ही दावा करते हैं कि जिस पार्टी के साथ वो जाएंगे, सरकार उसी की बन जाएगी। अब, देखना यह है कि निषाद और राजभर की इस चुनावी टक्कर में सरकार भाजपा की बनती है या सपा की।

सपा कैसे निषादों को साध रही, भाजपा कैसे राजभरों को
भाजपा ने इसी सप्ताह कालीचरण राजभर और सुभासपा के प्रदेश महासचिव रहे ज्ञान भारद्वाज समेत कई राजभर नेताओं को पार्टी में शामिल किया। अनिल राजभर योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। भाजपा कालीचरण राजभर को ओम प्रकाश राजभर के खिलाफ टिकट दे सकती है। अनिल राजभर ने इस मौके पर ओम प्रकाश राजभर को वोटकटवा कहा। उधर, निषादों को साधने के लिए अखिलेश यूपी के दिग्गज नेता रहे जमुना निषाद के परिवार का साथ ले रही है। पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद भी सपा के पाले में हैं। इस तरह से भाजपा और सपा दोनों ही निषादों और राजभरों को साधने के लिए सियासी समीकरण बिठाने में लगे हैं। एक तरफ भाजपा ओम प्रकाश राजभर का काट निकालने में लगी है तो दूसरी तरफ सपा भी संजय निषाद को टक्कर देने के लिए अन्य निषाद नेताओं को आगे बढ़ा रही है। कुल मिलाकर पूर्वांचल में इस बार निषाद और राजभर दोनों ही जीत के लिए अहम हैं। सत्ता तक पहुंचने के लिए राजभर और निषाद कितने असरदार हो गए हैं, यूपी चुनाव 2022 इसकी गवाही दे रहा है।












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