UP चुनाव में BJP ने हारी हुई सीटों पर चला ये दांव तो कई सीटों पर कैसे पलट गई बाजी, जानिए
लखनऊ, 14 मार्च: उत्तर प्रदेश में बीजेपी की जीत के पीछे उसके रणनीतिक कौशल का भी अहम योगदान है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की रणनीतिक सूझबूझ ने अपनी हारी सीटों पर भी अपनी जीत की पटकथा लिखी है। इस चुनाव में बीजेपी ने पिछली बार हारी हुई सीटों को जीतने की योजना बनाई थी और 85 में से 23 सीटें जीतने में सफलता हासिल की है। इनमें से ज्यादातर सीटों पर नए चेहरों को मैदान में उतारा गया था। इनमें से कुछ सीटें ऐसी भी थीं, जिन पर कई दशकों से दूसरी पार्टियों का कब्जा था। साल 2017 में मोदी लहर के बाद भी जिन सीटों पर पार्टी हारी, वहां पार्टी के उम्मीदवार बदले गए. बदलाव की बात लोगों तक पहुंचाई गई और पार्टी इसमें सफल रही है।

रामगोविंद चौधरी की सीट पर भी खिला कमल
इस बार बीजेपी ने कुछ ऐसी सीटों पर दांव लगाया था जिसे जीतना उसके लिए मुश्किल था। इनमें मैनपुरी, सिधौली, चिल्लूपर, बांसडीह, रायबरेली सदर, कन्नौज सदर जैसी सीटें शामिल थीं। बांसडीह में विधायक दल के सपा नेता राम गोविंद चौधरी चुनाव लड़ रहे थे। यहां बीजेपी ने निषाद पार्टी के केतकी सिंह को मैदान में उतारा था। केतकी ने राम गोविंद को हराकर यह सीट बीजेपी की झोली में डालने का काम किया है। बांसडीह सीट पर सपा के वरिष्ठ नेता रामगोविंद चौधरी लगातार छह बार से चुनाव जीत रहे थे लेकिन इस बार भी माना जा रहा था कि वह दोबारा जीतकर सदन में पहुंचेंगे लेकिन वह चुनाव हार गए। राजभर के साथ गठबंधन भी उनकी मदद नहीं कर पाया। हालांकि ऐसा कहा जा रहा है कि अखिलेश उन्हें एमएलसी बनाएंगे और सदन में लेकर आएंगे ताकि उन्हें विधान परिषद का नेता बनाया जा सके।

गोरखपुर में चिल्लूपार से खत्म हुई हाते की हनक
गोरखपुर में बीजेपी ने पूर्वांचल के बाहुबली हरिशंकर तिवारी की पारंपरिक चिल्लूपर सीट पर कब्जा कर लिया। हरिशंकर के बेटे विनय शंकर पिछली बार बसपा से विधायक थे। इस बार वह सपा के टिकट पर मैदान में थे। उन्हें बीजेपी के राजेश त्रिपाठी ने हराया था। लखनऊ की मोहनलालगंज सीट पर बीजेपी ने पहली बार कब्जा किया और 40 साल बाद सीतापुर जिले की सिधौली सीट पर जीत हासिल की। वहीं मैनपुरी जैसी सीट कई दशकों के बाद बीजेपी के कब्जे में आई थी।

दूसरे दलों के सहारे भी पुराने गढ़ों पर किया कब्जा
बीजेपी ने अन्य पार्टियों के विधायकों को ये खोई हुई सीटें जीतने का मौका दिया। उन्होंने कई सीटों पर अपने और सहयोगियों के नए चेहरों को भी उतारा। सोनिया गांधी के गढ़ रायबरेली की सदर सीट जीतने के लिए बीजेपी ने कांग्रेस विधायक अदिति सिंह को अपनी पार्टी में लिया। सिधौली जीतने के लिए सपा से मनीष रावत और हरदोई सदर सीट जीतने के लिए उन्होंने सपा से नितिन अग्रवाल को अपनी पार्टी में लिया और हरदोई सदर सीट पर बीजेपी का कब्जा हो गया।

104 सीटों पर आए नये चहरे, इनमें 80 जीते
भाजपा ने 85 में से कुल 69 सीटों पर नए चेहरे उतारे थे। इनमें से पार्टी ने 19 पर कब्जा किया था। शेष 16 सीटों पर 2017 का चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। इनमें से 4 पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी। बीजेपी ने पहले बड़े पैमाने पर मौजूदा विधायकों के टिकट काटने की योजना बनाई थी, लेकिन सिर्फ 104 विधायकों के टिकट काटे गए। इन 104 सीटों पर नए चेहरों को मैदान में उतारा गया और इनमें से बीजेपी ने फिर से 80 पर जीत हासिल की। वहीं, 214 मौजूदा विधायक मैदान में थे और 170 फिर से जीतने में सफल रहे।

हारी हुई सीटों पर जीत के साथ पार्टी गदगद
बीजेपी इस जीत से गदगद नजर आ रही है। पार्टी के महासचिव और चुनाव प्रबंधन प्रभारी जेपीएस राठौर का कहना है कि इस बार हमने पिछली बार हारे या दशकों से हारे सीटों को जीतने की योजना तैयार की थी। पिछली बार हारी हुई 85 सीटों में से वह इस बार 23 पर जीत हासिल करने में सफल रही थी। इस बार हम कुल 68 फीसदी सीटें जीतने में सफल रहे और पिछली बार जीती गई 78 फीसदी सीटों पर फिर से कमल खिल गया।












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