23 साल की IAS सौम्या ने बता दिया टॉप करने का फॉर्मूला
बेटी के इंजीनियर की बजाय अचानक से आईएएस बनने के खाब पर माता-पिता थोड़ा अचरज में थे। गोल्ड मिलने के बाद सौम्या का तो सुनहरा भविष्य लगभग तय हो चुका था।
इलाहाबाद। जिन छात्रों का सपना IAS बनने का है और दिन-रात वो अपने खाब पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। ऐसे में UPSC 2016-17 की परीक्षा टॉप करने वाली सौम्या किसी मिसाल से कम नहीं। महज 23 साल की उम्र में सौम्या ने बता दिया कि आखिर IAS बनना क्या होता है?
मैं लड़की हूं तो क्या?, कमजोर नहीं! मजबूर नहीं!
मैं नाजुक हूं तो क्या?, अधीर नहीं! हताश नहीं!
तोड़ रही हूं बेड़ियां तो क्या? दस्तूर नहीं! मंजूर नहीं!
मैं ईश्वर की रचना तो क्यों? अभिमान नहीं! सम्मान नहीं!
मैं नित नए कीर्तिमान रचूं तो क्या? मेहनत नहीं! विश्वास नहीं!
मैं फक्र तुम्हारे तन-मन का तो क्यों? गौरव नहीं! गुमान नहीं!
मैं जीवनदायिनी जननी हूं तो क्यों? प्रेरणा नहीं! प्रमाण नहीं!
मैं नारी धर्म की ध्वजवाहक तो क्या? बलिदान नहीं! दान नहीं!
हर घर की गूंजती किलकारी हूं न समझो तो क्या? सौम्य नहीं! सौम्या नहीं।
ये चंद लाइने उस साधरण लड़की के लिए थी जिसने अपनी लगन से खुद को व्यक्ति से व्यक्तित्व तक के सफर का जीता जागता उदाहरण पेश किया। जी हां हम बात कर रहे हैं सौम्या पांडेय की। इलाहाबाद की इस बेटी ने भारत की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा की 2016 परीक्षा में ऐसा झंडा गाड़ा है कि आने वाले कई सालों तक सौम्या लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। सौम्या ने बेटियों को भ्रूण में खत्म करने वाले समाज को नारी शक्ति का वो आइना दिखाया है, जो दशकों के लंबे अंतराल पर, लेकिन समय-समय पर नारी ध्वजवाहक हमेशा से दिखाती चली आई है। सौम्या पांडेय ने न सिर्फ अपना बल्कि अपने माता-पिता और इलाहाबाद का नाम पूरे देश में रोशन किया है। ऐसे तो बिरले ही होते हैं जो अपने पहले ही प्रयास में आईएएस की परीक्षा क्वालीफाई करें। लेकिन सौम्या ने न सिर्फ पहली बार में परीक्षा पास की बल्कि ऑल इंडिया चौथी रैंक हासिल करने असंभव को संभव कर दिखाया। सबसे अहम बात है कि सौम्या अभी महज 23 साल की हैं। बामुश्किल उन्होंने आठ महीने पहले आईएएस की तैयारी शुरू की थी और अपने पहले ही प्रयास में इतिहास रच दिया।

जब इंडिया लेवल पर छा गई थी सौम्या
सौम्या के लिए ऑल इंडिया लेवल पर सफलता दर्ज करने की ये पहली घटना नहीं थी। इससे पहले वो पढ़ाई के दौरान भी ये कारनामा कर चुकी हैं। सौम्या ने हाईस्कूल और इंटर में न सिर्फ अपना जिला टॉप किया था। बल्कि ऑल इंडिया तीसरी रैंक हासिल की थी। सौम्या ने आर्मी पब्लिक स्कूल न्यू कैंट इलाहाबाद से 2009 में 10वीं की परीक्षा 94 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की जबकि 12वीं की परीक्षा 2011 में इलाहाबाद पब्लिक स्कूल चौफटका से 97.4 फीसदी अंकों के साथ पास की थी।

गोल्ड मेडल ने बता दी थी उनकी खासियत
देश के प्रतिष्ठित कॉलेज में शुमार इलाहाबाद का मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) किसी परिचय का मोहताज नहीं है। इसी कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक कर रही सौम्या ने जब 2015 में गोल्ड मेडल पाने का कारनामा किया तभी स्पष्ट हो गया था कि सौम्या बहुत खास है और आखिरकार जब सौम्या ने आईएएस बनने का ख्वाब देखा तो बड़ी सिद्दत से सफलता को चूम लिया। आज पूरा देश सौम्या की उपलब्धि पर इतरा रहा है। महज 23 साल की उम्र में बेटी सौम्या को इतनी बड़ी सफलता मिलने पर पिता डॉ. रवि पांडेय और मां डॉ. साधना पांडेय खुशी से फूले नहीं समा रहे।

सौम्या की जुबानी, उनकी कहानी
सौम्या ने एमएनएनआईटी से बीटेक किया और अचानक से आईएएस बनने की मंशा पिता डॉ. रवि पांडेय और मां डॉ. साधना पांडेय से बताई। बेटी के इंजीनियर की बजाय अचानक से आईएएस बनने के खाब पर माता-पिता थोड़ा अचरज में थे। क्योंकि गोल्ड मिलने के बाद सौम्या का तो सुनहरा भविष्य लगभग तय हो चुका था। उसे न सिर्फ मनचाहा पैकेज मिलता बल्कि वो अपने पसंद की जगह काम भी करती। लेकिन सौम्या के मन में समाज के लिए भी कुछ करने का ख्वाब पल रहा था। सौम्या को एक आईएएस के तौर पर वो सब नजर आया। जिससे वो समाजसेवा कर सकती थी। बस फिर क्या था, सौम्या के निर्णय को घरवालों ने पूरा सपोर्ट किया और जी जान से सौम्या तैयारी में जुट गई और अब वो हर किसी के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।

जब बढ़ाया पहला कदम
बीटेक का रिजल्ट अगस्त 2015 में आ चुका था। संस्थान ने सौम्या को गोल्ड मेडल दिया लेकिन अपनी सोच के मुताबिक सौम्या ने आईएएस बनने के लिए सिविल परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। फॉर्म भरने के बाद पूरी लगन से सौम्या आईएएस 2016 की परीक्षा को क्रैक करने का प्रण कर चुकी थी। वो किसी विशेष परिस्थिति को छोड़कर रोज सात-आठ घंटे पढ़ती और ये क्रम परीक्षा की तारीख तक जारी रहा। लगभग 8 महीने की कड़ी तपस्या के बाद सौम्या ने परीक्षा दी और रिजल्ट आपके सामने है। दरअसल इंजीनियरिंग की छात्रा होने के बावजूद भी सौम्या ने भूगोल विषय को वैकल्पिक विषय के तौर पर चुना। ये कहीं से भी सौम्या के लिए आसान नहीं था लेकिन इस सफर पर बढ़ने के बाद सौम्या का मानना था कि एक आईएएस को इस विषय की जानकारी जरूर होनी चाहिए। सौम्या ने निर्णय लिया कि वो घर पर ही रहकर तैयारी करेंगी। लगभग सारी तैयारी सौम्या खुद ही करती रही। लेकिन बाद में उन्होंने जीएस के लिए ध्येय आईएएस से कोचिंग शुरू की। उनका ये निर्णय सही रहा। क्योंकि कोचिंग के गाइडेंस से सौम्या का आत्मविश्वास लगातार बढ़ता गया।

रणनीति का हिस्सा
सौम्या ने सबसे महत्वपूर्ण विषय सामान्य अध्ययन की तैयारी के लिए खास रणनीति बनाई। कोचिंग के अलावा रोज सुबह दो घंटे अखबार पढ़कर और टीवी पर न्यूज चैनल देखकर वो तैयारी करने लगी। करेंट अफेयर्स पर सीधा फोकस कर रही थी। चूंकि सौम्या ने शुरू से अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की थी, इसलिए पूरी परीक्षा अंग्रेजी में देने का निर्णय लिया। सौम्या अब तक की तैयारी में ये समझ चुकी थी कि सिविल सेवा की परीक्षा में अब जिस तरह के पेपर बन रहे हैं उसमें अधिकतर एप्लीकेशन बेस्ड यानी अनुप्रयोग पर आधारित प्रश्न आ रहे हैं। आयोग का ध्येय साफ था वो अभ्यर्थी की ओपिनियन जानने की कोशिश करता है। यही बेहतर चयन का सबसे अच्छा मापदंड भी होता है। ये ऐसी तैयारी होती है जिसे कोई कोचिंग चाह कर भी नहीं करा पायेगा। इसलिए सौम्या पूरी तैयारी खुद करती बस एक स्तंभ के रूप में कोचिंग की भूमिका का उपयोग कर रही थी।

25 मिनट 9 सवाल
मेन्स परीक्षा पास कर जब इंटरव्यू में सौम्या पहुंची तो इनके सामने सवालों की बौछार हुई। 25 मिनट में 9 सवाल पूछे गए। लेकिन वो परेशान परेशान नहीं हुई। वजह साफ थी, सौम्या से वही पूछा जा रहा था जो उसने पढ़ा था। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के सवालों को इस गोल्ड मेडलिस्ट ने धड़ाधड़ जवाब दिए और जब बात आई करेंट अफेयर्स की तो सौम्या को मानो ये और भी आसान लगा। पीके जोशी के बोर्ड में इंटरव्यू दे रही सौम्या ने चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर से लेकर विदेश नीति तक पर अपने जवाब दिए। सौम्या कहती है कि उनकी मां की प्रेरणा और पिता का भरोसा उन्हें यहां तक ले आया है। हर बेटी को वो सशक्त बनते देखना चाहती हैं।












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