यमुना में मिली थी उसकी लाश! अदालत में जिंदा पहुंची तो मचा हड़कंप
यमुना में एक लाश मिली थी जिसे देखकर एक पिता ने कहा था कि यह उसकी बेटी थी। लेकिन वह बेटी एक दिन जिंदा अदालत में गई तो सबसे होश उड़ गए।
राजापुर। यूपी पुलिस की लापरवाही की वजह से पत्नी की हत्या के आरोप में एक पति जेल में बंद है। जब उसे छुड़ाने के लिए खुद उसकी पत्नी अदालत में जिंदा चली आई तो वहां सब हैरान रह गए। महिला को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई। यह अजीबोगरीब मामला चित्रकूट जिला कचहरी में देखने को मिला।

जेल में बंद हैं पति, चाची और एक साल का बच्चा
राजापुर इलाके के टिकरा गांव के 45 साल के उदित नारायण, उनकी चाची अपने एक साल के मासूम बच्चे के साथ ज्ञानवती की हत्या के आरोप में पिछले डेढ़ माह से जेल में हैं। ज्ञानवती, उदित नारायण की पत्नी हैं।
अदालत पहुंचकर दिया जीवित होने का एफिडेविट
अपनी हत्या के आरोप में जेल में बंद पति और उनकी चाची को मुक्त कराने के लिए ज्ञानवती ने खुद अदालत पहुंचकर जीवित होने का एफिडेविट दिया और उनको बेकसूर बताया।
जज ने दिए रिहाई कराने के आदेश
ज्ञानवती के अदालत में पेश होने के बाद मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी सुभाष सिंह ने उदित नारायण और उनकी चाची के खिलाफ केस दर्ज कराने वाले ज्ञानवती के पिता को तलब किया।
बाप-बेटी के बयान के बाद जज ने जेल में बंद उदित नारायण और उनकी चाची को आरोपों से मुक्त करने और उनकी रिहाई की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए।
क्या है ज्ञानवती की हत्या का मामला
ज्ञानवती का कहना है कि वह ससुराल में किसी को बताए बिना 5 अक्टूबर को अपनी मर्जी से कहीं चली गई थी। इधर उसके पिता ने राजापुर पुलिस स्टेशन में पति और उनकी चाची के खिलाफ किडनैपिंग का केस दर्ज करा दिया।
कुछ दिनों कौशांबी में यमुना नदी में एक महिला की लाश मिली। ज्ञानवती के पिता ने शिनाख्त करते हुए कहा था कि यह उसकी बेटी की लाश है। इसके बाद पुलिस ने मर्डर के आरोप में उदित नारायण और उनकी चाची को गिरफ्तार कर लिया था। चाची के साथ एक साल का मासूम बच्चे को भी जेल जाना पड़ा।
मामले में पुलिस ने की बड़ी लापरवाही
राजापुर पुलिस का कहना है कि झूठा मुकदमा करनेवाले ज्ञानवती के पिता के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। यमुना नदी में मिली लाश अगर ज्ञानवती की नहीं थी तो किसकी थी, पुलिस इस सवाल का जवाब नहीं दे पा रही है।
इस मामले में पुलिस पर भी सवाल उठ रहे हैं कि लाश को पहचाना जा सकता था तो फिर सिर्फ पिता के कहने पर कैसे मान लिया गया किया कि वह ज्ञानवती ही थी?












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