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अखिलेश-राहुल की साइकिल की हवा निकालने के लिए था ये मोदी प्लान

प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के घर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी और इसी बहाने कायस्थ समाज को भी लुभाने की कोशिश की है। यह इलाका वाराणसी कैंट विधानसभा क्षेत्र में आता है।

वाराणसी। यूपी विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण में प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में तीन दिन तक डेरा डाले रखा। मोदी ने इस दौरान न सिर्फ सपा के खास माने जाने वाले यादव वोटबैंक पर सेंध लगाने की कोशिश की बल्कि कांग्रेस को भी गुगली दी। सपा के वोटबैंक का गढ़ माने जाने वाले गड़वाघाट आश्रम जाकर मोदी ने सियासी दांव खेला तो पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के स्मारक जाकर उन्होंने न सिर्फ कायस्थ वोटों पर नजर डाली बल्कि कांग्रेस के मुकाबले शास्त्री को लेकर अपना पलड़ा भारी करने की कोशिश भी की। प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्र की सत्ता में आते ही बाबा साहब अंबेडकर और लाल बहादुर शास्त्री जैसे महापुरुषों के नाम को भुनाने की भरपूर कोशिश की है।

कायस्थ वोटरों को लुभाने की कोशिश

कायस्थ वोटरों को लुभाने की कोशिश

चुनाव प्रचार के चरम मोदी के दौरे को लेकर सवाल

चुनाव प्रचार के चरम मोदी के दौरे को लेकर सवाल

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे को लेकर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री और स्पेशल CWC इनवाइटी ने कहा, 'मोगी ने रामनगर स्थित शास्त्री मेमोरियल का दौरा किया यह खुशी की बात है लेकिन जिस तरह चुनाव प्रचार के चरम पर उन्होंने यह काम किया है उससे इसके राजनीति एजेंडा होने की भी आशंका है।' उन्होंने कहा, 'बीते तीन साल में मोदी ने कभी भी यहां आने के बारे में नहीं सोचा, जबकि यह उनके संसदीय क्षेत्र में आता है। प्रधानमंत्री ने अपने पिछले भाषणों में कई बार शास्त्री जी के नाम का इस्तेमाल किया है लेकिन मुझे निराशा है कि सरकार ने अब तक उनके नाम से कोई भी योजना या प्रोजेक्ट शुरू नहीं किया।'

बेटे ने कहा- मेरे लिए है ये भावुक पल

बेटे ने कहा- मेरे लिए है ये भावुक पल

पूर्व प्रधानमंत्री के दूसरे बेटे सुनील, जो कि बीजेपी के साथ है, ने कहा, 'मेरे लिए यह भावुक पल था जिस तरह का स्वागत प्रधानमंत्री मोदी का हुआ है। ऐसा ही स्वागत मेरे पिता का तब हुआ था जब वह प्रधानमंत्री बनने के बाद घर आए थे।' शास्त्री 1965 में भारत पाकिस्तान युद्ध जीतने के बाद वाराणसी स्थित अपने घर गए थे। शास्त्री का जन्म मुगलसराय में हुआ था। उनके पिता के निधन के बाद उनकी मां अपने मायके में आकर रहने लगी थीं। तब शास्त्री सिर्फ एक साल के थे। इलाहाबाद में नेहरू परिवार के घर आनंद भवन के मुकाबले वाराणसी में शास्त्री का घर मजह एक झोपड़ी है। जहां उनका परिवार काफी करेगी में रहा। दिलचस्प बात यह है कि शास्त्री की राजनीतिक कर्मभूमि इलाहाबाद रही है जहां उन्हें नेहरू से प्रेरणा मिली थी।

विजिटर नंबर 1427 बने मोदी

विजिटर नंबर 1427 बने मोदी

प्रधानमंत्री मोदी गड़वाघाट आश्रम से निकल कर रामनगर स्थित शास्त्री चौक पहुंचे और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। वह शास्त्री के स्मारक पहुंचे और उनके परिजनों से मुलाकात भी की। स्मारक की विजिटर बुक के मुताबिक मोदी 1427वें विजिटर बने। उन्होंने विजिटल बुक पर एक संदेश लिखा, 'जिस भूमि पर भारत के लाल ने संस्कार सीखा उस भूमि को प्रणाम करता हूं। जो भारत के लिए खप गया उसे प्रणाम करना मेरा सौभाग्य है। प्रणाम। नरेंद्र मोदी।'

शास्त्री स्मारक का विकास नहीं हो पाया

शास्त्री स्मारक का विकास नहीं हो पाया

सबसे पहले यूपी के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने शास्त्री के स्मारक को बनवाने की मुहिम शुरू की था और उनके रिश्तेदादों को 42 लाख रुपये दिए लेकिन मेमोरियल और म्यूजियम का काम हो नहीं सका। आठ महीने पहले केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार शास्त्री मेमोरियल को अपने कब्जे में लेकर इसका विकास करेगी लेकिन फिर भी काम नहीं हो सका। हालांकि दिल्ली स्थित लाल बहादुर शास्त्री नेशनल मेमोरियल का उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2005 में किया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ओर से शुरू किए गए प्रोजेक्ट के काम को आगे बढ़ाया था। हालांकि मोदी के दौरे के बाद एक बार फिर उम्मीद जगी है कि रामनगर स्थित शास्त्री स्मारक के अच्छे दिन आ आएंगे।

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