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ओपी राजभर की सुभासपा की एनडीए में वापसी से यूपी में भाजपा को कितना फायदा?

बीजेपी 2024 के चुनाव से पहले एक बार फिर से एनडीए को मजबूत करने की मुहिम में जुटी हुआ है। रविवार को उसे यूपी में इसमें एक बड़ी सफलता भी मिली है। ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी एक बार फिर उसका हिस्सा बन गई है।

2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को सपा-बसपा गठबंधन की वजह से पूर्वांचल की कई महत्वपूर्ण सीटों पर भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। गाजीपुर, जौनपुर और घोसी जैसी सीटें उसके हाथों से निकल गई थी। तब राजभर भाजपा से अलग होकर मैदान में ताल ठोक रहे थे।

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विपक्षी एकता की कोशिशों के बीच भाजपा को बड़ी सफलता
2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में ओपी राजभर समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव की साइकिल पर सवार हो गए थे। इसका नतीजा ये हुआ कि गाजीपुर जनपद की सभी सातों सीटें भाजपा हार गई थी। दो पर उनकी पार्टी और बाकी सपा जीत ले गई थी। ऐसे में 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर देश में विपक्षी एकता की जो कोशिशों चल रही हैं, उनका सामना करना बीजेपी के लिए आसान नहीं होने वाला है।

2024 के चुनाव में पूर्वांचल में बीजेपी को मिल सकता है काफी फायदा
ऐसे में ओम प्रकाश राजभर की पार्टी की एनडीए में वापसी से बीजेपी को काफी फायदा मिल सकता है। 2022 में सपा के साथ गठबंधन में सुभासपा को 6 सीटें मिली थीं। जिन 19 सीटों पर वह चुनाव लड़ी, वहां पार्टी को 29.77% वोट मिले। चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि इलाके की अधिकतर सीटों पर राजभर समाज का लगभग 20 हजार के आसपास का वोट बैंक है।

2014 और 2017 में बीजेपी को मिला था गठबंधन का लाभ
अब जरा उस दौर का रुख करते हैं, जब यूपी में बीजेपी और सुभासपा साथ-साथ थे। आंकड़ों से लगता है कि 2014 के लोकसभा चुनावों और 2017 के विधानसभा चुनाव दोनों में पूर्वांचल में बीजेपी की बड़ी जीत में राजभर की पार्टी का बड़ा योगदान रहा है। इसकी वजह ये है कि पूर्वांचल में राजभर समाज को एक बड़ा वोट बैंक माना जाता है, जो एकजुटता के साथ वोट करते हैं।

ओपी राजभर की पार्टी की चुनावी राजनीति की शुरुआत 2012 के विधानसभा चुनावों से हुई थी। तब इसने 52 सीटों पर प्रत्याशी दिए थे और 5.6% वोट लाकर अपनी धमक राष्ट्रीय पार्टियों तक को दिखा दिया था। सिर्फ गाजीपुर क्षेत्र में ही नहीं, बलिया, वाराणसी और आजमगढ़ तक में इसने अपनी एक महत्वपूर्ण हैसियत पेश की थी। इसी की वजह से बीजेपी ने पहली बार 2014 में इसके साथ समझौता किया और 2017 में उसे 8 सीटों का ऑफर दिया। पार्टी के उम्मीदवार 4 सीटें जीत गए।

गठबंधन में दिखता है सुभासपा का दम
योगी आदित्यनाथ की पहली सरकार में ओपी राजभर कैबिनेट मंत्री बने थे। कुछ आंकड़े बताते हैं कि राजभर समाज की वजह से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की उत्तर प्रदेश के लगभग 15 जिलों में अच्छा प्रभाव है। यूपी में हुए पिछले पांच चुनावों का विश्लेषण करें तो यही पता चलता है कि यह पार्टी भले ही अकेले दम पर बाजी पलटने की स्थिति में नहीं रहती हो, लेकिन एक-एक मिलकर ग्यारह बनाने का दम जरूर रखती है।

राजभर के लिए भाजपा के पास क्या होगा तात्कालिक ऑफर?
अब जब एक बार फिर से यूपी में भाजपा-सुभासपा एक साथ आए हैं तो गाजीपुर, जौनपुर, मऊ, बलिया, आजमगढ़ और अंबेडकर नगर के अलावा आसपास के क्षेत्रों में भाजपा की स्थिति और मजबूत हो सकती है। चर्चा है कि इन सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ओपी राजभर के बेटे को गाजीपुर सीट से टिकट का ऑफर दे सकती है। इसके साथ ही खुद राजभर को फिर से योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाकर सत्ता का स्वाद चखने का इंतजाम किया जा सकता है।

वैसे कहा यह भी जा रही है कि ओपी राजभर बीजेपी से तीन से चार लोकसभा सीटों की मांग कर रहे हैं, लेकिन भाजपा इसके लिए तैयार होगी यह बड़ा सवाल है।

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