Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Mukhtar Ansari: क्रिकेट का शौकीन मुख्तार कैसे बना जरायम की दुनिया का बेताज बादशाह? खूनी खेल से भरी है कहानी

Mukhtar Ansari: लोकसभा चुनाव के नजदीक आते ही उत्तर प्रदेश के बड़े माफिया का गुरुवार को अंत हो गया। अपराध की दुनिया में डर का दूसरा नाम रहा मुख्तार अंसारी करीब 18 साल से ज्यादा वक्त से जेल में सजा काट रहा था। अचानक तबीयत दिल का दौरा पड़ने से शांत हो गया। मुख्तार अंसारी की छवि भले ही माफियागिरी से ढकी हो। लेकिन, उसका खानदान साफ सुथरी छवि के साथ राजनीति में सक्रिय रहा है।

मुख्तार के दादा डॉक्टर मुख्तार अहमद अंसारी स्वतंत्रता सेनानी थे। वहीं, नाना ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान शहादत के लिए महावीर चक्र से नवाजे गए थे। वहीं, पिता सुभान उल्ला अंसारी गाजीपुर में अपनी साफ सुधरी छवि के साथ राजनीति में सक्रिय रहे। चाचा हामिद अंसारी, भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति रहे हैं। आखिर मुख्तार कैसे बना जरायम की दुनिया का बेताज बादशाह?

mukhtar ansari death

यूपी के गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद में सुबहान उल्लाह अंसारी और बेगम राबिया के घर 3 जून 1963 को एक बेटे का जन्म हुआ। नाम रखा गया 'मुख्तार अंसारी'। प्रतिष्ठित राजनीतिक खानदान में जन्में मुख्तार तीन भाइयों में सबसे छोटे और गुस्से वाले स्वभाव के थे। मुख्तार को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक था। लेकिन, कॉलेज के जमाने से ही उसकी राह आपराधिक दुनिया के रास्ते की ओर रुख कर चुकी थी।

पिता के अपमान का बदला लेने मुख्तार ने अपनाया था अपराध का रास्ता
बात 80 के दशक की है। जब मुख्तार के पिता मोहम्मदाबाद से नगर पंचायत के चेयरमैन थे। इस दौरान गांव के प्रभावशाली व्यक्ति सच्चिदानंद राय से मुख्तार के पिता की कहासुनी हो गई। सच्चिदानंद राय ने मुख्तार के पिता को सरेआम जलील कर दिया। जिसकी खबर मुख्तार के कानों तक पड़ी। गुस्से से आगबबूला हुआ मुख्तार बदला लेने को उतारू हो गया। मुख्तार ने सच्चिदानंद राय की हत्या की योजना बनाई। लेकिन, कॉलेज छात्र होने के चलते हत्या को अंजाम देने के लिए गांव के ही कुख्यात साधु सिंह की मदद मांगी। उसके बाद मुख्तार का साधु गुरु बन बैठा। मुख्तार ने अपराध की दुनिया में कदम रखा।

अपराध की दुनिया से राजनीति का सफर
प्रतिष्ठित राजनीतिक खानदान से होने के नाते मुख्तार को पॉलिटिक्स में आना ही था। साल 1996 में बीएसपी के टिकट पर पहली बार मुख्तार अंसारी विधानसभा पहुंचा। इसके बाद तो जैसे मुख्तार का वक्त भी साथ देने लगा। साल 2002, 2007, 2012 और फिर 2017 में भी मऊ से जीत हासिल की। खास बात यह रही कि मुख्तार जेल में भी रहकर तीन बार चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की। धीरे-धीरे मुख्तार की जड़ें गहरी होती चली गईं और उसकी तूती पूरे यूपी भी बोलने लगी।

2005 में AK-47 से चलाई गई 500 गोलियां
साल 2002 में मुख्तार की खानदानी सीट रही गाजीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय ने हथिया ली। जिससे मुख्तार नाराज हो गया। मुख्तार की नाराजगी कृष्णानंद के खून से दूर हुई। कृष्णानंद अपना कार्यकाल भी पूरा नहीं कर सके और 2005 यानी 3 साल बाद ही गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच उनकी हत्या कर दी गई। हमलावरों ने AK-47 से करीब 500 गोलियां बरसाईं। इस हत्याकांड में मुख्तार का नाम उजागर हुआ। लेकिन लंबी चली कोर्ट की सुनवाई के बाद मुख्तार जेल से रिहा हो गया।

बीजेपी की सत्ता में हुआ पतन
योगी सरकार के आते ही मुख्तार के अच्छे दिनों को ग्रहण लग गया। एक के बाद एक उसपर मुकदमे दर्ज होने शुरू हो गए। पत्नी और बेटे अब्बास अंसारी को भी मुकदमों में शामिल किया गया। मुख्तार की क्राइम कुंडली के मुताबिक, उसपर करीब हत्या और हत्या के प्रयास के 61 मुकदमें दर्ज हैं। करीब 600 करोड़ की प्रापर्टी भी है। बीजेपी की सत्ता आने के बाद 6 मामलों में दोषी करार दिया गया।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+